मुरादाबाद : चुनाव के मैदान में भाजपा ने बदल दिए अधिकतर लड़ाके
आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। अबकी बार 300 पार का नारा देने वाले भाजपाई रणनीतिकारों ने अपने पैंतरे बदल दिए हैं। दोनों विधायकों को दोबारा मौका तो दिया है। लेकिन, पिछले चुनाव में प्रतिद्वंद्वी रहे चारों उम्मीदवारों को मैदान से बाहर कर दिया गया है। यानि मुरादाबाद देहात, कुंदरकी, ठाकुरद्वारा और बिलारी के प्रत्याशी बदल दिए गए …
आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। अबकी बार 300 पार का नारा देने वाले भाजपाई रणनीतिकारों ने अपने पैंतरे बदल दिए हैं। दोनों विधायकों को दोबारा मौका तो दिया है। लेकिन, पिछले चुनाव में प्रतिद्वंद्वी रहे चारों उम्मीदवारों को मैदान से बाहर कर दिया गया है। यानि मुरादाबाद देहात, कुंदरकी, ठाकुरद्वारा और बिलारी के प्रत्याशी बदल दिए गए हैं।
पार्टी नियंता इसे राजनीतिक चतुराई बता रहे हैं और गैर भाजपाई इसे पार्टी की घबराहट ठहराने पर तुले हैं। भाजपा ने चार क्षेत्रों के उम्मीदवार बदले हैं। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा की शहर सीट से रितेश गुप्ता और कांठ से राजेश कुमार चुन्नू सीधी टक्कर में बड़ी मुश्किल से जीते थे। देहात सीट पर संगठनकर्ता हरिओम शर्मा को पार्टी ने मौका दिया था। वह करीब 28000 मत के अंतर से चुनाव हार गए थे। सपा के हाजी इकराम कुरैशी जीते थे। अब इकराम ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में देहात सीट से ताल ठोकी है। भाजपा ने डॉ. केके मिश्र को पहली बार मौका दिया है। ठाकुरद्वारा सीट पर हाल में राजनीति में आए अजय प्रताप सिंह को उतारा है।
पिछली बार राजपाल सिंह चौहान की मेहनत पर पानी फिर गया। इस समय चौहान भाजपा के जिलाध्यक्ष हैं। यह पार्टी की परंपरागत सीट है। पूर्व सांसद सर्वेश सिंह लगातार यहां से विधायक रहे हैं। चर्चित कुंदरकी सीट पर संगठन के जिला महामंत्री कमल कुमार प्रजापति मैदान में हैं। बीते चुनाव में उम्मीदवार रहे रामवीर सिंह को मौका नहीं मिला है, जबकि यहां के सपा विधायक हाजी रिजवान बसपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।
सपा ने यहां टिकट बदल दिया है। बिलारी में भाजपा का कभी कमल नहीं खिला है। बीते चुनाव के रनर रहे सुरेश सैनी की जगह पार्टी ने पूर्व एमएलसी परमेश्वर लाल सैनी को मौका दिया है। इस क्षेत्र में धार्मिक रूप से मुस्लिम मतदाता अधिक हैं। सपा के विधायक मोहम्मद फहीम तीसरी बार मैदान में हैं। यानी भाजपा ने मिशन 2022 में अधिकतर नए चेहरों पर भरोसा किया है।
जिले में आसान नहीं है सपा की डगर
मुरादाबाद। समाजवादी गढ़ में सपा की मुश्किलें कम नहीं होने वाली हैं। वर्ष 2017 के दो विधायकों को पार्टी ने फिर मौका दिया है। लेकिन, जिन दो विधायकों का टिकट काटा है, वे दोनों दूसरे दलों से ताल ठोंक चुके हैं। शहर सीट पर पार्टी ने पुराने चेहरे हाजी यूसुफ अंसारी पर दांव खेला है। अंसारी भाजपा उम्मीदवार से सीधे जंग में चुनाव हारे थे। लेकिन, नगर निगम के मेयर के चुनाव में उनका प्रदर्शन तीसरे नंबर का रहा। देहात सीट पर पार्टी ने लगातार बसपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव हारने वाले हाजी नासिर को आजमाया है। लोक सभा चुनाव के पहले सपाई बने नासिर मुरादाबाद सीट से टिकट के दावेदार थे। चर्चा के बाद इन्हें टिकट नहीं मिला था। अबकी बार देहात सीट पर तकदीर आजमा रहे हैं। कुशल प्रबंधन नासिर की मीट कारोबार में अच्छी दखल है। यहां के सपा विधायक रहे हाजी इकराम अब कांग्रेसी उम्मीदवार के रूप में तकदीर आजमा रहे हैं। कुंदरकी में पार्टी ने भरोसेमंद जिया-उर-रहमान बर्क पर भरोसा किया है। यहां भी विधायक हाजी रिजवान बसपा उम्मीदवार के रूप में हैं। बिलारी में विधायक मोहम्मद फहीम और ठाकुरद्वारा में एमएलए नवाब जान खान दमखम के साथ मैदान में हैं। कांठ पर पार्टी ने नया प्रयोग किया है। यहां संगठन की पसंद कमाल अख्तर मैदान में हैं।
