बिजली संकट: हंगामे के बाद दौड़ी बिजली अफसरों की तबादला एक्सप्रेस, मंत्री और विधायक की नाराजगी पर नपे 

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। महानगर से देहात तक जारी बिजली संकट पर फजीहत के बाद पावर कारपोरेशन सिस्टम की नींद टूटती दिखाई दे रही है। लखनऊ से बरेली भेजे गए चीफ इंजीनियर (तकनीकी) मनीष गुप्ता की मौजूदगी में वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार और डीएम अविनाश सिंह बिजली अफसरों की क्लास ली तो उसका असर रविवार को देखने को भी मिला। चीफ इंजीनियर ने दोपहर होते-होते कई अवर अभियंता और तकनीकी कर्मचारियों के तबादला सूची जारी कर दी। बदलाव के बाद उम्मीद की जा रही है कि हर तरफ सुना दे रहा बिजली समस्या का शोर अब शायद कुछ कम होगा।

मंत्री ने लगाई थी क्लास
बरेली में लगातार बिगड़ रही बिजली व्यवस्था प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर मुद्दा बन चुकी है। शहर से देहात तक अघोषित कटौती, ट्रांसफार्मर फुंकने और बंच केबल जलने की घटनाओं से जनता में भारी नाराजगी है। जनाक्रोश और विरोध प्रदर्शनों से सत्तारूढ़ दल के नेता भी बेचैन दिखाई दे रहे हैं और जनप्रतिनिधियों से अपनी पीड़ा बयां कर रहे हैं। वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार बिजली संकट पर बेहद सख्त हैं। ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखने के बाद उन्होंने सर्किट हाउस में कल बिजली इंजीनियर्स की बैठक बुलाकर क्लास ली थी। 

मनमाने ढंग से हो रहा था काम
डीएम ने भी बैठक में बिजली अधिकारियों से नाराजगी व्यक्त करते हुए चेतावनी दी थी। माना जा रहा है कि मंत्री और डीएम की सख्ती के चलते ही अवर अभियंताओं व तकनीकी कर्मचारियों को इधर से उधर किया गया। गया है। बिजली अफसरों पर जनता के फोन न उठाने, मनमाने तरीके से काम करने और बिजली फॉल्ट तुरंत सही कराने के लिए कदम न उठाने जैसे आरोप लग रहे थे। हर तरफ किरकिरी होती देख न सिर्फ पावर अफसरों के ट्रांसफर होते नजर आ रहे हैं, बल्कि निगम के दल रात में दौड़ लगाकर सब स्टेशनों का जायजा लेकर उसकी रिपोर्टिंग भी करते दिखाई दे रहे हैं।

एसडीओ, जेई, के साथ टीजी टू के हुए किए गए तबादले
बिजली निगम के मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने रविवार को शहरी क्षेत्र में आपूर्ति देख रहे एसडीओ और जेई की अचानक तबादला सूची जारी की। इसमें 11 केवी एवं एलटी वार्टिकल से अवर अभियंता चंद्रमा प्रसाद को आंवला के पुन्नापुर सबस्टेशन भेजा गया है। इसके अलावा पुन्नापुर सबस्टेशन पर तैनात अवर अभियंता राहुल रावत को 11 केवी शहरी क्षेत्र में भेजा गया है। इसके अलावा 11 केवी वार्टिकल में तैनात अवर अभियंता कृष्णकांत को रिछा सबस्टेशन भेजा गया है। वही रिछा सबस्टेशन से अवर अभियंता अरविंद कुमार को 11 केवी वार्टिकल भेजा गया है। वही 11 केवी वार्टिकल में तैनात अवर अभियंता साबिर खां को शाही सबस्टेशन भेजागया है। शाही सबस्टेशन पर तैनात अवर अभियंता रामदेव को 11 केवी वार्टिकल शहर में भेजा गया है। वही 11 केवी वार्टिकल में तैनात एसडीओ अभिषेक कपासिया को आंवला के बरसेर का एसडीओ बनाया गया है। इसके अलावा बरसेर के एसडीओ विशाल वर्मा को 11 केवी वार्टिकल का एसडीओ बनाया गया है। वही11 केवी में तैनात अवर अभियंता मनजीत सिंह को बहेड़ी के पचपेड़ा का अवर अभियंता बनाया गया है। पचपेड़ा में तैनात जेई शेरवली को 11 केवी वार्टिकल भेजा गया है। वही चार टीजी टू के भी देहात से शहर में तबादले किए गए है।

पावर कारपोरेशन ने 31 जुलाई तक सबकी छुट्टियां रोकीं
बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड सख्त कदम उठाने में लगा है। प्रबंध निदेशक के निर्देश पर बरेली क्षेत्र-प्रथम में कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां 31 जुलाई 2026 तक निरस्त कर दी गई हैं। इस संबंध में मुख्य अभियंता (वितरण) कार्यालय की ओर से आदेश जारी कर तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। मुख्य अभियंता वितरण ज्ञान प्रकाश ने बताया कि 31 जुलाई तक किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बिना पूर्व अनुमति अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। आकस्मिक अवकाश भी सक्षम अधिकारी की मंजूरी के बाद ही मान्य होगा। साथ ही बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर भी रोक लगा दी गई है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी ने आदेशों की अवहेलना कर अवकाश लिया या स्वीकृत किया, तो इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल विभागीय कार्रवाई की जाएगी। निगम ने सभी इकाइयों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। शासन की सख्ती के बाद बिजली निगम के अधिकारी हरकत में हैं। मंत्री की अध्यक्षता में कल की बैठक के बाद मुख्य अभियंता सहित निगम के दूसरे कई अधिकारी देर रात शहर के विभिन्न इलाकों में पहुंचे और बिजली व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उपकेंद्रों, फाल्ट प्रभावित क्षेत्रों और ट्रांसफार्मरों की स्थिति की समीक्षा की गई। कई स्थानों पर तकनीकी टीमों को तत्काल मरम्मत कार्य तेज करने के निर्देश दिए गए।

बिजली संकट पर गरमा रही राजनीति, टेंशन में भाजपाई
बरेली, अमृत विचार: बिजली संकट को लेकर जिले में हर तरफ उठ रहीं विरोध की आवाजों ने सत्तारूढ़ भाजपा के नेता और जनप्रतिनिधियों को खास टेंशन में डाल दिया है। कैंट विधायक खुली बैठक में कह चुके हैं कि कुछ बिजली अधिकारी विपक्ष के नेताओं की तरह काम कर रहे हैं। जनता में आक्रोश पनप रहा है। सरकार 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए लगातार काम कर रही है लेकिन कुछ अफसरों की लापरवाही से समस्या पैदा हो रही है। उन्होंने ये तक कहा कि अगर बरेली में जनाक्रोश फूटता है तो उसके लिए बिजली अधिकारी ही जिम्मेदार होंगे। कई भाजपा नेताओं ने नाम न छापे जाने की शर्त पर कहा कि बिजली संकट से जनता में भारी नाराजगी देखी जा रही है। इसमें तुरंत सुधार की जरूरत है। विपक्षी दल बिजली समस्या को मुद्दा बनाकर जनता के बीच सरकार विरोधी आवाज उठा रहे हैं, जिसके भाजपा बिग्रेड का तनाव और ज्यादा बढ़ रहा है। बरेली ही नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर भी सपा-कांग्रेस बिजली संकट को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेवर बिजली समस्या को लेकर बेहत सख्त हैं और सुचारू आपूर्ति को लेकर लगातार कड़े दिशा निर्देश जारी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद जिले में बिजली अफसर भी घर-दफ्तर छोड़ मैदान में दौड़ लगा रहे हैं।

दो सप्ताह बाद फिर समीक्षा करेंगे वन एवं पर्यावरण मंत्री
वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने चीफ इंजीनयर बरेली से दो टूक कहा है कि दो सप्ताह में जिले के अंदर बिजली व्यवस्था पूरी तरह दुरूस्त नजर आनी चाहिए। बैठक में कहा गया कि 15 दिन बाद बिजली इंजीनियर्स और जनप्रतिनिधि फिर आमने-सामने बैठेंगे और हालात की समीक्षा करेंगे। उस समय तक सब कुछ ठीक नहीं हुआ तो अफसरों की टेंशन बढ़ सकती है। शासन पहले ही वन मंत्री के तबादले के बाद जिले से कई बिजली अफसरों को हटा चुका है। मंत्री डॉ. अरुण ने चीफ इंजीनियर से ये भी कहा है कि अगर उनको स्टाफ की कमी लग रही है तो लिखकर दें। वह इस बारे में ऊर्जा मंत्री से बात करेंगे मगर बिजली आपूर्ति जल्द सुचारू करनी होगी। दरअसल, लगातार ट्रिपिंग, फाल्ट और अघोषित कटौती से आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। गांवों में किसानों को सिंचाई में दिक्कतें आ रही हैं, जबकि शहरों में व्यापार और घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और शिकायतों का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए। वहीं, विद्युत अफसरों का कहना है कि अत्यधिक लोड और सीमित स्टाफ के कारण दिक्कतें बढ़ रही हैं। दावा है कि कई स्थानों पर मरम्मत और लाइन सुधार कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं। हालांकि जनता जल्द राहत की उम्मीद लगाए है।


बिजली शिकायतों के त्वरित निस्तारण के निर्देश
सर्किट हाउस में बैठक के बाद विद्युत नगरीय वितरण मंडल और विद्युत वितरण मंडल के अधिकारियों को शिकायतों के त्वरित समाधान के आदेश दिए गए हैं। मुख्य अभियंता वितरण ज्ञान प्रकाश ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बैठक में जनप्रतिनिधियों और पार्षदों ने बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं, अघोषित कटौती, ट्रांसफार्मर फुंकने और लो-वोल्टेज की शिकायतें उठाई थी। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि सभी शिकायतों का वार्डवार परीक्षण कर प्राथमिकता के आधार पर एक सप्ताह के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों से 31 मई तक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। रिपोर्ट में प्रत्येक शिकायत पर की गई कार्रवाई का पूरा विवरण देना होगा, ताकि समीक्षा के दौरान बिंदुवार चर्चा की जा सके। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बिजली समस्याओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाएगी।

 

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