देश में खुलेंगी पांच अत्याधुनिक शहद परीक्षण प्रयोगशालाएं
नयी दिल्ली। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने देश में कृषि पैदावार में वृद्धि के लिए मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देकर गरीब किसानों को उसका फायदा दिलाने पर जोर देते हुए कहा कि गुणवत्ता पूर्ण शहद निर्यात के लिए देश में पांच अत्याधुनिक शहद परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना की जायेगी। कृषि मंत्री ने शुक्रवार को …
नयी दिल्ली। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने देश में कृषि पैदावार में वृद्धि के लिए मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देकर गरीब किसानों को उसका फायदा दिलाने पर जोर देते हुए कहा कि गुणवत्ता पूर्ण शहद निर्यात के लिए देश में पांच अत्याधुनिक शहद परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना की जायेगी।
कृषि मंत्री ने शुक्रवार को वीडियो कांफेंसिंग के माध्यम से गुजरात के आणंद में एक अत्याधुनिक शहद परीक्षण प्रयोगशाला का लोकार्पण करते हुए कहा कि भूमिहीन किसानों की आय दोगुनी करने के लिए उन्हें मधुमक्खी पालन करने को लेकर जागरुक किया जायेगा।
मधुमक्खी पालन पर दिये जाने वाले अनुदान का लाभ उन्हें देना होगा और वैज्ञानिक ढंग से इस कारोबार को करने के लिए उन्हें प्रशिक्षित भी किया जायेगा। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने इस प्रयोगशाला की स्थापना की है और देश में ऐसी पांच प्रयोगशालाओं की स्थापना की योजना है। इससे पहले शहद निर्यात के लिए विदेश में शहद के नमूनों की जांच करायी जाती थी।
कृषि मंत्री ने कहा कि मधुमक्खी पालन से गरीब किसानों के जीवन स्तर में बदलाव लाया जाना चाहिये । इसमें कम लागत में ज्यादा मुनाफा है । उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन का बजट पहले काफी कम था लेकिन मोदी सरकार ने अब इसका बजट बढा कर 4000 करोड़ रुपये कर दिया है तथा मधुमक्खी पालन के लिए अलग से 500 करोड़ रुपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि देश में शहद उत्पादन से ज्यादा बाजार में आता है । इस विकृति को ठीक करना होगा । नयी प्रयोगशाला की स्थापना से गुणवत्तापूर्ण प्राकृतिक शहद का निर्यात हो सकेगा।
पशुपालन, मत्स्य पालन एवं डेयरी मंत्री गिरिराज सिंह ने मधुमक्खी पालन से होने वाले फायदे की चर्चा करते हुए कहा कि एक किलो शहद उत्पादन से अनाज का उत्पादन 100 किलो बढ़ जाता है। ऐसा बेहतर परागण के कारण होता है। उन्होंने कहा कि देश में 3.5 लाख संगठित किसान मधुमक्खी पालन करते हैं और करीब 1.25 लाख टन शहद का उत्पादन होता है जिसमें से करीब आधे का निर्यात होता है। वर्ष 2030 तक दुनिया में 30 अरब डालर के शहद बाजार होने का अनुमान है। उन्होंने शहद के उत्पादन को बढाने के लिए मोरिंगा के पेड़ लगाने पर जोर देते हुए कहा कि रेल लाइन के किनारे की खाली पड़ी जमीन पर इसे लगाया जा सकता है जिसके लिए समन्वित प्रयास की जरुरत है।
पशु पालन राज्य मंत्री संजीव कुमार बालियान ने कहा कि व्यापारी किसानों से 70 से 80 रुपये किलो शहद खरीदता है जबकि बाजार में यह 350 से 400 रुपये किलो की दर से बिकता है । उन्होंने देश के अन्य हिस्सों में शहद परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने पर जोर दिया । कार्यक्रम में कृषि राज्य मंत्री परशोत्तम रुपाला और कैलाश चौधरी भी उपस्थित थे।
