नोएडा मजदूर आंदोलन मामले में गिरफ्तार सत्यम वर्मा के खिलाफ एनएसए हटाने की मांग

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Edited By Amrit Vichar
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नई दिल्ली। नागरिक अधिकार संगठन 'जनहस्तक्षेप' ने नोएडा में मजदूर आंदोलन से जुड़ी हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार पत्रकार व लेखक सत्यम वर्मा और आंदोलनकारी आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) लगाए जाने को निराधार व गैरकानूनी बताते हुए उनपर लगाये गये आरोपों को वापस लिए जाने की मांग की है। 

जनहस्तक्षेप के संयोजक विकास वाजपेयी और सहसंयोजक अनिल दुबे ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि वर्मा और उनके सहयोगी राष्ट्रीय राजधानी के नोएडा और मानेसर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी लागू करने , काम की निर्धारित अवधि तय किये जाने और उनके अन्य बुनियादी अधिकारों के लिए पिछले कुछ महीनों से आंदोलन चला रहे थे। 

बयान में आरोप लगाया गया है कि नोएडा में उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस आंदोलन को विफल करने के लिए बर्बर कार्रवाई की और एक हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था। उनका कहना है कि पुलिस कार्रवाई में करीब एक हजार लोग पकड़े गये थे। उनमें से अब भी करीब एक सौ लोग जेल में हैं। 'जनहस्तक्षेप' का कहना है कि पुलिस ने सत्यम वर्मा और आकृति चौधरी के खिलाफ एनएसए लगाए जाने के आधार की जानकारी न तो उन्हें और न ही उनके वकीलों को दी है। 

जनहस्तक्षेप का आरोप है कि नोएडा में श्रमिकों के अधिकार के लिए पत्रकारों और बुद्धिजीवियों के आंदोलन को फैक्टरी मालिकों व पुलिस प्रशासन के नापाक गठजोड़ के तहत कुचला गया है और इससे जुड़े लोगों पर निराधार कार्रवाई की जा रही है। संगठन ने श्री वर्मा और आकृति चौधरी के खिलाफ एनएसए के प्रावधान हटाए जाने की मांग की है आंदोलन से जुड़े अन्य मजदूरों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी सभी मामले वापस लेने की अपील की है। 

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