इतना पुराना है चाय का इतिहास, जानें कब से लोग ले रहे हैं इसकी चुस्कियां
हमारे देश में 80 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनकी सुबह की शुरुआत चाय की चुस्की के साथ होती है। जब भी हमें नींद को भगाना हो, किसी बात का स्ट्रेस हो, सर दर्द, या बॉडी पेन होता है तब हमें सिर्फ चाय की ही याद आती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पहली …
हमारे देश में 80 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनकी सुबह की शुरुआत चाय की चुस्की के साथ होती है। जब भी हमें नींद को भगाना हो, किसी बात का स्ट्रेस हो, सर दर्द, या बॉडी पेन होता है तब हमें सिर्फ चाय की ही याद आती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पहली बार दुनिया में चाय किसने पी होगी, कहां बनी होगी, कैसे पी होगी? आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि चाय का इतिहास क्या है।
चाय पीने का इतिहास काफी पुराना है और 750 ईपू भी इसका जिक्र मिलता है। आज भारत चाय का सबसे बड़ा उत्पादक है और भारत में भी लंबे समय से चाय का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन, ये जानकर आपको हैरानी होगी कि कई साल पहले जिस चाय का इस्तेमाल आप नींद को दूर भगाने के लिए करते हैं, उसके लिए नहीं था, बल्कि ये दवाई के रूप में काम में ली जाती थी। कहा जाता है कि कई सालों पहले बौद्ध भिक्षुओं ने औषधि के रुप में चाय का इस्तेमाल किया था। कहानी है कि बौद्ध भिक्षु ने अपनी तपस्या के दौरान जागते रहने के लिए कुछ खास पत्ते चबाते थे और वो पत्तियां चाय की थीं। इस तरह से भारत में चाय प्रचलित हुई थी।
चीन में हुई थी चाय की खोज
हालांकि, तथ्य ये भी है कि 5000 साल पहले चीन में चाय के बारे में पता चला। 2732 ईपू एक सम्राट शेन नुंग ने इसकी खोज तब की जब उनके उबलते हुए पानी में ये पत्तियां आकर गिर गईं। इसके बाद उन्होंने देखा कि इससे खुशबू भी आई और फिर उन्होंने इसे पी भी लिया। इससे उन्हें इसके बारे में पता चला।
भारत में उत्पादन कैसे शुरू हुआ?
भारत में चाय का उत्पादन भारत के उत्तर-पूर्वी भाग में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने शुरू किया था। फिर 19वीं सदी के अंत में इसका उत्पादन शुरू किया गया और इसके बागान लगाए जाने लगे। कहा जाता है कि इससे पहले लोग चाय का उपयोग एक सब्जी पकाने में भी कर रहे थे और लहसुन के साथ चाय की पत्तियों को मिलाकर इसका इस्तेमाल किया जाता था।
साल 1823 और 1831 में ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारी रॉबर्ट ब्रूस और चार्ल्स ने यह पुष्टि की चाय का पौधा वास्तव में असम में पैदा हुआ था। इसके बाद उन्होंने चीन की मदद से भारत में चाय का उत्पादन शुरू किया, इसके लिए बाहर से चाय के बीज भी मंगाए गए थे और देखा गया कि क्या वाकई चाय का भारत में अच्छे से उत्पादन किया जा सकता है या नहीं।
रॉबर्ट ब्रूस ने यहां की चाय की झाड़ियों के साथ कुछ एक्सपेरिमेंट करके और बागान या बॉटेनिकल गार्डन में चाय को लेकर काम किया और काली चाय का निर्माण किया गया। इसके बाद उत्पादन लगातार बढ़ता गया और आज भारत सबसे ज्यादा चाय का उत्पादन करने वाले देशों में अग्रणी है।
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