जब छलनी हुआ था भारत मां का सीना, लाखों लोगों को झेलना पड़ा विभाजन का दंश

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नई दिल्ली। देश के इतिहास में 14 अगस्त की तारीख आंसुओं से लिखी गई है। यही वह दिन था जब देश का विभाजन हुआ और 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान तथा 15 अगस्त, 1947 को भारत को एक पृथक राष्ट्र घोषित कर दिया गया। उस समय लाखों लोगों को विभाजन का दंश झेलना पड़ा था। …

नई दिल्ली देश के इतिहास में 14 अगस्त की तारीख आंसुओं से लिखी गई है। यही वह दिन था जब देश का विभाजन हुआ और 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान तथा 15 अगस्त, 1947 को भारत को एक पृथक राष्ट्र घोषित कर दिया गया। उस समय लाखों लोगों को विभाजन का दंश झेलना पड़ा था।

इस विभाजन में न केवल भारतीय उप-महाद्वीप के दो टुकड़े किये गए बल्कि बंगाल का भी विभाजन किया गया और बंगाल के पूर्वी हिस्से को भारत से अलग कर पूर्वी पाकिस्तान बना दिया गया, जो 1971 के युद्ध के बाद बांग्लादेश बना।

कहने को तो यह एक देश का बंटवारा था, लेकिन दरअसल यह दिलों का, परिवारों का, रिश्तों का और भावनाओं का बंटवारा था। भारत मां के सीने पर बंटवारे का यह जख्म सदियों तक रिसता रहेगा और आने वाली नस्लें तारीख के इस सबसे दर्दनाक और रक्तरंजित दिन की टीस महसूस करती रहेंगी।

ऐसे पड़ गई थी विभाजन की नींव
इतिहासकारों का मानना है कि भारत विभाजन पटकथा की शुरुआत 1929 में तब शुरू हो गई थी जब मोतीलाल नेहरू समिति की सिफारिशों को हिंदू महासभा ने मानने से इनकार कर दिया था। दरअसल, इस समिति ने अन्य सिफारिशों के अलावा, सेंट्रल असेम्बली में मुसलमानों के लिए 33 फीसदी सीटों को आरक्षित करने की सिफारिश की थी। हिंदू महासभा इससे सहमत नहीं थी। मोहम्मद अली जिन्ना मुसलमानों के प्रवक्ता बन गए और कई मुस्लिम नेता थे जो बंटवारे के पक्ष में नहीं थे।

1932 में गांधी-अंबेडकर समझौता हुआ, जिसे पुणे पैक्ट भी कहा जाता है। इसमें हरिजनों के लिए सीटें आरक्षित करने की बात थी। इसकी वजह से सवर्णों के अलावा मुसलमानों की भी बेचैनी बढ़ गई थी। उधर बंगाल में हिंदू-मुस्लिमों का संघर्ष बढ़ता गया जो देश के विभाजन की एक और कारण पैदा करने लगा था। बंगाल में हिंदू-मुस्लिम टकराव की नींव तो अंग्रेजों ने ही रख दी जब 1905 में राज्य का विभाजन धर्म के आधार पर किया गया था।

इस व्यक्ति ने खींच दी थी सीमा रेखा
जमीन को बांटने के लिए ब्रिटेन से अचानक सिरील रेडक्लिफ नाम के अंग्रेज को बुलाया गया था। यह शख्स पहले कभी भारत नहीं आया था। कहा जाता है कि इस शख्स को भारत की संस्कृति, पृष्ठभूमि और लोगों के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं थी। रेडक्लिफ ने भारत और पाकिस्तान की सीमा रेखा खींच दी। 17 अगस्त 1947 को भारत-पाकिस्तान की विभाजन रेखा यानी सीमा का नाम रेडक्लिफ लाइन पड़ गया।

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