पश्चिम बंगाल के बाद अब यूपी में ‘अश्वमेध’ का शंखनाद, भाजपा की ‘सनातनी’ राजनीति को नई ऊर्जा

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

-बंगाल में प्रदर्शन से बढ़ा आत्मविश्वास, विपक्ष पर बढ़ा दबाव

धीरेंद्र सिंह/ लखनऊ, अमृत विचार: पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर नई राजनीतिक ऊर्जा दी है। पार्टी के भीतर इन नतीजों को महज जीत नहीं, बल्कि ‘अश्वमेध की शुरुआत’ के रूप में देखा जा रहा है। यह एक ऐसा अभियान है, जिसमें विस्तार की रणनीति लगातार आगे बढ़ती है। इस ‘सनातनी’ राजनीतिक के आत्मविश्वास का असर अब उत्तर प्रदेश की 2027 की सियासत में भी दिखने लगा है। प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सामने नई चुनौती खड़ी होती नजर आ रही है।

प्राचीन भारतीय परंपरा में अश्वमेध यज्ञ सत्ता विस्तार और प्रभुत्व का प्रतीक माना जाता था- घोड़ा जहां-जहां जाता, वहां अधीनता या मुकाबला तय होता था। राजनीतिक विश्लेषक भाजपा की मौजूदा रणनीति को इसी रूपक से जोड़कर देखते हैं, जहां पार्टी एक राज्य से दूसरे राज्य तक अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पश्चिम बंगाल में अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन ने इस रणनीति को मनोवैज्ञानिक बढ़त दी है, जिसे 2027 के यूपी चुनाव की तैयारी की पृष्ठभूमि के रूप में देखा जा रहा है। 

विपक्ष के लिए राह आसान नहीं दिख रही। सपा को अपने पारंपरिक वोट बैंक से बाहर विस्तार की चुनौती है, बसपा को अपने घटे जनाधार को फिर से मजबूत करना होगा, जबकि कांग्रेस को अपनी संगठनात्मक उपस्थिति बढ़ानी होगी। पश्चिम बंगाल के नतीजों ने भाजपा को रणनीतिक बढ़त दी है। पार्टी इसे उत्तर प्रदेश 2027 की तैयारी का शुरुआती संकेत मान रही है, जबकि विपक्ष के सामने अपनी राजनीतिक जमीन को पुनर्गठित करने की चुनौती और कठिन होती नजर आ रही है।

विपक्ष पर बढ़ा दबाव, रणनीति पर सवाल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति का असर पिछले चुनावों में भी दिखता रहा है। वर्ष 2014 में केंद्र में सत्ता परिवर्तन से लेकर 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक राजनीतिक विमर्श में बड़े बदलाव देखने को मिले। 2017 में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला और इसके बाद योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी से पार्टी ने अपने राजनीतिक एजेंडे को और स्पष्टता के साथ आगे बढ़ाया। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने सत्ता बरकरार रखी, जबकि विपक्ष अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सका। हालांकि 2024 में लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस ने मिलकर यूपी में भाजपा को झटका दिया, लेकिन अब पश्चिम बंगाल के नतीजों के बाद एक बार फिर भाजपा खेमे में उत्साह है, जबकि विपक्षी दलों की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।

मोदी-शाह के साथ ‘योगी फैक्टर’ की गूंज

भाजपा रणनीतिकारों के अनुसार, नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की तिकड़ी पार्टी की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनी हुई है। केंद्र की योजनाएं, संगठन की मजबूती और राज्य नेतृत्व का प्रभाव, इनका संयुक्त असर भाजपा को चुनावी बढ़त दिलाने वाला कारक माना जा रहा है। यूपी में आंकड़ों पर नजर डालें तो 2022 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को करीब 32% वोट शेयर के साथ 111 सीटें मिलीं, जबकि बहुजन समाज पार्टी का वोट शेयर घटकर लगभग 12-13% और सीट सिर्फ एक रह गई। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को दो सीटें और करीब 2-3% वोट शेयर ही मिला। इन आंकड़ों के आधार पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के सामने 2027 में मजबूत मुकाबले के लिए संगठन, नेतृत्व और जनाधार, तीनों स्तरों पर काम करना होगा।

ये भी पढ़ें : 
यूपी में Winds योजना में देरी पर भड़के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, 30 मई तक काम पूरा करने के निर्देश

संबंधित समाचार

टॉप न्यूज

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का बड़ा निर्देश, मैटरनल हेल्थकेयर सर्विस को करना होगा मजबूत, मोबाइल ऐप से होगी गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग
CEOs की सैलरी 20 गुना ज्यादा तेजी से बढ़ी! एक आम कर्मचारी को इतना कमाने में लगेंगे 5 जन्म, देखें चौकाने वाली रिपोर्ट
योगी ने जहां किया प्रचार, स्ट्राइक रेट धुआंधार ... पश्चिम बंगाल में रोड शो-जनसभाओं से बदला चुनावी माहौल, TMC को जोरों का झटका
UAE पर ईरान के ड्रोन अटैक में 3 भारतीय नागरिक घायल: भारत ने जताया कड़ा विरोध, हमले को बताया अस्वीकार्य
यूपी में कुदरत का कहर: आंधी-बारिश और बिजली गिरने से 18 लोगों की मौत, 42 जिलों में अलर्ट!