लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन, कृषि मंत्री बोले- खाद्यान्न उत्पादन में यूपी नंबर वन, अपनी जलवायु के मुताबिक योजना बनाएं राज्य
अमृत विचार : यूपी की राजधानी लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का शुभारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में कई राज्यों के कृषि मंत्री, कृषि वैज्ञानिक और एग्रीकल्चर से जुड़े विभागों के अधिकारी शामिल हुए हैं। खेतीबाड़ी की उन्नति के साथ किसानों की तरक्की पर मंथन चल रहा है।
इस क्रम में कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी खाद्यान्न उत्पादन में नंबर वन है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों को वहां की परिस्थितियों के मुताबिक काम करना होगा।
यूपी की योगी सरकार ने इतिहास रच दिया। अनाज उत्पादन में लगातार तरक्की हो रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि हमें ये याद रखना होगा कि हर राज्य की अपनी अलग जलवायु हैं। इसलिए वहां की स्थिति के मुताबिक कृषि की रणनीति बनानी होगी।
यूपी की बात करें तो यह नंबर वन है। आज भारत को खाद्यान्न उत्पादन में किसी का मुंह नहीं देखना पड़ता। करीब 25 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न निर्यात कर रहे हैं।
कृषि क्षेत्र में हमें तीन बिंदुओं पर फोकस करना है। खाद्य सुरक्षा, किसान की आजीविका और पोषण, इन लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ना है। ये भी ध्यान रखना है कि किसान पीछे नहीं छूटने पाए। उनकी फसलों के नुकसान की भरपाई भी करनी है।
कृषि में विविधता पर ध्यान देने की जरूरत है। यूपी में देखा गया है कि यहां खाद की खपत बढ़ी है। हमें जरूरत से ज्यादा खाद और पेस्टीसाइड इस्तेमाल नहीं करना है। पंजाब से सीख सकते हैं। पंजाब में अधिक उर्वरक उपयोग करने से वहां की मिट्टी प्रभावित हुई है।
नकली खाद, बीज को लेकर कानून बना है। राज्य सरकारें नियमित रूप से जांच करें। किसानों से धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हो।
कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों ने करीब 3400 नई किस्में तैयार की हैं। आधुनिक बीज हैं। मसलन, बारिश कम होने की स्थिति में किस तरह के बीज जरूरत पड़ेगी। भविष्य में इसके लिए भी तैयारी करनी होगी।
हर राज्य में कृषि का फुलप्रूफ प्लान बने। हमारे पास करीब 16 हजार कृषि वैज्ञानिकों की विशाल संख्या है। वह निरंतर कार्य कर रहे हैं।
अभी फॉर्मर रजिस्ट्री का काम चल रहा है। कुछ राज्य पिछड़े हैं। उन्हें इस पर ध्यान देना है। इससे किसानों को लाभ मिलेगा। केसीसी से लेकर अन्य योजनओं में फायदा होगा। किसानों को समझाने और जागरुक करने की जरूरत है। कृषि वैज्ञानिक गांवों से जुड़ें। जमीनी स्थिति पर नजर रखें। तभी किसानों को फायदा होगा।
