समय और भाग्य

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Published By Anjali Singh
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एक सेठ थे, जिनके पास काफी दौलत थी। सेठ जी ने अपनी बेटी की शादी एक बड़े घर में की थी। परंतु बेटी के भाग्य में सुख न होने के कारण, उसका पति जुआरी, शराबी निकल गया, जिससे सब धन समाप्त हो गया। बेटी की यह हालत देखकर सेठानी जी रोज सेठ जी से कहती कि आप दुनिया की मदद करते हो, मगर अपनी बेटी परेशानी में होते हुए उसकी मदद क्यों नहीं करते हो? सेठ जी ले कहा- “जब उनका भाग्य उदय होगा, तो अपने आप सब मदद करने को तैयार हो जाएंगे।” एक दिन सेठ जी घर से बाहर गए थे कि तभी उनका दामाद घर आ गया। सास ने दामाद का आदर-सत्कार किया और बेटी की मदद करने का विचार उसके मन में आया कि क्यों न मोतीचूर के लड्डूओं में अर्शफिया रख दी जाए।-ऋतु गुप्ता

यह सोचकर सास ने लड्डूओं के बीच में अर्शफिया दबाकर रख दीं और दामाद को टीका लगाकर विदा करते समय पांच किलों शुद्ध देशी घी के लड्डू, जिनमें अर्शफिया थीं, दिए। दामाद लड्डू लेकर घर से चला, दामाद ने सोचा कि इतना वजन कौन लेकर जाए क्यों न यहीं मिठाई की दुकान पर बेच दिए जाए और दामाद ने वह लड्डुओं का पैकेट मिठाई वाले को बेच दिया और पैसे जेब में डालकर चला गया।

उधर सेठ जी बाहर से आए तो उन्होंने सोचा घर के लिए मिठाई की दुकान से मोतीचूर के लड्डू लेता चलू और सेठ जी ने दुकानदार से लड्डू मांगे। मिठाई वाले ने वही लड्डू का पैकेट सेठ जी को वापिस बेच दिया। सेठ जी लड्डू लेकर घर आए। सेठानी ने जब लड्डूओं का वही पैकेट देखा तो सेठानी ने लड्डू फोड़कर देखे, अर्शफिया देखकर अपना माथा पीट लिया। 🌺

सेठानी ने सेठ जी को दामाद के आने से लेकर जाने तक और लड्डुओं में अर्शफिया छिपाने की बात कह डाली। सेठ जी बोले-“भाग्यवान मैंनें पहले ही समझाया था कि अभी उनका भाग्य नहीं जागा। देखा मोहरें न तो दामाद के भाग्य में थी और न ही मिठाई वाले के भाग्य में। इसलिये कहते हैं कि भाग्य से ज्यादा और समय से पहले न किसी को कुछ मिला है और न मीलेगा।” कथा से सीख मिलती है कि ईश्वरर जितना दे उसी मैं संतोष करना चाहिए।