प्रधान जी! समझाइए ग्रामीणों को, पहनें हेलमेट मानें यातायात नियम, परिवहन आयुक्त ने भेजा पत्र
सड़क दुर्घटनाओं में कमी के लिए परिवहन आयुक्त ने भेजा ग्राम प्रधानों, अधिवक्ता संघों, विद्यालय प्रबंधकों को पत्र
लखनऊ, अमृत विचार: गांव को विकास की राह पर ले जाने वाले 'प्रधान जी' अब सड़क सुरक्षा नियमों का न केवल ककहरा ग्रामीणों को सिखाएंगे, बल्कि उनका पालन कराने में भी अपना अहम रोल अदा करेंगे। इसके लिए परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने ग्राम प्रधानों, प्रदेश बार एसोसिएशन, अधिवक्ता संघों, विद्यालय प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को पत्र भेज अनुरोध किया है कि उनके प्रयास से सड़क सुरक्षा नियमों के अनुपालन की राह और आसान हो जाएगी।
यही नहीं जिन गांवों में सुरक्षा उपायों से मृत्यु दर कम होगी, उन ग्राम पंचायतों के प्रधानों को जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों में सम्मानित किया जाएगा और उन्हें "सड़क सुरक्षा अग्रदूत" घोषित किया जाएगा। विभाग के मुखिया का मानना है कि ग्राम प्रधान गांव के ऐसे निर्वाचित जन प्रतिनिधि हैं, यदि वे अपने गांव के लोगों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने और नियमों के अनुपालन के लिए समझाने और प्रेरित करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे तो निश्चित रूप से ग्रामीण समुदाय का एक बड़ा हिस्सा सड़क सुरक्षा के प्रति सचेत होगा। सड़क दुर्घटना में मृत्यु का सर्वाधिक प्रतिशत 18 से 25 वर्ष के युवा वर्ग का है।
दोपहिया चालक बिना हेलमेट लगाए न चलाने पाए गाड़ी
यही नहीं परिवहन आयुक्त ने प्रधानों से कहा है कि ग्राम में कोई भी दोपहिया चालक बिना हेलमेट लगाए गाड़ी न चलाने पाए। गांव से बाहर जाते समय या गांव में प्रवेश करते हुए बिना हेलमेट वाले चालकों पर उन्हें टोका जाए। चौपहिया वाहन चालकों को सीट बेल्ट लगाने के लिए प्रेरित करें। ट्रैक्टर-ट्रॉली का प्रयोग कृषि सामग्री, अनाज या खाद के परिवहन के लिए अनुमन्य है।
किसी भी मेले, तीर्थयात्रा या सामूहिक आवागमन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली का प्रयोग किसी भी दशा में यात्रियों के परिवहन में न किया जाए। जनपद में कोई भी अधिवक्ता यदि दोपहिया चालक है तो बिना हेलमेट लगाए गाड़ी न चलाएं। चौपहिया चलाने वाले अधिवक्ता सीट बेल्ट जरूर लगाएं।
