Bareilly: गंगा एक्सप्रेस वे पर जाना मगर बदायूं रोड पर चलना संभलकर, बिनावर तक कई जगह खतरा 

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। गंगा एक्सप्रेस वे शुरू होने के बाद भी मथुरा रोड की अड़चनें प्रयागराज और मेरठ को बरेली के करीब नही आने दे रहीं। बरेली-बदायूं मार्ग के चौड़ीकरण में देरी, जगह-जगह खतरनाक डाइवर्जन और रास्ते पर धूल के गुबार सुबह से रात तक जाम का कारण बन रहे हैं। हालात इतने बुरे कि जितना समय एक्सप्रेस वे के जरिए दिल्ली-लखनऊ का सफर करने में लग रहे हैं, उससे ज्यादा टाइम बिनावर तक पहुंचने में खर्च हो रहा है। एनएचएआई यात्रियों की सुविधा के लिए खेद तो जता रहा है मगर निर्माण एजेंसी की ढिलाई पर ब्रेक नहीं लगा पा रहा।

प्रयागराज-और मेरठ को जोड़ने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे ने बरेली-पीलीभीत को सुपर स्पीड सफर के हसीन सपने तो दिखाए हैं मगर बदायूं रोड चौड़ीकरण योजना की दुश्वारियों ने उम्मीदों पर ग्रहण लगाने का काम किया है। बेतरतीब डायवर्जन से लगने वाले जाम और धूल में दबी सड़क सबको संकट में डाल रही है। बरेली से दिल्ली या लखनऊ जाने के लिए वाहन सवार एक्सप्रेस-वे का रुख तो कर रहे हैं, पर बिनावर कट तक पहुंचने में ही सबका पसीना छूट रहा है। अमृत विचार की टीम ने शुक्रवार को बरेली से बिनावर तक पड़ताल की तो जगह-जगह खतरनाक स्थिति कैमरे में कैद हुई। हकीकत ये है कि रास्ते भर जगह-जगह डाइवर्जन के चलते वाहन जितने कम समय एक्सप्रेस-वे पर फर्राटा भरकर बिनावर से मेरठ पहुंच रहे हैं, कई बार उतना समय तो जाम में फंसकर बिनावर से बरेली तक पहुंचने में ही लग जा रहा है।

मथुरा रोड चौड़ीकरण चल रहा कछुआ चाल
जमीन सच्चाई ये है कि बरेली-मथुरा राजमार्ग के चौड़ीकरण का काम काफी स्लो है। एनएचएआई ने इसे फोरलेन बनाने की मंजूरी तो तीन साल पहले दे दी थी, लेकिन धरातल पर पैकेज-4 यानी बरेली-बदायूं के बीच हिस्से में काम समय के हिसाब से पूरा नहीं होता दिख रहा। बिनावर तक दस से अधिक जगहों पर बेतरतीब डाइवर्जन किए गए हैं, जो बहुत खतरनाक नजर आते हैं। अधूरे पड़े पांच पुल और निर्माणाधीन अंडरपास राहगीरों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा रहे हैं। चौड़ीकरण में मानकों की अनदेखी भी होती दिख रही है। खोदी गई मिट्टी पर पानी का छिड़काव नहीं कराने से धूल के गुबार आफत बन रहे हैं और गाड़ी चलाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में बरेलियंस के लिए एक्सप्रेस-वे पकड़कर समय की बचत करना सपना ही बनकर रह गया है। हालात देखते हुए नहीं लगता कि बरेली-मथुरा रोड के चौड़ीकरण का काम तय समय में 2027 तक पूरा हो सकेगा !

दर्द अपने-अपने
भमोरा के आदेश ने बताया कि प्रयागराज-मेरठ एक्सप्रेस-वे की रफ्तार का क्या फायदा, जब बरेली से बिनावर तक का रास्ता जगह-जगह डायवर्जन और जाम की वजह से नरक बन चुका है। बरेली-मथुरा हाईवे के चौथे चरण में काम की गति इतनी सुस्त है कि लगता नहीं काम निर्धारित समय में पूरा होगा।-

बिनावर के रंजीत सिंह के मुताबिक जितना वक्त एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने के बाद दिल्ली पहुंचने में लगता है, उतना समय तो हमें बरेली से बिनावर तक जाने में लग रहा। प्रशासन को चाहिए बदायूं हाईवे के चौड़ीकरण के काम में तेजी लाए ताकि बरेली वालों को भी एक्सप्रेस-वे का असली लाभ मिल सके।

बदायूं के अमरदीप ने बताया कि बदायूं रोड की समस्या बर्दाश्त से बाहर है। जगह-जगह डायवर्जन की वजह से दिन भर जाम लगा रहता है। न तो ग्राहकों के आने का रास्ता बचा है और न ही हम चैन से सांस ले पा रहे हैं। रफ्तार के चक्कर में बदायूं रोड का पूरा कारोबार और यातायात चौपट हो गया है।

वहीं मकरंदपुर के लोगों का कहना है कि गंगा एक्सप्रेस-वे हमारे शहर के लिए गेम-चेंजर है, लेकिन इसमें बदायूं रोड फिलहाल सबसे बड़ी बाधा है। डायवर्जन और सुस्त निर्माण प्रक्रिया की वजह से बरेली के लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। एक्सप्रेस-वे रफ्तार का सपना अभी अधूरा है।

 परियोजना निदेशक एनएचएआई उत्कर्ष शुक्ल के मुताबिक बरेली-मथुरा हाईवे के चौड़ीकरण के पैकेज-4 की प्रगति पर नियमित नजर रखी जा रही है। निर्माण के दौरान यात्रियों को हो रही असुविधा के लिए संबंधित ठेकेदार को डाइवर्जन पॉइंट्स पर सुरक्षा मानकों का ख्याल रखते हुए इंतजाम बढ़ाने और धूल से राहत के लिए नियमित पानी के छिड़काव के सख्त निर्देश भी दिए गए हैं। हमारा प्रयास है कि पुलों और अंडरपास का काम तेजी से पूरा हो सके। 

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