Sonam Wangchuk Hunger Strike : पिता सोनम वांग्याल के आंदोलन की यादें फिर हुईं ताजा, इंदिरा गांधी के रुख से हो रही तुलना

Amrit Vichar Network
Edited By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के आंदोलन के बीच उनके पिता और दिवंगत लद्दाखी नेता सोनम वांग्याल का 1984 का ऐतिहासिक अनशन एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक उस दौर में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भूमिका और मौजूदा सरकार के रवैये की तुलना की जा रही है।

1984 में एसटी दर्जे की मांग पर हुआ था ऐतिहासिक अनशन

ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, वर्ष 1984 में सोनम वांग्याल ने लद्दाख के समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी स्वयं लेह पहुंची थीं और मांग पर सकारात्मक विचार का भरोसा देकर उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए राजी किया था। बाद में वर्ष 1989 में लद्दाख के समुदायों को एसटी का दर्जा प्रदान किया गया।

21वें दिन बिगड़ी सोनम वांगचुक की तबीयत

वर्तमान में सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं। शनिवार को उनके अनशन का 21वां दिन था, जब तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस ने चिकित्सकीय सलाह और उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया।

वांगचुक 28 जून से नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े विवाद में कथित छात्र मौतों के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के समर्थन में अनशन पर हैं।

कांग्रेस नेताओं ने भी किया पुराने आंदोलन का जिक्र

सोनम वांग्याल के आंदोलन का जिक्र कांग्रेस के भीतर भी हुआ। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वरिष्ठ नेताओं से सोनम वांगचुक से मुलाकात करने की बात कही और 1984 में इंदिरा गांधी के लेह जाकर संवाद करने की घटना का उल्लेख किया।

इसी क्रम में कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा जंतर-मंतर पहुंचे और वांगचुक से मुलाकात की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन संविधान प्रदत्त अधिकार है और अनशनकारियों से संवाद करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि 1984 में इंदिरा गांधी और 2011 में डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने भी ऐसा ही किया था।

पिता की पहचान मंत्री नहीं, किसान बताई थी

सोनम वांग्याल की चर्चा के साथ सोनम वांगचुक का एक पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें वांगचुक बताते हैं कि इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले के समय उन्होंने अपने पिता का परिचय जम्मू-कश्मीर सरकार के मंत्री के बजाय एक किसान के रूप में दिया था, ताकि पारिवारिक प्रभाव का उनकी प्रवेश प्रक्रिया पर कोई असर न पड़े।

कौन थे सोनम वांग्याल?

सोनम वांग्याल लद्दाख के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे। वे अविभाजित जम्मू-कश्मीर सरकार में मंत्री रह चुके थे और लद्दाख को संवैधानिक व राजनीतिक अधिकार दिलाने के आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। उनके 1984 के आंदोलन ने बाद में लद्दाख के समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाने की दिशा में अहम आधार तैयार किया।

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