कहां खो गया इक्का!
पता नहीं इक्का कहां खो गया? पहले शहरों-कस्बों में आवागमन का यही मुख्य साधन हुआ करता था। बैलगाड़ी गांव-देहात में आवागमन और भार वाहन का साधन थी। मोहनजोदड़ो, हड़प्पा की खुदाई में बैल की एक प्रतिमा मिली है। तांबे का एक इक्का मिला है। इससे प्रमाणित होता है कि इक्का भारत सहित एशिया के एक बड़े भूभाग में आवागमन का प्रमुख साधन था। अब करनाल की राखीगढ़ी की खुदाई में कुछ ऐसी ही चीजें मिल रही हैं। इक्का को एक घोड़ा या एक बैल खींचता था। एक धुरी पर दो पहिए लगे होते थे और ऊपर छाया के लिए एक छतरी। गाय दूध देती थी और उसके बछड़े खेत में हल चलाते थे। यही बैल गाड़ी भी खींचते थे। -शिवचरण चौहान
रथ, रब्बा, बहल,छकड़ा और सग्गड़ भी। प्राचीन काल में इक्का घोड़ा दौड़ और बैल और बैल गाड़ी की दौड़ प्रतियोगिता होती थी। एक्का, तांगा, खड़खड़ा, टमटम, रथ, रब्बा, सग्गड़ और बैलगाड़ी यही आवागमन के प्रमुख साधन थे। जब तक डीजल और पेट्रोल की खोज नहीं हुई थी। बिजली और सौर ऊर्जा की खोज नहीं हुई थी। इन सबका बहुत महत्व था। गांव की बारात बैलगाड़ियों से जाती थीं। कतार में गाड़ियां कच्ची सड़कों पर चलती दिखाई देती थीं। गाड़ी वाले बैला धीरे हांक रे तथा जरा ललकार के बैला हांकों, मेरे सैंया गाड़ीवान जैसे गीत फिल्मों में लोकप्रिय होते थे।
फिल्म तीसरी कसम का गाड़ीवान बहुत लोकप्रिय हुआ था। टमटम चार पहियों की गाड़ी होती थी। जबकि इक्का दो पहियों की जिसमें सिर्फ एक सवारी बैठती थी। बग्घी भी चार पहियों की सवारी होती थी। पहले राजा महाराजा और बादशाह अमीर लोग बग्घी पर चला करते थे। बग्घी पर अभी भी बारातें निकलती हैं।
डेकोरेटेड बग्घी कई शहरों में शादी-बारात के लिए बुक की जाती थी। अब सब बीती यादें हैं। चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी उसने कहा था में तांगे वाले का जिक्र आया है। अब पेट्रोल-डीजल बैटरी और बिजली सौर ऊर्जा से चलने वाली कारें, बसें आ गई हैं, तो इक्के वालों को कौन पूछेगा? एक संस्कृति विलुप्त हो रही है। आवागमन के साधन इतिहास में पढ़ाए जाएंगे इक्का, तांगा, टमटम और बग्घी।
