कानपुर: रिंग रोड किनारे बसेगी इंटीग्रेटेड टाउनशिप, 9482.79 करोड़ रुपये होंगे खर्च

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कानपुर। रिंग रोड परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए जल्द ही राज्य और केंद्र सरकार के बीच अंशदान का निर्धारण होगा। इस संबंध में अगस्त में बैठक होने की उम्मीद है। पहले यह मार्ग चार लेन बनना था, लेकिन अब इसे छह लेन का बनाने पर सहमति सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर …

कानपुर। रिंग रोड परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए जल्द ही राज्य और केंद्र सरकार के बीच अंशदान का निर्धारण होगा। इस संबंध में अगस्त में बैठक होने की उम्मीद है। पहले यह मार्ग चार लेन बनना था, लेकिन अब इसे छह लेन का बनाने पर सहमति सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से दी गई है। ऐसे में इसके निर्माण में 9482.79 करोड़ रुपये खर्च होंगे। रिंग रोड किनारे इंटीग्रेटेड टाउनशिप बसेगी। इसमें आवासीय क्षेत्र के साथ ही औद्योगिक इकाइयां भी स्थापित हो सकेंगी।

93.2 किलोमीटर लंबी रिंग रोड के निर्माण का कार्य चार चरणों में होना है। पहले चरण में सचेंडी से मंधना के बीच रिंग रोड बनेगी। दूसरे चरण में मंधना से उन्नाव के आटा तक काम होना है। पहले चरण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। चार लेन की रिंग रोड के निर्माण पर 5182.37 करोड़ रुपये खर्च होने थे, लेकिन 9482.79 करोड़ रुपये खर्च आएगा।

इस रिंग रोड के बन जाने से न सिर्फ जाम की समस्या समाप्त होगी बल्कि नए आवासीय और औद्योगिक क्षेत्र भी आसानी से बसाए जा सकेंगे। केडीए अपने मास्टर प्लान में इसकी व्यवस्था करेगा। इंटीग्रेटेड टाउनशिप की स्थापना में यूपीसीडा को आसानी होगी। केडीए भी आवासीय टाउनशिप स्थापित कर सकेगा। समग्र विकास समिति समन्वयक नीरज श्रीवास्तव का कहना है कि रिंग रोड को एयरपोर्ट से भी कनेक्ट किया जाएगा। रूमा से एयरपोर्ट तक तीन किलोमीटर लंबी सड़क बनेगी। उस स्थल का सर्वे किया जा चुका है।

किस मद में कितना खर्च

कार्य                     व्यय

निर्माण लागत     4778.69
भूमि अधिग्रहण    3605.00
यूटिलिटी शिफ्टिंग   191.14
अन्य व्यय             907.95

नोट: धनराशि करोड़ रुपये में है

पहले खर्च होना था

निर्माण पर 2573.31 करोड़ रुपये खर्च होना था। भूमि अधिग्रहण मद में 2609.06 करोड़ रुपये की लागत आनी थी। इस तरह 5182.37 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान था।

रिंग रोड को छह लेन बनाने पर सहमति बन गई है। पहले चरण के कार्य के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इससे जाम से निजात तो मिलेगी ही शहर का विस्तार भी आसानी से हो सकेगा…प्रशांत दुबे, परियोजना निदेशक एनएचएआई कन्नौज इकाई।

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