शुद्ध पर्यावरण की जिम्मेदारी निभा रहा अवध विवि का पर्यावरण विभाग
डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय का 1994 में स्थापित पर्यावरण विज्ञान विभाग आधुनिक अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत् विकास के क्षेत्र में निरंतर उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। विभाग में स्थापित अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र, रेडॉन जियो स्टेशन तथा स्वचालित मौसम शोध केंद्र शोधार्थियों एवं वैज्ञानिकों को उच्च स्तरीय अनुसंधान की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। विभाग द्वारा प्राप्त आंकड़े अयोध्या जनपद एवं विश्वविद्यालय परिसर की पर्यावरणीय गुणवत्ता के वैज्ञानिक मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अयोध्या और देवीपाटन मंडल के कार्य क्षेत्र में पर्यावरण शुद्धता के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं।
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विभाग में महत्वपूर्ण शोध परियोजना डॉ. विनोद कुमार चौधरी के नेतृत्व में वायु परिवेशी गुणवत्ता निगरानी की दो परियोजना एक अयोध्या मंडल और दूसरी परियोजना में अयोध्या, श्रावस्ती, गोंडा, बहराइच और अंबेडकर नगर जिले शामिल है। ये शोध परियोजनाएं उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से वार्षिक रूप से पोषित हैं। केंद्र सरकार द्वारा इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंसेज रिसर्च (आईसीएसएसआर) की दो वर्षीय शोध परियोजना अयोध्या में परिवेशी वायु गुणवत्ता का समेकित आंकलन एवं स्वास्थ्य जोखिम विश्लेषण पर 16 लाख की परियोजना जारी है।
वायु गुणवत्ता निगरानी प्रयोगशाला बनी अनुसंधान का प्रमुख केंद्र
विभाग में स्थापित वायु गुणवत्ता अनुश्रवण प्रयोगशाला में सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂), पीएम₁₀ (PM₁₀) सहित विभिन्न वायु प्रदूषकों का नियमित विश्लेषण किया जाता है। कई वर्षों से विश्वविद्यालय परिसर एवं अयोध्या नगर की वायु गुणवत्ता का निरंतर अध्ययन कर रहा है। इन अध्ययनों से प्राप्त आंकड़े पर्यावरणीय शोध, नीति निर्माण तथा जनस्वास्थ्य संबंधी अध्ययनों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। उच्च-स्तरीय एयर सैंपलर्स की सहायता से PM₂.₅, PM₁₀ तथा अन्य वायुमंडलीय प्रदूषकों की सटीक निगरानी एवं विश्लेषण किया जाएगा। ये उपकरण विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं वैज्ञानिकों को गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, पर्यावरणीय मूल्यांकन तथा फील्ड-आधारित अध्ययन के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे।
रेडॉन जियो स्टेशन एवं स्वचालित मौसम केंद्र से सुदृढ़ हुआ वैज्ञानिक अनुसंधान
पर्यावरण विज्ञान विभाग में स्थापित रेडान जियो स्टेशन भूगर्भीय गतिविधियों एवं रेडॉन गैस के स्तर की सतत निगरानी करता है। इसके साथ ही विभाग परिसर में स्थापित आटोमैटिक वेदर स्टेशन तापमान, आर्द्रता, वर्षा, पवन की दिशा एवं गति सहित विभिन्न मौसमीय मानकों का स्वचालित रिकॉर्ड तैयार करता है। इन दोनों आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं तथा पर्यावरणीय परिवर्तनों पर उच्च स्तरीय अनुसंधान को नई दिशा मिल रही है।
आधुनिक प्रयोगशालाओं से शोधार्थियों को मिल रही गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं
विभाग की सरयू प्रयोगशाला एवं अन्य अनुसंधान प्रयोगशालाएं आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों से सुसज्जित हैं। यहां पर्यावरण प्रदूषण, जल गुणवत्ता, मृदा, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन तथा पारिस्थितिकी से संबंधित विषयों पर स्नातकोत्तर एवं शोध स्तर के विद्यार्थी नियमित अनुसंधान कर रहे हैं। विभाग में शोध एवं प्रयोगात्मक शिक्षा को विशेष महत्व दिया जाता है, जिससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो सके।
युवाओं के लिए रोजगार एवं शोध के नए
विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद चौधरी ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण एवं वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभाग द्वारा युवाओं के लिए रोजगार, प्रशिक्षण एवं शोध के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विभाग में वायु गुणवत्ता निगरानी, जल एवं मृदा विश्लेषण, पर्यावरणीय डेटा प्रबंधन, जीआईएस एवं रिमोट सेंसिंग, प्रयोगशाला संचालन तथा पर्यावरणीय परियोजनाओं के क्षेत्र में योग्य अभ्यर्थियों के लिए समय-समय पर विभिन्न पदों पर नियुक्तियां एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विभाग का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ बनाना तथा युवाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं तकनीकी कार्यों में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है। यहां कार्यरत विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षुओं एवं शोधार्थियों को अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में कार्य करने का अवसर मिलता है, जिससे उनकी तकनीकी दक्षता एवं रोजगार क्षमता में वृद्धि होती है।
वायु गुणवत्ता निगरानी प्रयोगशाला के विद्यार्थियों को मिली उत्कृष्ट प्लेसमेंट
पर्यावरण विज्ञान विभाग के अंतर्गत संचालित वायु गुणवत्ता निगरानी प्रयोगशाला के विद्यार्थियों ने इस वर्ष रोजगार एवं प्लेसमेंट के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। विभाग द्वारा विद्यार्थियों को वायु प्रदूषण निगरानी, पर्यावरणीय विश्लेषण, उपकरण संचालन, डेटा विश्लेषण, अनुसंधान तथा फील्ड मॉनिटरिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिससे वे उद्योगों एवं अनुसंधान संस्थानों की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बन रहे हैं। चयनित विद्यार्थियों को फील्ड साइंटिस्ट, एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग एग्जीक्यूटिव, रिसर्च एसोसिएट तथा ईएचएस से संबंधित पदों पर कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ है।
परियोजनाओं से न केवल स्टीक आकलन, बल्कि वैज्ञानिक रणनीति में भी मदद
कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह बताते हैं कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा इंडियन काउंसिल फॉर सोशल साइंस रिसर्च (आईसीएसएसआर) द्वारा वित्तपोषित ये शोध परियोजनाएं न केवल अयोध्या एवं आसपास के जनपदों की पर्यावरणीय स्थिति का सटीक आकलन करेंगी, बल्कि नीति-निर्धारकों को स्वास्थ्य जोखिम कम करने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक रणनीति बनाने में भी मदद करेंगी। विश्वविद्यालय उच्चस्तरीय अनुसंधानों को बढ़ावा देने और समाजोपयोगी वैज्ञानिक पहलों को पूर्ण सहयोग देने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।
- प्रस्तुति - कमर अब्बास
