भारत के लिए राहत की खबर: अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर एक महीने की छूट बढ़ाई, ट्रंप प्रशासन का यू-टर्न!
वाशिंगटनः वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता और मध्य पूर्व के तनाव के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने रूसी तेल की खरीद पर लगी प्रतिबंधों से अस्थायी छूट को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन पहले ही इस छूट को न बढ़ाने के संकेत दिए गए थे। अब इसे ट्रंप प्रशासन का स्पष्ट यू-टर्न माना जा रहा है।
छूट कब तक बढ़ाई गई?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने देर रात नया जनरल लाइसेंस जारी किया, जिसमें 17 अप्रैल या उससे पहले जहाजों पर लोड किए गए रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद को 16 मई तक की अनुमति दी गई है। इससे पहले यह छूट 11 अप्रैल को खत्म हो गई थी।
नए लाइसेंस में ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से जुड़े किसी भी लेन-देन को शामिल नहीं किया गया है। यह छूट केवल समुद्री मार्ग से पहले से लोड किए गए तेल पर लागू है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इस कदम का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित रखना है, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और आपूर्ति व्यवधान के कारण। इससे पहले मार्च में अमेरिका ने भारत समेत कुछ देशों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी राहत दी थी, जो अब बढ़ा दी गई है।
भारत को क्या फायदा होगा?
यह फैसला भारत के लिए खासतौर पर फायदेमंद साबित होगा क्योंकि देश पहले से ही रूस से बड़े पैमाने पर सस्ता कच्चा तेल आयात कर रहा है। रूस के भारत में राजदूत ने भी भरोसा जताया है कि रूस भारत को तेल, एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई और बढ़ाएगा।
आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 5.8 अरब डॉलर हो गया था। साल 2024 में भारत ने रूस से औसतन 20 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा, जो कुल 44 अरब डॉलर के करीब था। इस छूट से भारतीय रिफाइनरियों को सप्लाई चेन में कोई व्यवधान नहीं होगा और तेल की कीमतें भी नियंत्रित रहेंगी, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।
अमेरिकी सांसदों में नाराजगी
हालांकि, इस फैसले पर अमेरिका के कुछ सांसदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि छूट को नवीनीकृत नहीं किया जाएगा। सांसदों का कहना है कि ऐसी राहत रूस और ईरान जैसी देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकती है, जबकि रूस यूक्रेन संघर्ष में लगा हुआ है।
