Pilibhit : दुकान के भीतर घुस गई उग्र महिलाएं, निकाल फेंकी शराब और बीयर की बोतलें
पीलीभीत/माधोटांडा, अमृत विचार। बूंदीभूड़ गांव में शराब की दुकान खुलने का विरोध किस कदर महिलाओं में पनप रहा है, इसका आकलन कई दिनों से चली आ रही शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार नहीं लगा सके। ग्रामीण विरोध तो करेंगे लेकिन इस तरह से महिलाएं हमलावर हो जाएंगी। इसका आभास नहीं था। शायद यही वजह रही कि दो थानों से अधिक पुलिस बल के साथ अफसरों की मौजूदगी में दुकान खुलवाने के लिए पहुंची आबकारी टीम को भागकर खुद को बचाना पड़ा। दुकान के भीतर रखी शराब और बीयर की पेटियों को निकालकर महिलाएं सड़क पर फेंककर तोड़ती रही। पुलिसकर्मी मोबाइल से वीडियो बनाते दिखाई दिए। हालांकि बाद में सख्ती की गई तो और हालात बिगड़ गए।
माधोटांडा थाना क्षेत्र के बूंदीभूड़ गांव में पहली बार कंपोजिट शराब की दुकान खुलने का विरोध कई दिनों से चल रहा था। जिसकी वजह से दुकान खुलवाने के लिए सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त करके अधिकारी खुद साथ गए थे। वैसे तो टीम के पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए थे। मगर, विरोध की कमान हाथों में लाठी डंडे लेकर पहुंची महलिाएं, युवतियां संभाल रही थी। उनका सिर्फ एक ही कहना था कि गांव में किसी भी कीमत पर शराब की दुकान नहीं खुलने दी जाएगी। एसडीएम, तहसीलदार, सीओ, इंस्पेक्टर, आबकारी टीम हर कोई महिलाओं को समझाने का प्रयास कर रहा था लेकिन व मानने को तैयार नहीं थी। जब दुकान खुली और उसके भीतर शराब, बीयर की बोलतें रखी हुई थी। महिलाओं की भीड़ दुकान के भीतर घुस गई। पुलिस ने रोकने का प्रयास भी किया लेकिन असफल रही। फिर तो उग्र महिलाओं का गुस्सा पहले शराब पर फूटा। लाठी डंडे लिए महिलाएं दुकान में घुसी और शराब-बीयर की पेटियां उठाकर बाहर लगाकर जमीन पर फेंकना शुरू कर दिया। बोतलें फूटती गई और फिर उस पर भी लाठी मारी जाती रही। पुलिसकर्मी वीडियो बनाते रहे। इसके बाद सख्ती की गई तो लाठियां टीम पर भी बरसा दी गई। पथराव भी कर दिया गया। फिलहाल मामले में अब सख्त कार्रवाई की तैयारी है।

24 अप्रैल को डीएम से की थी शिकायत, आबकारी टीम से हुई थी बहस
कलीनगर तहसील क्षेत्र के ग्राम बूंदीभूड़ की महिलाएं शराब की दुकान खोले जाने का विरोध पिछले करीब दो माह से कर रही है। इसे लेकर पहले तहसील जाकर एसडीएम स्तर पर शिकायत की गई थी। अभी कुछ दिन पूर्व 24 अप्रैल को महिलाएं एकत्र होकर कलेक्ट्रेट पहुंची और डीएम कार्यालय के बाहर भी प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा था। उनका कहना था कि ग्राम पंचायत सीमा के भीतर शराब की दुकान नहीं खुलनी चाहिए। ग्राम प्रधान शीला सिंह की अगुवाई में पहुंची महिलाओं ने डीएम को ज्ञापन देकर बताया था कि ग्राम पंचायत में अंग्रेजी और देशी शराब की दुकान प्रस्तावित है , जिसका पहले भी विरोध किया था। उनका कहना है कि शराब की दुकान खुलने से माहौल खराब होगा। डीएम कार्यालय के बाहर भी आबकारी विभाग के अधिकारियों से महिलाओं की बहस हुई थी।

दो माह का उठ चुका था स्टॉक, दुकान एक दिन नहीं खुली
बताते हैं कि बूंदीभूड़ गांव में आंवटित की गई अंग्रेजी शराब की दुकान बनारस के एक ठेकेदार के नाम पर आवंटित हुई जबकि देसी शराब की दुकान एक भाजपा नेता को हुई थी। इन दुकानों को अप्रैल माह से शुरू होना था, लेकिन विरोध के चलते दुकानें संचालित नहीं कराई जा सकी। अप्रैल और मई माह का स्टॉक भी दे दिया गया था। हालांकि दुकान एक दिन भी खुल नहीं सकी थी। जिसके चलते ठेकेदारों का भी नुकसान हो रहा था। बताते हैं कि करीब दस दिन पहले ठेकेदारों ने दुकान खुलवाने या फिर संबंधित प्वाइंट कैंसिल करने की मांग प्रशासनिक अधिकारियों के सामने रखी थी। जिस पर वार्ता कर सब ठीक कराने के आश्वासन दिए गए थे। मगर अब हुए बवाल के बाद खलबली मच गई है।

पहली बार बूंदीभूड़ में आवंटित हुई हैं दुकानें
बता दें कि कलीनगर तहसील क्षेत्र के ग्राम बूंदीभूड़ में शराब की दुकानों का आवंटन पहली बार हुआ है। इससे पहले यहां पर कोई शराब की दुकान नहीं थी। बताते हैं कि यहां के लोग शराब पीने के लिए नेपाल सीमा क्षेत्र की दुकानों पर जाया करते थे। अब गांव में ही शराब की दुकान खुलने का पता चला तो महिलाओं का आक्रोश बढ़ गया था। उनका मानना था कि गांव में शराब की दुकान खुलेगी तो इसका असर सभी परिवारों पर पड़ेगा। उनका ये भी कहना था कि नजदीक में मंदिर भी है। इससे सामाजिक वातावरण खराब होगा और कानून व्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।

बूंदीभूड़ गांव में आबकारी विभाग की दुकान स्वीकृत हुई थी। इसका विरोध कर रही महिलाओं को कई बार समझाने का प्रयास किया गया था। पुलिस बल के साथ पहुंची टीम ने समझाने का प्रयास किया तो भीड़ उग्र हो गई। दुकान में घुसकर शराब की बोतलें फेंकनी शुरू कर दी। तब भी शांत कराने का प्रयास किया गया, तो हल्का बल प्रयोग कर खदेड़ा। आबकारी निरीक्षक की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई कराई जा रही है। - डॉ.प्रतीक दहिया, सीओ पूरनपुर।
