बरेली: आत्मनिर्भर बनेंगी गोशालाएं...बायोगैस प्लांट से करेंगी कमाई
चार विकास खंडों की बड़ी गोशाला में बनेंगे बायोगैस प्लांट
बरेली, अमृत विचार। गोशालाओं की आय बढ़ाने को गोबर का उपयोग बायोगैस और वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने में किया जाएगा। इस पायलट प्रोजेक्ट में जनपद की चार ब्लाकों की बड़ी गोशालाओं को शामिल किया गया है। इनमें करीब 1800 गोवंश संरक्षित हैं। प्रत्येक बायोगैस प्लांट पर सवा करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस दिशा में प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है। इससे गोशालाएं आत्मनिर्भर बनेंगी और उनकी दशा भी सुधरेगी।
जिले में स्थाई और अस्थाई गोशालाओं में करीब 10 हजार गोवंश संरक्षित हैं। इनमें जनपद के फतेहगंज पश्चिमी के रफियाबाद, नवाबगंज के अधकटा नजराना, भुता के चठिया फैजू और मझगवां के खनगवां श्याम में वृहद गोशालाएं हैं। इनमें बायोगैस प्लांट स्थापित किया जाना है। अफसरों के मुताबिक गोशालाओं में चारे-भूसे के इंतजाम में अक्सर बजट की कमी आड़े आती है। इसको लेकर आए दिन शासन स्तर पर शिकायतें होती हैं।
प्रत्येक गोशाला के लिए सरकार प्रति गोवंश के हिसाब से 900 रुपये महीना भरण पोषण को देती है। इसके बाद भी कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है। इस कमी को दूर करने और गाय के गोबर का उपयोग कर गोशालाओं की आय बढ़ाने के लिए बायोगैस और वर्मी कंपोस्ट खाद बनाई जाने का निर्णय लिया गया है। रफियाबाद व अधकटा नजराना गोशाला में पंचायती राज विभाग ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है। अफसरों के अनुसार प्लांट स्थापित होने पर पाइप लाइन के माध्यम से लोगों के घरों तक बायोगैस को पहुंचाया जाएगा।
होलिका दहन में करें गोशाला में बने गोबर के लट्ठे का उपयोग
नवाबगंज : शनिवार को समाधान दिवस में शिकायतें सुनने आए जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने व्यापारी नेताओं से होली पर पर्यावरण संरक्षण की बात कहते हुए कहा कि होलिका दहन के लिए लकड़ी का उपयोग न कर अधकटा नजराना गोशाला में बने गोबर के लट्ठे का प्रयोग करने के साथ ही सभी को प्रेरित करें। व्यापारी नेता संजीव गुप्ता व प्रेम रस्तोगी ने कस्बे में तीनों हालिका दहन स्थल पर गोशाला में बने गोबर के लट्ठे के प्रयोग में लाने का आश्वासन दिया।
ऐसे बनेगी वर्मी कंपोस्ट खाद
गोशाला में गड्ढे बनाने के बाद उसमें गोबर एकत्र किया जाएगा। इसमें केंचुए पाले जाएंगे। गोबर से खाद बनने के बाद उसे बोरियों में भरकर बिक्री की जाएगी। 20 किलोग्राम की बोरी 100 रुपये में बेची जाएगी। बाजार में 20 रुपये प्रति किलो खाद बिकती है। दोनों गोशालाओं से प्रतिदिन एक क्विंटल से ज्यादा खाद तैयार होगी।
पशुपालकों को भी मिलेगा लाभ
पहले गोशालाओं की गायों से गोबर लिया जाएगा। इससे गोशाला की आय बढ़ेगी और गायों की देखभाल में आने वाली दिक्कतों का भी समाधान हो जाएगा। साथ ही जरूरत बढ़ने पर इन प्लांट में पशु पालकों से गोबर खरीदा जाएगा, जिसके बदले उन्हें पैसा दिया जाएगा। इससे कचरा प्रबंधन के इंतजाम होंगे और पशुपालक आत्मनिर्भर बन पाएंगे। चार ब्लाकों में बायोगैस प्लांट लगाने के बाद, जनपद के अन्य विकास खंड में भी प्लांट लगाने के लिए सर्वे होगा।
पहले चरण में बायो गैस प्लांट के लिए और वर्मी कंपोस्ट खाद के लिए चार वृहद गोशालाओं का चयन किया गया है। इनमें फतेहगंज पश्चिमी स्थित गोशाला में प्लांट में काम पूरा हो चुका है। नवाबगंज की अधकटा नजराना गोशाला में काम चल रहा है। जल्द इनसे गैस और खाद की बिक्री शुरू हो जाएगी। शासन का उद्देश्य गोशालाओं की आय बढ़ाने का है। इसके बाद अन्य गोशालाओं में काम शुरू होगा- जग प्रवेश, सीडीओ।
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