भारत-नेपाल सीमा पर बड़ी राहत: 9 किमी तक भारतीय वाहनों को भंसार शुल्क से छूट, ‘रोटी-बेटी’ रिश्तों को मिली नई मजबूती
नेपाल सरकार के फैसले से सीमावर्ती नागरिकों, व्यापारियों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं को राहत, डिजिटल सुविधा पास से होगा आसान आवागमन
तुलसीपुर (बलरामपुर), अमृत विचार। भारत और नेपाल के पारंपरिक ‘रोटी-बेटी’ संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में नेपाल सरकार ने अहम निर्णय लिया है। अब भारत-नेपाल सीमा से नेपाल के भीतर 9 किलोमीटर तक जाने वाले भारतीय वाहनों को भंसार (कस्टम शुल्क) से छूट मिलेगी। इस सुविधा के तहत भारतीय वाहन चालक केवल सुविधा पास (सुविधा भंसार) बनवाकर निर्धारित सीमा तक बिना किसी शुल्क के आवागमन कर सकेंगे।
नेपाल सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब पिछले कुछ वर्षों में सीमा पार आवागमन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर समय-समय पर तनाव की स्थिति भी देखने को मिली थी। ऐसे में इस पहल को दोनों देशों के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊर्जा देने वाला कदम माना जा रहा है।
सनातन जागृति मंच के संयोजक एवं जिला महामंत्री दिलीप कुमार गुप्ता ने नेपाल सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों, व्यापारियों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी। उन्होंने बताया कि यदि कोई भारतीय वाहन सूर्योदय के बाद नेपाल में प्रवेश कर उसी दिन सूर्यास्त से पहले भारत लौट आता है, तो उसे किसी प्रकार का अतिरिक्त भंसार शुल्क नहीं देना होगा। हालांकि 9 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाले वाहनों पर पहले की तरह निर्धारित भंसार शुल्क लागू रहेगा।
नेपाल सरकार ने लंबे समय से बंद पड़े 18 छोटे भंसार कार्यालयों को भी दोबारा संचालित कर उन्हें डिजिटल प्रणाली से जोड़ दिया है। इससे बढ़नी, खुनुवा सहित अन्य सीमावर्ती मार्गों से आने-जाने वाले लोगों को अधिक पारदर्शी और त्वरित सुविधा उपलब्ध होगी।
कृष्णानगर भंसार कार्यालय के उप-प्रमुख मयंक कुमार कर्ण ने बताया कि सुविधा पास के आधार पर भारतीय वाहन चालक 9 किलोमीटर तक उसी दिन निशुल्क यात्रा कर वापस लौट सकते हैं। इससे सीमा पार दैनिक आवागमन पहले की तुलना में अधिक सरल और व्यवस्थित होगा।
नेपाल के विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। लमही व्यापार संघ के अध्यक्ष कमल जंग सिंह ठाकुरी, घोराही व्यापार संघ के उपाध्यक्ष नरेश श्रेष्ठ तथा भालुबांग व्यापार संघ के अध्यक्ष सूरज खड़का ने कहा कि इस व्यवस्था से भारत-नेपाल के बीच व्यापार, पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को नई गति मिलेगी। साथ ही दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग भी मजबूत होगा।
सीमावर्ती क्षेत्र के स्थानीय नागरिकों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे लुंबिनी सहित नेपाल के धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच पहले से अधिक आसान होगी। उनका मानना है कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, धार्मिक और पारिवारिक संबंध इस पहल से और मजबूत होंगे।
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