Moradabad:बढ़ता तापमान न तोड़ दे कई वर्षों का रिकॉर्ड, 40-45 डिग्री तक रहता है तापमान 

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Published By Monis Khan
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मुरादाबाद, अमृत विचार। इस बार भीषण गर्मी पिछले कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ सकती है। जिले में अभी तक गर्मी में 40-45 डिग्री अधिकतम तापमान का औसत है, लेकिन इस बार अप्रैल में ही पारा 40 के पार पहुंच गया। मौसम विभाग अभी और तापमान बढ़ने का अनुमान जता रहा है।

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से बने सिटी हीट एक्शन प्लान 2026 में मई-जून को सर्वाधिक गर्म महीना माना गया है। गर्मी में 40-45 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान पिछले कई वर्षों में पहुंचा है, लेकिन इस बार सूरज के चढ़ते तेवर को देखते हुए रिकॉर्ड पर पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है। अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में बुधवार को ही अधिकतम पारा 41 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच चुका है। तापमान अधिक बढ़ने और लू से हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ना तय है। जिसे देखते हुए कलेक्ट्रेट स्थित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सभी विभागों और तहसीलों को लू से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। जिला आपदा विशेषज्ञ प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी अनुज सिंह और अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ममता मालवीय के निर्देश के अनुसार प्लान के अनुरूप सभी विभागों को आपसी समन्वय से लू व भीषण गर्मी से बचाव के उपाय करने के लिए एडवाइजरी जारी की गई है।

यह हैं हीट स्ट्रोक के लक्षण
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने बताया कि हीट स्ट्रोक, हीट रैश, हीट क्रैम्प के लक्षण कमजोरी, चक्कर आना, सरदर्द, उबकाई, पसीना आना, मूर्छा आदि है। इसे पहचानें और इस प्रकार के लक्षण की स्थिति में तत्काल नजदीकी अस्पताल में सम्पर्क करें। यदि मूर्छा या बीमारी अनुभव करते हैं तो तुरन्त चिकित्सीय सलाह लें।

बचाव के लिए यह करें उपाय

अधिक से अधिक पानी पियें

हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले वस्त्र पहनें
धूप के चश्मे, छाता, टोपी, व चप्पल का प्रयोग करें
अगर आप खुले में कार्य करते है तो सिर, चेहरा, हाथ पैरो को गीले कपड़े से ढके रहे तथा छाते का प्रयोग करें।
यात्रा करते समय पीने का पानी अपने साथ ले जाएं
ओआरएस, घर में बने हुये पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी (माड़), नीबू पानी, छाछ का उपयोग करें, जिससे कि शरीर में पानी की कमी की भरपाई हो सके

अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ममता मालवीय ने बताया कि हीट वेव और लू से बचाव के लिए घरों को ठंडा रखें। पर्दे दरवाजे आदि का उपयोग करें। शाम और रात के समय घर तथा कमरों को ठंडा करने के लिए इसे खोल दें। कार्य करने वाले कर्मियों को सीधी सूरज की रोशनी से बचना चाहिए। अधिक श्रमसाध्य कार्यों को ठंडे समय में करें। गर्भस्थ महिला कर्मियों व रोगग्रस्त कर्मियों पर अतिरिक्त ध्यान देना चाहिए।

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