बरेली: कूड़ा संग्रह कर रुपये वसूले, जनसूचना कोष में जमा होना बताया, गोपाल धाम कालोनी में डोर टू डोर कूड़ा संग्रह करके पैसा वसूला
बरेली, अमृत विचार। डोर टू डोर कूड़ा संग्रह करने में एजेंसी ने एयरफोर्स के पास गोपाल धाम कालोनी जाकर सर्विस दी औ निगम क्षेत्र के बाहर जाकर जनता से रुपये वसूले। एजेंसी संचालक नगर निगम सीमा से बाहर जाकर सर्विस देता रहा। निगम से उसे वाहन और डीजल मिलता रहा, लेकिन किसी अफसर ने इसकी …
बरेली, अमृत विचार। डोर टू डोर कूड़ा संग्रह करने में एजेंसी ने एयरफोर्स के पास गोपाल धाम कालोनी जाकर सर्विस दी औ निगम क्षेत्र के बाहर जाकर जनता से रुपये वसूले। एजेंसी संचालक नगर निगम सीमा से बाहर जाकर सर्विस देता रहा। निगम से उसे वाहन और डीजल मिलता रहा, लेकिन किसी अफसर ने इसकी निगरानी नहीं की। सब कुछ एजेंसी पर छोड़कर निगम में गबन होता देखते रहे। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत हुई तो संबंधित क्षेत्र नगर निगम सीमा से बाहर बताकर शिकायत बंद कर दी।
जनसूचना के तहत जानकारी मांगी तो नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि एजेंसी त्रुटिवश नगर निगम सीमा से बाहर चली गई थी। अब उस कालोनी में एजेंसी अपनी सर्विस नहीं देगी। गोपाल धाम कालोनी निवासी संतोष कुमार ने 17 जून को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की तो कालोनी नगर निगम क्षेत्र में नहीं आती कहकर शिकायत बंद करा दी गई।
इसके बाद संतोष ने 28 जून को जनसूचना अधिकार के तहत निगम से पूछा था कि यदि गोपाल धाम कालोनी नगर निगम सीमा से बाहर है तो ठेकेदार के कर्मचारी किस अफसर के आदेश और किस नियम के तहत कालोनी में कूड़ा उठाते हैं और प्रति माह 50 रुपये की रसीद काटते हैं। इसका उत्तर नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने 10 अगस्त को दिए पत्र में दिया। नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने तब ही एजेंसी संचालक को बचाते हुए उत्तर दिया कि त्रुटिवश एजेंसी ने जनता को सेवाएं दीं और शुल्क वसूला। उन्होंने शुल्क को नगर निगम कोष में जमा कराने का उत्तर जन सूचना अधिकार में वादी को दिया है।
मामला सामने आने के बाद भी नहीं चेते अफसर
एजेंसी संचालक के प्रति अफसरों का नरम रवैया ही निगम में हुई गबन की राशि को बढ़ाता रहा। निगम में होने वाले हर तरह के भुगतान की जांच के लिए नगर निगम एक्ट में मुख्य लेखा परीक्षक की व्यवस्था है लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह फेल रही। परीक्षक स्तर से ही इस घपले को सामने आना चाहिए था लेकिन नगर आयुक्त की प्रारंभिक जांच में यह घपला सामने आया। ऐसे में लेखा परीक्षक की भूमिका और निगम में उनके रहने के औचित्य पर प्रश्न चिह्न लग गया है।
अफसर और कर्मचारियों को पता नहीं कहां तक है निगम की सीमा
घर घर कूड़ा उठाने वाली एजेंसी के कर्मी जिन वाहनों में कूड़ा भरकर लाते हैं। वह वाहन निगम मुहैया कराता है। निगम ही वाहनों में डीजल की व्यवस्था कराता है। एजेंसी संचालक ने निगम सीमा से बाहर जाने वाले वाहनों में भरपूर डीजल भरवाया। निगम में वाहनों में डीजल के लिए पर्ची देने की व्यवस्था है, लेकिन पर्ची देने वाले जिम्मेदार ने यह सवाल नहीं उठाया कि नगर निगम सीमा से बाहर वाहन क्यों जा रहा है। निगम के अफसर और कर्मचारियों को शहर में कहां तक नगर निगम का क्षेत्र है, इसका भी पता नहीं है।
संचालक के बचने पर ही अफसर बचेंगे, लिपिक पर गिरेगी गाज
एजेंसी संचालक को बचाने में अफसरों की भी बचत है। पूर्व नगर आयुक्त के समय से शुरू हुई यह अनियमितता अब भी चलती रहती लेकिन कूड़ा संग्रह करने वाले कर्मचारियों की हड़ताल से पूरा मामला ही सामने आ गया और नगर आयुक्त ने मामले की जांच बैठाई तो कई लोगों की गर्दन फंसती नजर आई। अब एजेंसी संचालक का ज्यादातर समय निगम में स्वास्थ्य विभाग में क्लर्क और अफसरों के कमरों के बीच ही बीत रहा है।
सोमवार को भी एजेंसी संचालक नए भवन में चक्कर लगाते रहे। निगम में चर्चा है कि इस मामले में भी लिपिक को भी दोषी ठहराया जाएगा। यदि कार्रवाई हुई तो उसी पर ही होगी। पूर्व में रामपुर रोड के एक शो रूम के टैक्स लगाने में हुई गड़बड़ी में किसी अफसर पर आंच नहीं आई है।
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