आर्थिकी को गति देने वाला पथ एक्सप्रेसवे
पिछले तीन दशकों के कालखंड में स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के तहत सड़कों का विस्तार एवं चौड़ीकरण हुआ, जिससे लॉजिस्टिक की लागत नियंत्रित रहने के साथ ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को गति मिली। साथ ही यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और अब गंगा एक्सप्रेसवे इस परिवर्तन का प्रतीक है।
उत्तर प्रदेश जनसंख्या की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है। यह देश की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। गंगा-यमुना का मैदानी भाग होने से कृषि उत्पादन के मामले में देश का अग्रणी राज्य है। राज्य का आधारभूत ढांचा नित्य नई ऊंचाइयों को छूने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पिछले तीन दशकों के कालखंड में स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के तहत सड़कों का विस्तार एवं चौड़ीकरण हुआ, जिससे लॉजिस्टिक की लागत नियंत्रित रहने के साथ ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को गति मिली। साथ ही यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और अब 549 किमी का गंगा एक्सप्रेसवे इस परिवर्तन का प्रतीक है।
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से राज्य की अर्थिकी को एक नई गति मिलने की पूरी संभावना है। यह परियोजना केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि विकास, निवेश और रोजगार का बहुआयामी इंजन साबित होगा, क्योंकि यह मेरठ से प्रयागराज तक कई जनपदों और गांवों से होते हुए पूरब और पश्चिम को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण परिपथ भी है। इसके कारण कृषि विज्ञान और औद्योगिक निर्माण को गति मिलेगी।
आर्थिक विकास के लिए सुगम और तेज परिवहन व्यवस्था अत्यंत आवश्यक होती है। गंगा एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को पूर्वी उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान इलाकों से जोड़ता है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह मार्ग राज्य के लगभग एक दर्जन जिलों को जोड़ते हुए क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने का कार्य करेगा। इस एक्सप्रेसवे के चालू होने से यात्रा का समय कम होगा, परिवहन लागत घटेगी और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी। इससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के बीच आर्थिक संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी।
इस एक्सप्रेसवे के विकसित होने से औद्योगिक कॉरिडोर विकसित होगा, क्योंकि बेहतर सड़क कनेक्टिविटी निवेशकों के लिए सबसे बड़े आकर्षण का केंद्र होती है। यह समय की बचत के साथ-साथ परिवहन की लागत को भी नियंत्रित करती है, जिससे वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और मैन्युफैक्चरिंग हब के विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे न केवल बड़े उद्योगों को लाभ होगा, बल्कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भी नई ऊर्जा मिलेगी। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को भी इससे मजबूती मिलेगी।
गंगा-यमुना, घाघरा जैसी बड़ी नदियों का मैदान होने के कारण उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था मूल रूप से कृषि आधारित है। गंगा एक्सप्रेसवे किसानों के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आएगा। बेहतर सड़क व्यवस्था से किसान अपनी उपज को तेजी से मंडियों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य मिल सकेगा। काश्तकारों द्वारा उत्पन्न उत्पाद जैसे फल, सब्जियां और दुग्ध उत्पाद समय पर बाजार तक पहुंचने के कारण खराब होने से बचेंगे। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स के विकास की राह खुलेगी, जो कृषि उत्पाद के मूल्य संवर्धन को प्रेरित करेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
इस परियोजना के निर्माण और संचालन से लाखों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों से लेकर लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट और सेवा क्षेत्र तक, हर स्तर पर रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। इसके साथ ही, एक्सप्रेसवे के आसपास नए शहरों और टाउनशिप का विकास भी संभव है, जिससे शहरीकरण को गति मिलेगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सामाजिक सेवाओं का विस्तार होगा, जो समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
इसके अलावा, मार्ग में आने वाले अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों तक भी पर्यटकों की पहुंच आसान होगी। पर्यटन के बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन और हस्तशिल्प उद्योग को गति मिलने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। विकास और आर्थिकी का द्वार खोलने के साथ ही यह पर्यावरण संतुलन स्थापित करने एवं प्रदूषण को नियंत्रित करने, हरित पट्टियों के विकास और जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसका लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचेगा। ( यह लेखक के निजी विचार हैं)
