NEET विवाद पर कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला: खरगे-राहुल ने धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग उठाई, सोनिया गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर साधा निशाना

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने शिक्षा मंत्री को हटाने, छात्रों से माफी मांगने और शिक्षा व्यवस्था पर संसद में चर्चा की मांग दोहराई।

नई दिल्ली: NEET पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने, छात्रों से माफी मांगने और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के आरोपों की कार्रवाई कराने की मांग की है।

खरगे बोले- प्रधानमंत्री संसद में दें जवाब

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब संसद का सत्र चल रहा हो, तब प्रधानमंत्री को संसद के भीतर आकर अपना पक्ष रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देर रात वीडियो संदेश जारी करने के बजाय सरकार को संसद में इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए। साथ ही उन्होंने मांग की कि संसद में चर्चा से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए, छात्रों से माफी मांगी जाए और प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

खरगे ने कहा कि इन कदमों के बाद कांग्रेस शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है।

राहुल गांधी ने उठाया इस्तीफे का मुद्दा

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो संदेश पर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि छात्र लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी ने सरकार से आग्रह किया कि शिक्षा मंत्री को हटाया जाए, छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो और छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए।

सोनिया गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी केंद्र सरकार की शिक्षा नीति और छात्र आंदोलनों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।

'शिक्षा व्यवस्था का पतन, युवा भारत की पीड़ा' शीर्षक से प्रकाशित अपने लेख में उन्होंने कहा कि छात्र जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनकी मांगों का उचित जवाब देने के बजाय कठोर रवैया अपनाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों को देश का भविष्य मानने के बजाय उनके साथ कठोर व्यवहार कर रही है। उनके अनुसार, छात्रों का आंदोलन शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं और जवाबदेही की मांग का परिणाम है।

सरकार पर लगाए कई आरोप

सोनिया गांधी ने अपने लेख में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है और छात्रों के भविष्य की रक्षा करना सरकार का नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई पहले भी विवाद का विषय रही है और सरकार को छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।

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