Kanpur दक्षिण में बंदरों के आतंक से दहशत में मार्निग वॉकर, घरों में कैद रहने को मजबूर लोग, छतों पर भी जाने से डरते

कानपुर दक्षिण में बंदरों का आतंक जारी है।

Kanpur दक्षिण में बंदरों के आतंक से दहशत में मार्निग वॉकर, घरों में कैद रहने को मजबूर लोग, छतों पर भी जाने से डरते

कानपुर दक्षिण में बंदरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिससे मार्निग वॉकर दहशत में है। वहीं, लोग अपने घरों में रहने को मजबूर है।

कानपुर, अमृत विचार। दक्षिण के दर्जनों मोहल्लों के लोग बंदरों के आंतक के कारण दहशत में हैं। सुबह के समय बंदरों का झुंड रोड पर आने से लोग परेशान हैं। राहगीरों को पास से निकलने पर निशाना बना रहे है। आंतक प्रभावित क्षेत्रों में बसंत बिहार, किदवईनगर एच ब्लाक, केशवनगर, यशोदानगर, दामोदर नगर व बाबूपुरवा सहित अनेक क्षेत्रों में रहने वाले लोग पूरा घर बंद करके रहते हैं।

छत पर जाना और बच्चों का बाहर निकलना बंद हो गया है। खतरनाक बंदर मार्निग वॉकरों को पार्क में घुसकर काट रहे है। केशव मुधवन पार्क के केयर टेकर के यहां बंदरों ने घर पर हमला करके दौड़ लिया। पूरा परिवार घंटों घर के बाहर खड़ा रहा। परेशान स्थानीय लोगों ने पार्षद और वन विभाग की टीम से सम्पर्क करके बचाव की गुहार लगाई। उप-प्रभागीय वन अधिकारी अनिल कुमार सिंह ने आंतक वाले क्षेत्र में बंदरों को पकड़ने के लिए टीम भेजने का अश्वासन दिया है।

किदवईनगर निवासी प्रिया गुप्ता ने बताया कि बंदर आंतक के कारण पूरा परिवार दहशत में हैं। बच्चों का बाहर निकलना बंद हो गया है। महीनों से लोग दहशत के कारण छत पर नहीं गये हैं। घरों के छज्जों पर भी इनका कब्जा रहता है। पूरा दिन घरों के दरवाजे बंद रहने से परेशान हो गये हैं। छतों पर रखे गमले पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। परेशान होकर बॉलकनी में गिरिल से बंद करने पर विचार हो रहा है।

केशवनगर निवासी कमला देवी केशव मधुबन पार्क की केयर टेकर हैं। कमला ने बताया कि पार्क में रहने के कारण पिछले एक माह से परेशान हैं। अचानक बंदरों का झुंड आकर हमला कर देता है। पार्क में पानी देने के दौरान दोबार हमला बोला एक बार तो भागकर जान बचाई। लेकिन एकबार पैर में काट लिया। छोटे बच्चे भी पार्क में रहते है। इसलिए पूरा दिन दहशत रहती है। पार्क में आने वाले सभी लोगों को सावधान रहने के लिए कहते हैं।

साकेतनगर जूही निवासी मनोज द्विवेदी बंदर के आंतक के कारण दहशत में हैं। तुलसी उपवन में सुबह वॉक के दौरान बंदरों ने दौड़ाकर काटने का प्रयास किया। किसी तरह से भागकर जान बचाई। मनोज का कहना है कि बंदरों की दहशत के कारण पार्क में आना-जाना बंद कर दिया है। अब घूमने के लिए मेनरोड संजयवन जाते हैं। सुबह के समय यहां पर अत्याधिक भीड़ होने के कारण खतरा थोड़ा कम होता है।

अकांक्षा गुप्ता का कहना है कि सेंट थामस स्कूल के पास निवास होने से स्थिति बहुत खराब है। स्कूल के आसपास बड़े पेड़ होने के कारण पूरा दिन बंदर छतों पर बने रहते हैं। दिन के समय पूरा झुंड रोड पर बैठ जाता है। स्कूल आने वाले बच्चे रोड बदलकर स्कूल पहुंचते हैं।

कईबार अभिभावक बच्चों को लेकर रोड से गुजरने का प्रयास किया तो झुंड ने हमला कर दौड़ा लिया। स्थानीय लोगों के भागकर आने पर जान बची। पूरा घर जाली से पैक हैं। बावजूद बच्चों के निकलने पर बाहर तक देखने आना पड़ता है।

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