हल्द्वानी में अग्निपथ योजना का विरोध करने पर पहले खाई लाठी, अब 400 युवाओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज
हल्द्वानी, अमृत विचार। अग्निपथ योजना और अधूरी सेना भर्ती को पूरा करने के खिलाफ हल्द्वानी की सड़क पर प्रदर्शन करना युवाओं को भारी पड़ गया है। पुलिस ने 400 युवाओं पर गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के आधार पर शिनाख्त कर रही है। युवाओं के …
हल्द्वानी, अमृत विचार। अग्निपथ योजना और अधूरी सेना भर्ती को पूरा करने के खिलाफ हल्द्वानी की सड़क पर प्रदर्शन करना युवाओं को भारी पड़ गया है। पुलिस ने 400 युवाओं पर गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के आधार पर शिनाख्त कर रही है।
युवाओं के खिलाफ रिपोर्ट हल्द्वानी कोतवाली के एसएचओ हरेंद्र सिंह चौधरी की तहरीर पर दर्ज कर की गई है। रिपोर्ट में एसएचओ हरेंद्र सिंह चौधरी ने कहा है कि आर्मी भर्ती का विरोध कर रहे लोगों के लिए पुलिस के साथ मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किए गए थे। 17 जून की सुबह 100 से 150 लोगों की भीड़ रामलीला मैदान से निकली, जिन्हें ओके होटल पर रोककर समझाने की कोशिश की गई, लेकिन एक गुट उग्र होकर मटरगली से वर्कशॉप लाइन होते हुए तिकोनिया की ओर निकल गया और तिकोनिया पहुंचने पर इनकी संख्या 300 से 400 के करीब हो गई। इन लोगों ने नेशनल हाईवे जाम कर दिया। आम राहगीर, एंबुलेंस, मरीज और तीमारदारों को रोककर सरकारी गमले और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। भीड़ ने राहगीरों से अभद्रता, पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों व कर्मचारियों से धक्का-मुक्की की गई।
जिसमें अधिकारियों व कर्मचारियों को चोटें भी आईं। प्रदर्शनकारी छोटे-छोटे गुटों में बंटकर नैनीताल रोड, वर्कशाप लाइन, नवाबी रोड, ठंडी सड़क की ओर भागे और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए भय का माहौल पैदा कर दिया, जिससे घबराकर लोगों ने प्रतिष्ठान बंद कर दिए। एसएचओ की तहरीर पर उक्त भीड़ में शामिल 300 से 400 अज्ञात युवकों के खिलाफ धारा 147, 149, 332, 342, 353, 427, 504 व 7 क्रिमिनल लॉ (अमेन्डमेन्ट) एक्ट के रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।

इधर, हल्द्वानी बार एसोसिएशन के सचिव एडवोकेट विनीत परिहार ने कहा कि पुलिस द्वारा हल्द्वानी में शान्तिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कानूनी रूप से गलत व झूठा मुक़दमा दर्ज किया गया है जबकि छात्रों ने कोई अपराध नहीं किया,कई निर्दोष छात्रों को बुरी तरह से मारा गया है। न्यायालय में ये मुक़दमा नहीं टिक पायेगा। यदि लोगों को सरकार की नीतियां सही नहीं लगती है तो उन्हें शान्तिपूर्वक प्रदर्शन करने का अधिकार सविधान में दिया गया है। यह सब छात्रों को भयभीत करने की कार्यवाही है। न्यायालय में छात्रों की पूरी कानूनी मदद की जाएगी।
