फसलों में खरपतवार नाशक का इस्तेमाल, सिकोड़ रहा फेफड़े... केजीएमयू में बीते कुछ सालों से ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी

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Published By Muskan Dixit
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खरपतवार नाशक पीकर गंभीर हुई महिला के फेफड़े सिकुड़ने से विशेषज्ञों की बढ़ी आशंका

लखनऊ, अमृत विचार : काकोरी क्षेत्र की एक महिला द्वारा घरेलू विवाद के चलते खरपतवार नाशक (पैराक्वाट) पीने का मामला दुखद अंत पर पहुंचा। गंभीर हालत में भर्ती महिला ने करीब एक सप्ताह तक जिंदगी के लिए संघर्ष किया, लेकिन अंततः शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। परिजनों ने पहले उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां हालत बिगड़ने पर 8 अप्रैल को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर लाया गया। यहां उसे पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में एक्मो मशीन के सपोर्ट पर रखा गया।

फेफड़े सिकुड़ने से बिगड़ी हालत

चिकित्सकों के अनुसार पैराक्वाट के सेवन से महिला के फेफड़े बुरी तरह प्रभावित हो गए और वह पल्मोनरी फाइब्रोसिस की शिकार हो गई थी। इस स्थिति में फेफड़े सिकुड़ जाते हैं और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। विभागाध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि यह अत्यंत विषैला रसायन है, जिससे जान का खतरा रहता है और तुरंत चिकित्सा जरूरी है।

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अध्ययन की जरूरत

डॉ. वेद प्रकाश के मुताबिक ऐसे मामलों में पिछले कुछ वर्षों में वृद्धि हुई है। आशंका है कि फसलों में अंधाधुंध खरपतवार नाशकों का उपयोग खाद्य श्रृंखला के माध्यम से शरीर में पहुंच रहा है, जिससे फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं। इस पर विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है।

70 से अधिक देशों में प्रतिबंधित

स्वास्थ्य पर दुष्प्रभावों के चलते पैराक्वाट पर 70 से अधिक देशों में प्रतिबंध लगाया जा चुका है। विशेषज्ञ भारत में भी कड़े कदम उठाने की आवश्यकता बता रहे हैं।

एक्मो: जीवन बचाने की आधुनिक तकनीक

एक्मो मशीन गंभीर स्थिति में हृदय और फेफड़ों के काम न करने पर रक्त में ऑक्सीजन पहुंचाकर मरीज को जीवन देने का समय देती है। केजीएमयू में इसका प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।

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