लखनऊ में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं में मचा हाहाकार, दिन में 1123 रुपये बैलेंस, शाम को हो गया निगेटिव
-रात में कराते है रिचार्ज दिन में आता है निगेटिव बैलेंस का मैसेज -बिना इस्तेमाल किये ही उपभोक्ताओं को लग रहा हजारों रुपयों का चूना -स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामलों को लेकर 300 से 400 शिकायतें आ रही रोज -उपभोक्ताओं ने की चेक मीटर लगाने की अधिकारियों से अपील, अधिकारियों ने जोड़े हाथ
नीरज अभिषेक/ लखनऊ, अमृत विचार: राजधानी लखनऊ में कनेक्शन नंबर 0193879046 के प्रीपेड मीटर में दिन में 1123 रुपये बैलेंस था, देर शाम ही निगेटिव हो गया और रात 1 बजे बिजली काट दी गई। शिकायत लेकर तकरोही निवासी उपभोक्ता अंशुल अधिकारियों के पास गए, लेकिन निराकरण के बजाए अधिकारियों ने कहा कि, स्मार्ट मीटर पर उनका कोई कंट्रोल नहीं।
हुसैनाबाद छोटे इमामबाड़े निवासी डॉ. शहामत हुसैन रिजवी भी विभाग के अधिकारियों पर कुछ ऐसा ही आरोप लगाया है। उनके क्लीनिक के कनेक्शन नंबर 5202311308 में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा है। क्लीनिक केवल 4 घंटे ही खुलता है रविवार को बंदी रहती है। 25 अप्रैल को 900 रुपये का रिचार्ज कराया। बैलेंस 21.85 रुपये दिखाया गया, शाम विभाग एसएमएस में 491.04 बकाया बताकर तीन दिनों में रिचार्ज न कराने पर बिजली काटने की चेतावनी दी गई थी। 26 अप्रैल को क्लीनिक बंद थी। बिजली का उपयोग नहीं हुआ, इसके बाद भी रात में बैलेंस खत्म होने और निगेटिव बैलेंस 2573.78 रु का मैसेज आ गया। डॉ.हुसैन ने कहा कि बिजली का उपयोग ही नहीं हुआ तोबैलेंस निगेटिव कैसे हो गया। समस्या लेकर अधिकारियों के पास गया, लेकिन उन्होंने निस्तारण कराने बजाए हाथ जोड़ लिए।
इन क्षेत्रों से सबसे अधिक आ रही शिकायतें
राजधानी में तेज मीटर और तकनीकी खामी के चलते गलत बिलो और मीटर बदलवाने की सबसे ज्यादा शिकायते चिनहट, डालीगंज, राजाजीपुरम ओल्ड और न्यू बीकेटी, चौक, सहादतगंज ,दुबग्गा, ऐशबाग, मोहनलालगंज, सरोजनीनगर, यहियागंज, जानकीपुरम, गोमती नगर विस्तार, तेलीबाग, इंदिरानगर, मडियांव, उतरेठिया क्षेत्र से आ रही है। वहीं इन समस्याओं से परेशान उपभोक्ता आए दिन उपकेंद्रो पर प्रदर्शन भी कर रहें है।
शासन के ये निर्देश हैं
1-प्रीपेड मीटर में जीरों बैलेंस होने के बाद भी तीन दिन का समय मिलता है।
2-रविवार और अवकाश के दिनों में कनेक्शन का नहीं काटा जा सकता।
3-इसके साथ ही नए स्मार्ट मीटर लगने के बाद 45 दिनों तक कनेक्शन को नही काटा जा सकता है।
शिकायत मिलने पर तकनीकी सहित सभी जरुरी जांच कराकर समस्या का निस्तारण किया जा रहा है। उपभोक्ताओं को अपने बैलेंस को समय- समय पर चेक करने के साथ ही संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों पर भी मीटर संबंधी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
रवि अग्रवाल, मुख्य अभियंता सेंट्रल जोन
स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। हालात यह हैं कि रिचार्ज करने के कुछ चंद घंटों बाद ही बैलेंस खत्म होने के मैसेज आ रहे हैं। कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिना पर्याप्त बिजली उपयोग के ही उनके खातों से हजारों रुपये कट रहे हैं। ऐसी समस्याओं से परेशान 300 से 400 उपभोक्ता रोजाना बिजली उपकेंद्रों पर शिकायतें दर्ज करा रहें हैं। इनमें मीटर के तेज चलने, धीमी रीडिंग, जंप रीडिंग और वास्तविक लोड से अधिक खपत दिखाने जैसी समस्याएं प्रमुख हैं।
इसके साथ ही तकनीकी खामियों के कारण खत्म हो रहे प्रीपेड बैलेंस को ठीक कराने के लिए उपभोक्ताओं को महीनों कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। शिकायत के बाद भी विभागीय अधिकारियों की ओर से यह साफ नहीं किया जाता है कि मीटर में बैलेंस आखिर क्यों निगेटिव हो रहें है, और न ही बिजली खपत की सही जानकारी के लिए विभाग की ओर से चेक मीटर लगाया जा रहा है।
आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी से बिजली व्यवस्था पर असर, आंदोलन की चेतावनी
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की ओर से 45 प्रतिशत आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी किए जाने के बाद प्रदेश में बिजली व्यवस्था पर असर पड़ने की बात सामने आई है। पावर कॉरपोरेशन के इस निर्णय से कर्मचारियों की भारी कमी हो गई है, जिससे उपभोक्ताओं को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में निविदा, संविदा कर्मचारी संघ ने गंभीर चिंता जताई है। संघ का कहना है कि कर्मचारियों की कमी के चलते अकुशल श्रमिकों से लाइन का कार्य कराया जा रहा है, जिससे हादसों की संख्या बढ़ रही है।
संघ के प्रदेश महामंत्री देवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने बताया कि विभागीय नियमों के तहत अकुशल कर्मचारियों से लाइन का कार्य कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद ऐसा कराया जाना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि कर्मचारियों की जान को भी खतरे में डाल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अकुशल कर्मचारियों से लाइन कार्य कराने पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो संगठन प्रदेश स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होगा। संघ ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर छंटनी के नाम पर हटाए गए कर्मचारियों को पुनः बहाल करने, लगातार हो रही दुर्घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
