प्रभु नाथ धाम: जहां पहुंचकर श्रद्धालु होते हैं धन्य 

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Published By Anjali Singh
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नेपाल अपनी उत्पत्ति काल से ही देवर्षि, महर्षियों तथा अनेक देव स्थलों का देश रहा है। यहां आज भी अनेक पौराणिक स्थल, सिद्ध संत तथा महात्माओं की जन्मभूमि और कर्मभूमि अभी मौजूद हैं, जहां नेपाल ही नहीं भारत के भी हजारों श्रद्धालु आते रहते हैं। यहां की पवित्र भूमि पर भारत से भी कई साधक संत आए और यहीं के होकर रह गए। ऐसा ही एक पवित्र स्थल स्वर्ग द्वारी है, जिसे प्रभु नाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है। प्रभु नाथ धाम नेपाल के सुदूर पश्चिम प्यूठान जिले में ऊंचे पहाड़ पर स्थित है। - यशोदा श्रीवास्तव

स्फूर्ति के संचार की अनुभूति

यूं तो यहां सावन मास में श्रद्धालुओं का रेला लगता है, लेकिन हाल के वर्षों से हर महीने यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु आने लगे हैं। यहां आने के लिए मुख्यतः दो रास्ते हैं। यूपी के बहराइच जिले से होकर नेपाल के बांके से होकर आ सकते हैं। इस रास्ते करीब 150 किमी दूरी तय कर भिंगरी होते हुए प्रभु नाथ धाम तक पहुंचा जा सकता हैं।

दूसरा रास्ता सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी नेपाल सीमा पार कर कृष्णा नगर से आना होता है, जहां से बसें, छोटी बसें यहां तक आती हैं। लोग अपने निजी साधनों से भी आते हैं। बसों का किराया प्रति व्यक्ति 500 से 700 रूपए तक है। नेपाल के भालू बांग से पहाड़ के दुर्गम रास्तों से होकर भिंगरी पहुंचना होता है। भिंगरी से प्रभु नाथ धाम तक के करीब 30 किमी तक पहाड़ी मार्ग बहुत ही घुमावदार है, जिसे पूरा कर पाना बेहद कठिन है। 

इन कठिन मार्ग को पूरा कर श्रद्धालु प्रभु नाथ धाम के निकट वहां तक पहुंचते हैं, जहां से 700 सीढ़ी चढ़ कर इस पवित्र और पूज्यनीय स्थल तक पहुंचना होता है। जाहिर है इतनी विकट और पहाड़ की लंबी यात्रा से थकान और सुस्ती से चूर हो जाना लाजिमी है, लेकिन चमत्कार यह है कि यहां पहुंचते ही गजब की स्फूर्ति के संचार की अनुभूति होती है।  प्रभुनाथ आश्रम का वृतांत अनंत है। यहां ऋ षि-मुनियों की तपस्या के भी ढेरों उदाहरण हैं।

इस पुण्य भूमि का खास महत्व एक चमत्कारिक संत 1008 महा प्रभु हंसानंद महराज से जाना जाता है। यह तपस्वी संत 75 वर्ष पूर्व यहीं ब्रम्हलीन हुए थे। यहीं पर उनकी समाधि है। इस स्थल की बढ़ती महत्ता को देखते हुए स्थानीय नगरपालिका प्रशासन और नेपाल सरकार ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेहतर इंतजाम कर रखें हैं। सरकारी अस्पताल, धर्म शाला, गौशाला सब कुछ यहां उपलब्ध है।

लोकमान्यता
 
प्रभु हंसानंद के महात्म्य की अनेक कहानियां है। यहां मौजूद पुजारी और आसपास के लोग इसे कहानी नहीं उनका प्रताप मानते हैं। नेपाल ही नहीं भारत के प्रयागराज, हरिद्वार,काशी आदि जगहों तक उनके भक्त विराजमान हैं। प्रभु हंसानंद के विपत्ति में अपने भक्तों की मदद करने के ढेर सारी किंवदंतियां यहां हर जुबान पर हैं। बताते हैं कि सदियों पूर्व किसी ऋ षि ने भविष्यवाणी की थी कि सल्यान जिले के रुमटी गांव में गौतमवंश में भगवान का अवतार होगा। उसका कर्म क्षेत्र प्युठान जिले का दुर्गम पहाड़ी होगा। आगे चलकर लोग इसे स्वर्गद्वारी के नाम से जानेंगे और यह एक सिद्धपीठ तीर्थ स्थल होगा। प्रभु हंसानंद महराज का जन्म रुमटी गांव में ही हुआ था। वे यहां आए, वर्षों तक तपस्या की और यहीं ब्रह्मलीन हुए।

प्रभु हंसानंद महाराज को लोग अवतारी पुरुष मानते हैं। आगे चलकर उनके द्वारा किए गए शुभ-अशुभ भविष्यवाणियों से भी यह सिद्ध होता है। कुछ वर्ष पूर्व नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप की भविष्यवाणी उन्होंने दशकों पूर्व की थी। यहां के पुजारी बताते हैं कि स्वर्गद्वारी के महाप्रभु हंसानंद महाराज जी यज्ञों के साथ गोपालात्मा बनकर भगवान कृष्ण के समान हजारों गायों को पालने और उन्हें चराने का काम स्वयं करते थे। यहां आश्रम पर आज भी सैकड़ों गायों का पालन होता है। बताते हैं कि यहां आकर सच्चे मन और पवित्र भाव से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। यहां आसपास के लोग बताते हैं कि भाव और श्रद्धा से जो भी स्मरण किया सबके कष्ट अवश्य ही दूर होते हैं।

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