बरेली: नकली किताब छापने का मामला...मेरठ में दो दर्जन स्थानों पर दबिश

टीम आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी, कुंडली खंगाल कर बरेली आई वापस

बरेली: नकली किताब छापने का मामला...मेरठ में दो दर्जन स्थानों पर दबिश

गिरफ्तार राजीव पहले टाइल्स बनाकर ठेकेदारों को करता था सप्लाई

बरेली, अमृत विचार। भोजीपुरा क्षेत्र के औद्योगिक क्षेत्र में नकली किताब छापने के मामले में मेरठ कनेक्शन आने के बाद पुलिस की दो टीमों ने मेरठ में करीब दो दर्जन संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं कर सकीं। पुलिस आरोपियों का ब्योरा जुटाने में जरूर सफल रही। टीम ने आरोपियों के संपर्क में रहने वाले संदिग्ध लोगों की सूची भी तैयार की है। जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

औद्योगिक क्षेत्र के जिस प्लाट में नकली किताबें छापी जा रही थीं वह प्लाट इज्जतनगर क्षेत्र के कर्मचारी नगर निवासी राजीव गुप्ता के नाम से आवंटन हुआ था। साथ ही वह फैक्ट्री में पार्टनर भी थे। पुलिस ने गिरफ्तार राजीव गुप्ता से पूरी रात पूछताछ की। पूछताछ में बरेली समेत अन्य जनपदों के कई डीलरों के नाम सामने आ रहे हैं। इन साक्ष्यों को आधार बनाकर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है। सूची के आधार पर ही गिरफ्तारियां भी की जाएंगी। इस फैक्ट्री में रोजाना 50 से 60 हजार नकली किताबें छापी जा रही थीं, जो यूपी-उत्तराखंड में सप्लाई होती थी।

इस फर्जी फैक्ट्री का खुलासा एनसीईआरटी की टीम की छापेमारी में हुआ था। इस फैक्ट्री का मालिक मेरठ निवासी अवनीश मित्तल है। अपने साथियों राजीव गुप्ता, पीयूष कंसल, सोनू, राहुल गुप्ता और सचिन गुप्ता के सहयोग से एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने का काम करता था। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जल्द ही इस मुकदमें में कुछ अन्य लोगों के नाम शामिल किए जाएंगे।

मेरठ कनेक्शन सामने आने के बाद दो टीमें मेरठ के लिए रवाना की गई थीं। जिन्होंने दो दर्जन से भी अधिक संभावित ठिकानों पर दबिश दी। सभी आरोपी घर से फरार हैं। सभी की कुंडली टीम ने खंगाली है। जल्द ही सभी की गिरफ्तारियां कर ली जाएंगी। फिलहाल टीम वापस बरेली पहुंच गई है-राजकुमार अग्रवाल, एसपी देहात।

एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने के मामले में गिरफ्तार हुआ उद्यमी राजीव गुप्ता पहले टाइल्स बनाता था और नगर निगम के ठेकेदारों को सप्लाई करता था, लेकिन एक साल से निगम में आई कंगाली और बढ़ते कर्ज पर बैंक के दबाव में उसने प्लाट किराये पर दे दिया।

भोजीपुरा के जिस प्लाट पर किताबों की अवैध छपाई हो रही थी, वह प्लाट राजीव गुप्ता का है। राजीव निगम में ठेकेदारी भी करता है। निगम में काम करने के बाद उसका करोड़ों रुपया फंसा है। चर्चा है कि कर्मचारी नगर के रहने वाले तनेजा नाम के शख्स ने राजीव और किताब छापने वाले व्यक्ति के बीच बात कराई थी, लेकिन कभी असली मालिक को सामने नहीं लाया।पकड़े गए प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों ने पूछताछ में पुलिस को बताया था कि आठ महीने में तीन बार ही मालिक आए। लंबे कदकाठी चश्मा लगाने वाले मालिक जब-जब यहां आए तब-तब सफाई पर ज्यादा जोर रहता था।

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