ईमानदारी की मिशाल थे रूम सिंह, कांप उठते थे भ्रष्ट अफसर, जानें इनकी सच्चाई की कहानी…
आज के लोग सोचते हैं कि पता नहीं वह दौर कहां चला गया। जहां नेता ईमानदार हुआ करते थे। जो जनहित को अपना कर्तव्य, लेकिन आज के आधुनिक दौर में वह सब गायब हो गया। बरेली मंडल के शाहजहांपुर जिले की तिलहर विधानसभा क्षेत्र में एक ऐसे विधायक थे। जिनकी ईमानदारी के किस्से लोगों के …
आज के लोग सोचते हैं कि पता नहीं वह दौर कहां चला गया। जहां नेता ईमानदार हुआ करते थे। जो जनहित को अपना कर्तव्य, लेकिन आज के आधुनिक दौर में वह सब गायब हो गया। बरेली मंडल के शाहजहांपुर जिले की तिलहर विधानसभा क्षेत्र में एक ऐसे विधायक थे। जिनकी ईमानदारी के किस्से लोगों के जेहन में आज भी ताजा हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं तिलहर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके स्व. रूम सिंह की। इनकी ईमानदारी की मिशाल आज भी क्षेत्र में पेश की जाती हैं।
स्थानीय लोगो को आज भी 1977 का वह वाकया आज भी याद है जब चुनाव हारने के बाद रूम सिंह पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह को रुपये वापस करने के लिए गए थे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रह चुके रूम सिंह उस वक्त जलबा था। जनहित के लिए वह अफसरों से भिड़ने में भी गुरेज नहीं करते थे। इसकी वजह थी कि उनके पास ईमानदारी का सबसे बड़ा अस्त्र था।
वर्ष 1977 में रूम सिंह जनता पार्टी से चुनाव मैदान में थे। वहीं सत्यपाल सिंह यादव कांग्रेस से चुनाव मैदान में थे। चूंकि सत्यपाल सिंह यादव उस वक्त युवा नेता थे। इसलिए जनता ने सत्यपाल सिंह यादव को विधायक चुना। सत्यपाल सिंह यादव ने रूम सिंह को 1451 मतों से हरा दिया। चुनाव का रिजल्ट आने के बाद रूम सिंह के पास पार्टी फंड के 2500 रुपये बच गए। इन रुपयों को लेकर रूम सिंह चौधरी चरण सिंह के पास पहुंच गए थे।
रूम सिंह के बेटे अशोक सिंह ने बताया कि जब उनके पिता ने रूपये वापस किए तो चौधरी चरण सिंह ने रूपये नहीं लिए और कहा कि किसी नेक कार्य में लगा दो। इसके बाद रूम सिंह अपने गांव वापस आ गए। उन्होंने उस धन से जगतियापुर में एक स्कूल बनवा दिया। हालांकि यह स्कूल अब खंडहर हो गया है, लेकिन आज भी रूम सिंह की ईमानदारी की कहानी सुनाता है।
जनता के प्रति ईमानदारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा लेने की वजह से ही रूम सिंह को जनता ने वर्ष 1957 में जिताकर विधानसभा तक पहुंचाया था। स्थानीय लोगों ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों से लोहा लेने के बाद उन्होंने भ्रष्ट अफसरों से जनहित में लोहा लेना शुरू कर दिया था। यही वजह थी कि आज भी लोग उनके किस्से सुनाने से पीछे नहीं हटते हैं।
– निकेता चौधरी
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