लॉर्ड बायरन: उस जमाने के इंग्लैण्ड में युवाओं ने उसकी तरह लंगड़ा कर चलने को फैशन बना लिया…

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वह हल्का सा लंगड़ा कर चलता था। उसके ज़माने के इंग्लैण्ड में युवाओं ने उसकी तरह लंगड़ा कर चलने को फैशन बना लिया। उन्हें लगता था ऐसा करने से उन्हें जल्दी कोई प्रेमिका हासिल हो जाएगी। यह लॉर्ड बायरन था जिसने ‘डॉन जुआन’ और ‘चाइल्ड हैरल्ड’ जैसी कविताएं लिख कर साहित्य का पहला सुपरस्टार होने …

वह हल्का सा लंगड़ा कर चलता था। उसके ज़माने के इंग्लैण्ड में युवाओं ने उसकी तरह लंगड़ा कर चलने को फैशन बना लिया। उन्हें लगता था ऐसा करने से उन्हें जल्दी कोई प्रेमिका हासिल हो जाएगी। यह लॉर्ड बायरन था जिसने ‘डॉन जुआन’ और ‘चाइल्ड हैरल्ड’ जैसी कविताएं लिख कर साहित्य का पहला सुपरस्टार होने का दर्ज़ा हासिल कर लिया था।

कीट्स और शैली के साथ उन्नीसवीं शताब्दी की यूरोपियन कविता को बहुत गहरे प्रभावित करने वाले रोमांटिक आन्दोलन के तीन युवा स्तम्भों में से एक बायरन को उनकी कविताओं ने उनके देश इंग्लैण्ड के बाहर भी अभूतपूर्व ख्याति दिलाई।

उच्चकुलीन अमीर ख़ानदान से ताल्लुक रखने वाले इस बेहद सुदर्शन और आकर्षक कवि की महिला-प्रशंसिकाओं का दायरा बहुत बड़ा था। इसके अलावा उसे परले दर्जे के लापरवाह, अक्खड़ और स्त्रीगामी के रूप में जाना जाता था. महिलाओं को सिड्यूस करने में विशेषज्ञ बायरन खुद के जीते जी एक रोमांटिक नायक बन चुका था – चमकीली प्रतिभा से लैस, ह्यूमर से भरपूर, बेहद प्रतिभावान, कॉस्मोपॉलिटन और थोड़ा सा खतरनाक। औरतों के साथ बायरन के संबंधों को लेकर असंख्य किस्से चलते थे।

एक दावत में उसकी मुलाक़ात कुलीन घराने की ऐन इसाबेल से हुई जो अपने समय के हिसाब से बेहद पढ़ी-लिखी स्त्री थी और गणित की जीनियस मानी जाती थी। पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों में यकीन रखनेवाली ऐन बायरन को पहली ही निगाह में भा गयी और उसे शादी का प्रस्ताव दे डाला। बायरन के असंख्य औरतों के साथ जगजाहिर शारीरिक सम्बन्ध थे जिसके हवाले से ऐन के परिवार वालों ने इस सम्बन्ध का विरोध किया।

करीब दो सालों तक ऐन बायरन के प्रेम-प्रस्ताव को ठुकराती रही. बायरन उससे बुरी तरह आकर्षित था और उसे “समानांतर चतुर्भुजों की राजकुमारी” कहा करता था. आखिरकार एक दिन ऐन मान गयी और उसने बायरन से शादी करने के लिए हां कर दी. उसने अपनी माँ को एक चिठ्ठी में लिखा, “वह एक बहुत बुरा, बहुत अच्छा आदमी है लेकिन मेरा धार्मिक कर्तव्य है कि मैं उसका साथ दूं और उसके व्यवहार को सुधारने में उसकी मदद करूं।” बायरन सत्ताईस का था ऐन तेईस की।

यह हर लिहाज़ से बेमेल और अटपटा सम्बन्ध था. लॉर्ड बायरन उन दिनों आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था. इस वजह से वह अक्सर झुंझलाया रहता था और उसके गुस्से और खीझ का निशाना ऐन को बनना पड़ता. इसके अलावा उसने खूब शराब पीना भी शुरू कर दिया. बायरन को यह भी शक था कि ऐन उसकी अलमारी का ताला तोड़कर उसके गुप्त पत्रों को पढ़ चुकी थी।

शादी के कुछ महीने भी न बीते थे जब लन्दन की एक स्टेज अभिनेत्री सूज़न बॉयस के साथ बायरन के प्रेम-संबंधों के चर्चे होने लगे. ऐन गर्भवती थी और अपने पति की हालत देखकर उसे भय होने लगा था कि वह पागल होने की कगार पर पहुँच गया है. भीषण मानसिक त्रास और यातना के बीच 10 दिसम्बर 1815 को उसने एक बेटी को जन्म दिया। बच्ची को ऐडा नाम दिया गया. बायरन की मानसिक और आर्थिक स्थिति बदतर हो रही थी।

बायरन के ऐन से कहा कि वह कुछ समय अकेला रहकर अपने आर्थिक मसले निबटाना चाहता है. बेटी कुछ ही हफ़्तों की थी जिसे लेकर ऐन अपने माँ-बाप के घर आ गयी. ऐन को अब भी यकीन था कि बायरन के साथ अपने सम्बन्ध को किसी तरह बचा लेगी. उसने उसे प्यार से भरपूर कई ख़त भी लिखे. बायरन ने एक का भी जवाब नहीं दिया।

ऐन की माँ ने कई बार बायरन को सन्देश भेजे कि कभी उनके पास रहने आये। वह नहीं आया। दरअसल उसके बाद ऐन और बायरन कभी मिले ही नहीं. एक साल बाद वकीलों की सहायता और आपसी सहमति से दोनों ने आधिकारिक रूप से वैवाहिक सम्बन्ध को समाप्त कर लिया।

इस संक्षिप्त और तूफानी सम्बन्ध के परिणाम के तौर पर उपजी संतान ऐडा को ऐन ने अपने कठोर अनुशासनपूर्ण निर्देशन में बड़ा किया. उसे भय था कि उसकी बेटी के भीतर अपने पिता के पागलपन के जीन न आ जाएं. वह नहीं चाहती थी कि ऐडा अपने बाप की तरह मूडी और सनकी बन जाय. इसके लिए बच्ची के लिए घरेलू ट्यूशन शुरू किये गए और बचपन से ही विज्ञान और गणित पढ़ाया गया. किसी भी तरह के साहित्य को घर में लाए जाने पर बाकायदा रोक थी।

इसके बावजूद ऐडा के भीतर लार्ड बायरन की प्रवृत्तियां आ ही गईं. वह अपने बाप की ही तरह विद्रोही और कल्पनाशील किशोरी की तरह बड़ी हुई. माँ के साथ रहते हुए भी उसने लॉर्ड बायरन की कविता के बारे में उड़ती-उड़ती तमाम बातें सुन रखी थीं. वह आठ साल की थी जब यूनान में एक युद्ध लड़ने के दौरान बायरन की मौत हो गयी. उस वक़्त वह कुल छत्तीस साल का था. ऐडा को इस बात का जिन्दगी भर अफ़सोस रहा कि उसे अपने अपने पिता से कभी नहीं मिलने दिया गया।

पढ़ाई के दौरान ऐडा को अपने समय के सबसे मशहूर वैज्ञानिकों माइकेल फैराडे, डेविड ब्रूस्टर और चार्ल्स बैबेज वगैरह से संपर्क करने का मौक़ा मिला और चार्ल्स डिकेंस से भी. कवि की इस बेटी ने लुक-छिप कर न सिर्फ अपने पिता की सारी कविताएं पढ़ीं, अपने वैज्ञानिक अध्ययन को “काव्यात्मक विज्ञान” कहा और गणित को अपना क्षेत्र बनाया।

आज कम्प्यूटर के पितामह कहे जाने वाले चार्ल्स बैबेज के साथ ऐडा का परिचय तब हुआ जब वह अठारह की थी. चार्ल्स बैबेज अपने समय के बहुत बड़े वैज्ञानिक-गणितज्ञ थे और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के गणित विभाग में उसी पद पर आसीन थे जिस पर कभी न्यूटन बैठते थे और हमारे समय में स्टीफन हॉकिंग बैठे. बैबेज ने गणनाओं को आसान बनाने के लिए एक मशीन का निर्माण किया था जिसे वे एनालिटिकल इंजन कहते थे।

इस मशीन ने ऐडा को बहुत आकर्षित किया. उसने बारीकी से उसका अध्ययन किया और तमाम तरह की रिसर्च के बाद यह सिद्धांत विकसित किया कि इस इंजन का इस्तेमाल गणित के परे अन्य वैज्ञानिक क्षेत्रों में भी किया जा सकता है. उसकी काव्यात्मक वैज्ञानिकी ने उसे प्रेरित किया कि वह बैबेज के इंजन का बारीकी से निरीक्षण करे और यह पता लगाने की कोशिश करे कि किस तरह उस तकनीक को एक उपयोगी सामाजिक उपकरण में बदला जा सकता है।

ऐडा का व्यक्तिगत जीवन बहुत मुश्किल रहा था. बचपन से ही बीमार रहने वाली ऐडा तेरह की थी जब उसे लकवा पड़ गया जिसकी वजह से वह एक साल तक बिस्तर में रहने को विवश हुई. सत्रह की आयु में वह अपने ट्यूटर के साथ भाग गयी. खूब बखेड़ा हुआ जिसके बाद वह वापस घर लौट आई. अठारह की आयु में उसने अपने से दस साल बड़े एक वैज्ञानिक के साथ शादी कर ली।

ऐडा पैंतीस की थी जब उसे कैंसर हो गया। कुछ माह चली बीमारी के बाद 27 नवंबर 1852 को वह चल बसी. लॉर्ड बायरन भी इतने ही साल जिया था. उसकी माँ बायरन के नाम से ही बिदक जाती थी लेकिन मरने से पहले उसने माँ से वादा लिया कि उसे अपने पिता की कब्र की बगल में दफनाया जाय। ऐसा ही हुआ भी. नॉटिंघमशायर के हकनेल में स्थित सेंट मेरी मैग्डालेन चर्च में एक दूसरे से सटी हुई उन दोनों की कब्रें देखी जा सकती हैं।

ऐडा का जीवन बहुत सारी विविधताओं, संघर्षों, पीड़ाओं और अन्तर्द्वन्द्वों से भरा हुआ था लेकिन उसका ऑब्सेशन सिर्फ दो चीज़ों के साथ था – गणित और उसके पिता लॉर्ड जॉर्ज गॉर्डन बायरन। चार्ल्स बैबेज की मशीन किस-किस काम में लाई जा सकती है इस बाबत उसने एक महत्वपूर्ण पर्चा लिखा जिसे बाद में संसार का पहला कम्प्यूटर अल्गोरिदम कहा गया। कोई हैरत नहीं जिन दिनों कम्प्यूटर के लिए नई-नई भाषाएँ ईजाद की जा रही थीं, उनमें से एक का नामकरण उसके नाम पर किया गया। आम धारणा है कि ऐडा जिसका पूरा नाम ऑगस्टा ऐडा किंग लवलेस था दुनिया की पहली कम्प्यूटर प्रोगामर थी।

  •  अशोक पांडेय

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