वाराणसी में हीट वेव अलर्ट : प्रशासन ने बचाव के लिये जारी किये दिशा निर्देश, इन बातों का रखें खास ख्याल
वाराणसी। उत्तर प्रदेश में वाराणसी जिला प्रशासन ने भीषण गर्मी, गर्म हवाओं और लू के प्रकोप से बचाव के लिये संबंधित विभागों को शनिवार को निर्देश जारी किए। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि इस भीषण गर्मी, गर्म हवाओं और लू से बचाव कैसे करें तथा सुरक्षित कैसे रहें, इस पर सभी सतर्क रहें। गर्म हवाओं से बचने के लिए खिड़कियों को रिफ्लेक्टर जैसी एल्युमीनियम पन्नी, गत्ते आदि से ढककर रखें, ताकि बाहर की गर्मी अंदर न आए।
स्थानीय मौसम पूर्वानुमान नियमित रूप से सुनें और आगामी तापमान में होने वाले परिवर्तनों के प्रति सजग रहें। आपात स्थिति से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण लें। बच्चों तथा पालतू जानवरों को कभी भी बंद वाहन में अकेला न छोड़ें। जहां तक संभव हो, घर में ही रहें और सीधे सूर्य के ताप से बचें। संभव हो तो घर की निचली मंजिल पर रहें। संतुलित, हल्का और नियमित भोजन करें। बासी खाना कदापि न खाएं तथा मादक पेय पदार्थों का सेवन न करें।
घर से बाहर निकलते समय शरीर व सिर को कपड़े या टोपी से ढककर रखें। घर में पेय पदार्थ जैसे लस्सी, छांछ, मट्ठा, बेल का शर्बत, नमक-चीनी का घोल, नींबू पानी या आम का पना आदि का अधिक प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि विशेष सावधानी रखने की आवश्यकता है। गर्मी में शरीर के द्रव्य (बॉडी फ्लूइड) तेजी से सूखने लगते हैं। शरीर में पानी और नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा बढ़ जाता है।
शराब की लत, हृदय रोग, पुरानी बीमारियां, मोटापा, पार्किंसन रोग, अधिक उम्र और अनियंत्रित मधुमेह वाले व्यक्तियों को लू से विशेष बचाव की जरूरत है। साथ ही डाइयूरेटिक, एंटीहिस्टामिनिक और मानसिक रोग की दवाइयां लेने वाले व्यक्ति भी सतर्क रहें। लू लगने के मुख्य कुछ लक्षण है, जिसपर ध्यान देना आवश्यक है।
गर्म, लाल और शुष्क त्वचा, पसीना न आना, तेज नब्ज तेज सांस, व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति सिरदर्द, मिचली, थकान, कमजोरी या चक्कर आना, मूत्र न होना या कम होना। इन लक्षणों के दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें, क्योंकि इससे शरीर का तापमान बढ़ने के कारण आंतरिक अंगों, खासकर मस्तिष्क को नुकसान पहुंच सकता है।
उन्होंने श्रमिकों के लिए विशेष निर्देश दिया कि श्रमिकों के कार्यस्थल पर ठंडा पेयजल उपलब्ध कराएं। अति श्रम वाले कार्यों को दिन के ठंडे समय में निर्धारित करें। गर्भवती श्रमिकों और जिन श्रमिकों को अचानक चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत पड़ सकती है, उनका अतिरिक्त ध्यान रखा जाए।
