अंतरराष्ट्रीय हिमालयन बौद्ध सम्मेलन में जुटे विद्वान : लेह में गूंजा बुद्ध का शांति संदेश, 2569वीं वैशाख पूर्णिमा पर वैश्विक संगम

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Published By Anjali Singh
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- 1 से 14 मई तक पवित्र अवशेषों के दर्शन, यूपी से ‘बोधि यात्रा’ की अपील

लखनऊ, अमृत विचार : केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेह में 2569वीं वैशाख पूर्णिमा के पावन अवसर पर आस्था, अध्यात्म और वैश्विक संवाद का संगम देखने को मिला। महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय हिमालयन बौद्ध सम्मेलन’ में देश-विदेश से आए विद्वानों, बौद्ध भिक्षुओं और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य विषय ‘भारत और उससे परे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत में हिमालयी बौद्ध धर्म का योगदान’ रहा।

कार्यक्रम में उप्र. के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सहभागिता करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध की ‘बोधि यात्रा’ उत्तर प्रदेश की पावन भूमि से प्रारंभ होकर आज पूरी दुनिया में शांति और सह-अस्तित्व का संदेश दे रही है। उन्होंने कहा कि लेह में सांस्कृतिक पर्यटन के नए युग की शुरुआत का संकेत है । इस अवसर पर मंत्री जयवीर सिंह का सम्मान विनय कुमार सक्सेना ने किया।

पवित्र अवशेषों के दुर्लभ दर्शन

सम्मेलन के दौरान 1 से 14 मई तक भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। ये अवशेष उप्र. के सिद्धार्थनगर स्थित पिपरहवा से वर्ष 1898 में प्राप्त हुए थे, जिन्हें छठी शताब्दी ईसा पूर्व का माना जाता है। इनके साथ प्रदर्शित मूर्तियां और पांडुलिपियां बौद्ध विरासत की ऐतिहासिकता और वैश्विक महत्व को रेखांकित करती हैं।

बौद्ध सर्किट बना वैश्विक आकर्षण

पर्यटन मंत्री ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उप्र. में ‘बौद्ध सर्किट’ का तेजी से विकास हो रहा है। पर्यटन को बढ़ावा मिला है। वर्ष 2025 में 156 करोड़ से अधिक पर्यटक आए थे, पर्यटन विकास के साथ 2022 में 22.40 लाख, 2023 में 47 लाख, 2024 में 61.47 लाख और 2025 में लगभग 82 लाख पर्यटक पहुंचे।
वैश्विक शांति के लिए बुद्ध का संदेश प्रासंगिक

जयवीर सिंह ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, जब कई देश संघर्ष और तनाव से जूझ रहे हैं, तब भगवान बुद्ध का शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में व्याप्त अशांति, निराशा और तनाव से मुक्ति का मार्ग बुद्ध के उपदेशों में निहित है।

अंत में उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित सभी प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए देश-विदेश के श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अपनी ‘बोधि यात्रा’ की शुरुआत उत्तर प्रदेश के पवित्र बौद्ध स्थलों से करें, जहां समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत विद्यमान है।

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