लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहरों के लिए अब लंबी लाइनों से छुटकारा, QR Code स्कैन कर खरीदें टिकट

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार। हुसैनाबाद एवं सम्बद्ध ट्रस्ट के अन्तर्गत बड़ा इमामबाड़ा स्थित भूलभुलइया, बावली, पिक्चर गैलरी, छोटा इमामबाड़ा स्थित शाही हम्माम, सतखण्डा और मक़बरा सआदत अली खां में आने वाले पर्यटकों की सुविधा के दृष्टिगत टिकट व्यवस्था के लिए ट्रस्ट ने https://lucknowimambara.com वेबसाइड तैयार करायी है। पर्यटकों की सुविधा के लिए क्यूआर कोड को स्कैन कर भी टिकट लिया जा सकता है। इसके अलावा टिकट बुकिंग सिस्टम एवं सेल्फ टिकट कियोस्क मशीन भी उपलब्ध कराई गई है।

विश्व धरोहर दिवस पर राज्य संग्रहालय में हुईं प्रतियोगिताएं

विश्व धरोहर दिवस पर राज्य संग्रहालय में विश्व एवं भारत की विरासतों पर आधारित प्रश्नोत्तरी, चित्रकला प्रतियोगिता एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। राज्य संग्रहालय में शनिवार को विश्व धरोहर दिवस के उपलक्ष्य में हमारी धरोहरें, हमारा गौरव विषय पर आधारित एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके अन्तर्गत संग्रहालय में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासतों और स्मारकों को दर्शाती एक प्रदर्शनी लगाई गई। इस अवसर पर भारत एवं विश्व की धरोहरों पर आधारित प्रश्नोत्तरी एवं चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।

प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1982 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स द्वारा की गई थी, जिसे वर्ष 1983 में यूनेस्को द्वारा वैश्विक मान्यता प्रदान की गई।

यह दिन संपूर्ण मानवता की सांस्कृतिक विविधताओं और ऐतिहासिक विरासतों के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता जगाता है। साथ ही यह हमें उन प्राचीन स्मारकों और स्थलों के महत्व को याद दिलाता है जो समय की मार झेल रहे हैं और जिन्हें भावी पीढ़ियों के लिए बचाना हमारा सामूहिक दायित्व है।

संग्रहालय द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में देश की सांस्कृतिक विश्व धरोहरों के छायाचित्रों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में वर्ष 1983 में शामिल भारत के सर्वप्रथम स्थलों अजंता एवं एलोरा की गुफाओं, आगरा का किला एवं ताजमहल से लेकर वर्ष 2024 में शामिल असम के चराईदेव में स्थित अहोम राजवंश की टीला-दफन प्रणाली तक के चित्रों को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी का उद्घाटन निदेशक प्राणी उद्यान डॉ. संजय कुमार बिस्वाल ने किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने विश्व धरोहर विषयक चित्रकला एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता और ज्ञान के माध्यम से भारत की गौरवशाली परंपराओं को जीवंत कर दिया। प्रतियोगिताओं में बालाजी इण्टरनेशनल स्कूल, करामत हुसैन मुस्लिम गर्ल्स इण्टर कालेज, सहाय सिंह बालिका इण्टर कालेज, लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एवं कालेजेज, ग्रीनफील्ड पब्लिक स्कूल, विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल, सरस्वती विद्यालय कन्या इण्टर कालेज, विज्ञान फाउण्डेशन, नवयुग रेडियन्स एसएस स्कूल विद्यालयों के 267 प्रतिभागियों ने भाग लिया। चित्रकला प्रतियोगिता का प्रथम पुरस्कार प्रियांश वर्मा, द्वितीय पुरस्कार अक्षत मिश्रा, तृतीय पुरस्कार यशी शुक्ला को प्राप्त हुआ। प्रतियोगिता का सांत्वना पुरस्कार अथर्व शंकर, काजल यादव, एंजल वर्मा, देवश्री सेन एवं मरियम शोएव को प्राप्त हुआ।

प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का प्रथम पुरस्कार आराध्या सिंह, द्वितीय पुरस्कार श्रियांश अस्थाना, तृतीय पुरस्कार ओजस तिवारी को प्राप्त हुआ। प्रतियोगिता के सांत्वना पुरस्कार आलेख वर्मा, साक्षी सोनकर, यजत उपाध्याय, छविमणि त्रिपाठी एवं शशांक यादव को प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के समापन पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में डॉ. संजय कुमार विस्वाल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। डॉ. विस्वाल ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र प्रदान किए। डॉ. संजय कुमार विस्वाल ने अपने संबोधन में कहा कि सांस्कृतिक धरोहरें किसी भी राष्ट्र की पहचान होती हैं। आज की युवा पीढ़ी का इन विरासतों से जुड़ना न केवल गर्व का विषय है, बल्कि भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है।

राज्य संग्रहालय के निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह ने कहा कि विश्व धरोहरें हमारी साझा संस्कृति और इतिहास की अमूल्य पहचान हैं, जो पूरी मानवता के लिए गर्व का विषय हैं। ये ऐतिहासिक स्मारक और प्राकृतिक स्थल हमें अपने पूर्वजों की कला, कौशल और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देते हैं। इनको संरक्षित करना हमारा सामूहिक उत्तरदायित्व है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनके गौरव का अनुभव कर सकें।

जिडेंसी में विरासत पदयात्रा आयोजित

इंटैक लखनऊ चैप्टर एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संयुक्त तत्वावधान में विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर लखनऊ रेजिडेंसी परिसर में विरासत पदयात्रा का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और आमजन में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। पदयात्रा के दौरान प्रतिभागियों को मुख्य भवन, बेगम कोठी और बैली गार्ड गेट सहित विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया गया। विशेषज्ञों ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में रेजिडेंसी की भूमिका और ब्रिटिशकालीन स्थापत्य की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में खुन खुन जी गर्ल्स डिग्री कॉलेज और बीकेटी इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। ‘जनरल कोठी’ के अवलोकन और प्रदर्शनी के माध्यम से उन्हें ऐतिहासिक विरासत की जानकारी दी गई।

प्राचीन इतिहास विभाग में हुआ कार्यक्रम

लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग में विश्व विरासत दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मेजबानी ‘संग्राम सोसाइटी’ द्वारा की गई, जिसमें छात्रों और शिक्षकों ने पूरे उत्साह के साथ भागीदारी निभाई। इस अवसर पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने विश्व विरासत के महत्व, संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक धरोहर पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रो. ममता मिश्रा और डॉ. रश्मि सिंह शामिल रहीं, जिन्होंने प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया।

अयोध्या के अवध विश्वविद्यालय में संगोष्ठी का आयोजन

विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंधन एवं उद्यमिता विभाग द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता पूर्व विभागाध्यक्ष एवं डीन प्रो. आरएन राय ने कहा कि विश्व धरोहर हमारी पहचान और इतिहास का अमूल्य हिस्सा है। इसको संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों को धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। अयोध्या की धरोहर स्थलों के बारे में विस्तार से बताते हुए छात्रों से कहा कि यह आपकी जिम्मेदारी है कि धरोहर स्थलों को संरक्षित करने का प्रयास सभी करें। यदि ये स्थल ही संरक्षित नहीं रहेंगे तो पर्यटक क्या देखने आएंगे और आपकी विरासत भी संरक्षित नहीं रह पाएगी। भारत में पर्यटन के लिए अनेकों विकल्प उपस्थित हैं।

विश्व धरोहर संरक्षित रखना सबकी जिम्मेदारी : प्रो. राय

विशिष्ट वक्ता प्रो. हिमांशु शेखर सिंह ने धरोहरों के आर्थिक और पर्यटन महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि इनके संरक्षण से स्थानीय विकास और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन उद्योग हमें केवल रोजगार ही नहीं देता बल्कि देश को विकासशील बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेन्द्र कुमार वर्मा ने कहा कि विश्व धरोहर दिवस हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का संदेश देता है। संयोजक डॉ. महेन्द्र पाल सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ. राणा रोहित सिंह, डॉ. आशुतोष पांडेय, डॉ. अंशुमान पाठक, डॉ. रविन्द्र भारद्वाज सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।

 

 

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