इटावा : कभी राजतिलक में प्रयुक्त यमुना जल अब प्रदूषण की चपेट में, छूने से भी कतराते हैं लोग

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Published By Deepak Mishra
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इटावा। एक समय यमुना नदी का जल इतना पवित्र माना जाता था कि राजतिलक जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में इसका उपयोग किया जाता था। लेकिन आज वही यमुना गंभीर प्रदूषण की चपेट में है। नदी का पानी इतना दूषित हो चुका है कि स्थानीय लोग अब इसे छूने से भी बच रहे हैं। कई जगहों पर यमुना अब कचरे के नाले जैसी दिखाई दे रही है।जिले में यमुना की जलधारा पर प्रदूषण का गंभीर असर दिख रहा है। शहर समेत करीब 25 गांवों का गंदा पानी बिना किसी शोधन के सीधे नदी में गिर रहा है, जिससे यमुना की जल गुणवत्ता तेजी से बिगड़ रही है।

यमुना सफाई योजना की समीक्षा बैठक में डीएफओ विकास नायक ने एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की प्रगति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले 8-9 महीनों से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन एसटीपी अभी तक पूरी तरह से चालू नहीं हो सका है। बिना शोधन के अपशिष्ट पानी सीधे नदी में बह रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।

डीएफओ ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि आउटलेट के सैंपल की तुरंत जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही नदी में ठोस कचरे के प्रवाह को रोकने और यमुना किनारे फैले कूड़े-कचरे की सफाई के लिए नगर निगम को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों के अनुसार आगरा से इटावा की ओर आते-आते यमुना का पानी अत्यधिक प्रदूषित हो जाता है।

शहर के घाटों पर नियमित सफाई न होने से समस्या और बढ़ गई है।बढ़पुरा और चकरनगर क्षेत्र के लगभग 25 गांवों-सुनबारा, भटपुरा, रम्पुरा, जरहोली, गढ़िया गुलाब सिंह, नौगवां, डिभौली, निवी, चकरपुरा, नीमाडाढ़ा, अमदापुर आदि-का गंदा पानी सीधे यमुना में जा रहा है। स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत की, लेकिन नालों को बंद करने या रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

स्वास्थ्य पर खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण का असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। खाद्य सुरक्षा मानकों से अधिक लेड (सीसा) पाए जाने के कारण यमुना किनारे उगाई जाने वाली सब्जियों के सेवन से न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, याददाश्त कमजोर होना, फेफड़ों और पेट की बीमारियां बढ़ रही हैं।

समाधान के सुझाव  
  1. पुराने घाटों की सफाई और पुनर्स्थापना  
  2. ठोस अपशिष्ट रोकने के लिए संरचनात्मक उपाय  
  3. सभी नालों का पानी पूर्ण शोधन के बाद ही नदी में छोड़ना  
  4. धार्मिक सामग्री और मूर्तियों के विसर्जन के लिए अलग व्यवस्था

समाजसेवी और यमुना प्रहरी संगठनों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले प्रदूषित जल को अगर रोका नहीं गया तो नदी की स्थिति और बिगड़ जाएगी। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि उचित प्रबंधन से यमुना घाटों को फिर से पर्यटन और तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

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