9 अगस्त: जानिए क्यों हुई थी भारत और रूस की दोस्ती?
नई दिल्ली: भारत और रूस की दोस्ती दशकों पुरानी है। इस दोस्ती को 51 साल पूरे हो गए हैं। 1971 में 9 अगस्त के दिन भारत और रूस दोस्ती के बंधन में बंधे थे। दोनों देशों के संबंधों की ताकत इतनी थी कि इसने तत्कालीन विश्व के समीकरण में आमूल परिवर्तन कर दिए। इतना ही …
नई दिल्ली: भारत और रूस की दोस्ती दशकों पुरानी है। इस दोस्ती को 51 साल पूरे हो गए हैं। 1971 में 9 अगस्त के दिन भारत और रूस दोस्ती के बंधन में बंधे थे। दोनों देशों के संबंधों की ताकत इतनी थी कि इसने तत्कालीन विश्व के समीकरण में आमूल परिवर्तन कर दिए। इतना ही नहीं, इससे न केवल दक्षिणी एशिया बल्कि अमेरिका और यूरोपीय देशों की विदेश नीति को भी प्रभावित किया था।
1971 के बाद भारत और रूस की दोस्ती दुनिया भर के लिए मिसाल बन गई थी। यह देख दुनिया के दूसरे देशों ने दोस्ती पर नजर लगानी शुरू कर दी। इन सालों में कई ऐसे मौके आए जब भारत ने रूस के साथ दोस्ती निभाई और रूस ने भारत से साथ कंधे से कंधे मिलाकर दोस्ती का फर्ज निभाया।
जब सोवियत राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव आधिकारिक दौरे पर भारत आए तो प्रधानमंत्री राजीव गांधी उनका स्वागत करने सीधे एयरपोर्ट पहुंच गए थे। यह वह समय था, जब भारत के खिलाफ अमेरिका, पाकिस्तान और चीन का गठबंधन मजबूत होता जा रहा था और तीन दिशाओं से घिरे भारत की सुरक्षा को गंभीर ख़तरा महसूस होने लगा था।
ऐसे में तत्कालीन सोवियत विदेश मंत्री अंद्रेई ग्रोमिको भारत आए और 1971 को आज ही के दिन उन्होंने भारत के उस समय के विदेश मंत्री सरदार स्वर्ण सिंह के साथ सोवियत-भारत शांति, मैत्री और सहयोग संधि पर हस्ताक्षर किए। यह संधि दोनो देशों के दोस्ताना संबंधों में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
इस संधि के तुरंत बाद सोवियत संघ ने यह घोषणा की थी कि भारत पर हमला यानि रूस के ऊपर हमला माना जाएगा। यही कारण है जिससे 1971 युद्ध के दौरान अमेरिकी नौसैनिक बेड़े को भारत के ऊपर हमला करने की हिम्मत नहीं हुई।
दोनों देशों के बीच रिश्तों को मज़बूत करने का दूसरा अहम क्षेत्र ऊर्जा है। इसमें सिर्फ हाइड्रोकार्बन (तेल और गैस) ही नहीं शामिल है बल्कि परमाणु ऊर्जा भी शामिल हैं। भारत गैस रूस से आयात करता है लेकिन आने वाले दिनों में इसकी मात्रा में और बढोतरी होना तय है।
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