बरेली: कृषि विभाग में घोटाले की जांच करेंगे डीसी मनरेगा, जानिए पूरा मामला

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शासन के निर्देश पर हाथरस के विभागीय उपनिदेशक भी कर रहे हैं मामले की जांच

बरेली, अमृत विचार। फार्म मशीनरी बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर योजना में करोड़ों के गोलमाल की जांच जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने डीसी मनरेगा गंगाराम वर्मा को सौंपी है। डीसी मनरेगा के मुताबिक प्रथम दृष्टया गोलमाल हुआ है। उनके मुताबिक सगे भाइयों को योजना का लाभ दिया जा सकता थे लेकिन पति-पत्नी को नहीं। ऐसे में तत्कालीन अधिकारी और पटल सहायक पर कार्रवाई तय है।

यह प्रकरण वर्ष 2020-21 और 2021-22 का है। कृषि उपनिदेशक कार्यालय में सब्सिडी पर मिलने वाले कृषि यंत्रों की योजना में जमकर खेल किया गया था। बहेड़ी विधायक अताउर रहमान और आलमपुर जाफराबाद ब्लाक के पूर्व ब्लाक प्रमुख ने शासन में शिकायत की तो मामला खुला। यह गोलमाल पिछले महीने प्रदेश के कई जनपदों में सामने आने पर कृषि निदेशक ने प्रदेश के समस्त जिलों में जांच बैठा दी थी। बरेली की जांच हाथरस के डीडी को मिली है। इधर, विधायक सोमवार को फिर डीएम से मिले तो प्रकरण की जांच डीसी मनरेगा को सौंप दी गई।

घोटाले से जुड़े साक्ष्य देख चौंक गए डीसी मनरेगा
जांच मिलने पर डीसी मनरेगा ने विधायक और ब्लाक प्रमुख से साक्ष्य मांगे थे। बुधवार को इसका परीक्षण किया तो वह चौंक गए। कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए बलविंदर सिंह के साथ उनके सगे भाई कुलविंदर सिंह को वर्ष 2020-21 में लाभ मिलना दिखाया गया। इसी तरह संजीव सिंह के साथ उनकी पत्नी सीमा सिंह को भी सेंटर मिल गया। जबकि ऐसा कोई नियम बना ही नहीं है।

भोजीपुरा के ठिरिया बन्ने के रामकुमार को कस्टम हायरिंग के लिए 2020 -21 के बाद 2021-22 में भी चयन कर लिया गया। दोनों बार ट्रैक्टर के साथ दूसरे यंत्र दिए गए, जिसे प्रथम दृष्टया गलत माना है। ब्लॉक भदपुरा की लालता प्रसाद कृषि यंत्र सोसाइटी का भी फार्म मशीनरी बैंक के लिए दो बार चयन करने में अनियमितता की बात सामने आई है।

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