लखनऊ में मनमाना किराया वसूल रहे ई रिक्शा और ई-ऑटो, शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बना बड़ी चुनौती 

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

लखनऊ,अमृत विचारः ई-रिक्शा और ई-ऑटो का अनियंत्रित संचालन अब शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बिना निर्धारित मार्ग और किराया प्रणाली के ये वाहन सवारियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। शहर में वर्तमान में एक लाख से अधिक ई-रिक्शा और 30 हजार ई-ऑटो संचालित हो रहे हैं, जिनमें से बड़ी संख्या बिना किसी ठोस नियमन के सड़कों पर दौड़ रही है।

चारबाग, चौक और ठाकुरगंज रकाबगंज, कैसरबाग और गोमती नगर जैसे व्यस्त इलाकों में स्थिति सबसे अधिक खराब है। जहां सीएनजी ऑटो चालकों को तय रूट और किराया प्रणाली का पालन करना पड़ता है, वहीं ई-रिक्शा और ई-ऑटो बिना किसी नियम के कहीं भी सवारी बैठा और उतार रहे हैं। इससे न केवल यातायात जाम की समस्या बढ़ रही है, बल्कि अतिक्रमण और अव्यवस्था भी फैल रही है।

टैम्पो-टैक्सी एवं ऑटोरिक्शा संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष पंकज दीक्षित ने बताया कि हर महीने सैकड़ों नए ई-वाहनों का पंजीकरण हो रहा है, जिससे कुल संख्या 1.25 लाख से अधिक हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर की सड़कें इतनी बड़ी संख्या में वाहनों का भार सहने में सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा, अधिकांश ई-रिक्शा अवैध चार्जिंग के जरिए चलाए जा रहे हैं, जिससे सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। 

समस्या का एक बड़ा कारण केंद्र सरकार की वह नीति भी है, जिसमें ई-रिक्शा और ई-ऑटो को परमिट से मुक्त रखा गया है। इसी के चलते इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। संयुक्त मोर्चा ने प्रशासन को कई सुझाव दिए हैं, जिनमें ई-वाहनों की संख्या निर्धारित करना, अवैध चार्जिंग स्टेशनों पर रोक, निर्धारित स्टैंड से संचालन और ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य करना शामिल है। 

इसके अलावा, मुख्य मार्गों पर ई-रिक्शा के संचालन पर प्रतिबंध लागू करने, नियमित चेकिंग अभियान चलाने और नाबालिग चालकों पर सख्ती करने की मांग भी की गई है। आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पाण्डेय ने कहा कि परमिट के दायरे में लाने की कवायद काफी दिनों से चल रही है। इस पर बात हुई है। जब तक आदेश न हो जाये कुछ कहना मुश्किल होगा।

ये भी पढ़ें : 
वाराणसी एयरपोर्ट पर विमानों की लैंडिंग थमी,मौसम खराब होने से लखनऊ डायवर्ट की गई कई उड़ाने

संबंधित समाचार