लखीमपुर-खीरी: 72 घंटे में तीन पार्टियों में जताई आस्था...अब फिर भाजपा में पहुंचे ज्ञान

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Edited By Amrit Vichar
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लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। सपा से टिकट न मिलने पर बागी हुए पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश बाजपेई को लेकर बुधवार को सियासी गलियारों में खूब उथल-पुथल मची रही। 72 घंटे में तीन पार्टियों में आस्था जताने वाले ज्ञान प्रकाश बाजपेई ने आखिरकार भाजपा का दामन थाम लिया। टिकट बंटवारे से लेकर नामांकन तक जो घटनाक्रम सामने आए। उससे अब बगावत कर शामिल हुए बागियों पर पार्टियों का भरोसा टूटने लगा है। उन्हें पार्टी में रहकर भी भितरघात का खतरा सताने लगा है।

पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश बाजपेई ने वर्ष 2021 में भाजपा को छोड़कर सपा की सदस्यता ली थी। इससे पहले बसपा और कांग्रेस में भी रह चुके हैं। उन्होंने नगर पालिका का पहला चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था और जीत दर्ज कराई थी। उसके बाद निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत दर्ज कराई थी। 

इस बार वह सपा से नगर निकाय चुनाव में टिकट के प्रबल दावेदार थे, लेकिन सपा नेतृत्व ने हाल ही में बसपा छोड़कर सपा में शामिल हुए मोहन बाजपेई की पत्नी रमा मोहन बाजपेई को टिकट दे दिया था। इससे नाराज ज्ञान प्रकाश बाजपेई, सपा नेत्री पारुल गुप्ता समेत कई लोगों ने सपा छोड़ दी थी। ज्ञान प्रकाश बाजपेई ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की और अपनी पुत्र वधू लता बाजपेई को कांग्रेस से चुनावी मैदान में उतारा था। 

उधर भाजपा से टिकट कटने से बागी हुई पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष इरा श्रीवास्तव ने निर्दलीय पर्चा दाखिल कर दिया। सोमवार को पारुल गुप्ता ने भाजपा की सदस्यता ले ली थी। अपने ससुर और कांग्रेसी नेताओं के साथ पर्चा दाखिल करते समय बड़ा खेल हो गया। उनके नामांकन पर्चे में कांग्रेस की बजाय निर्दलीय लिखा गया। पार्टी का बी फार्म भी नहीं लगाया गया। 

उधर मौजूदा क्षेत्र पंचायत सदस्य होने के कारण उमा बाजपेई का पर्चा निरस्त हो गया। बुधवार को जिले की राजनीति में एक बार सियासी पारा उस वक्त चढ़ गया जब ज्ञान प्रकाश बाजपेई ने जिलाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह के समक्ष भाजपा की प्राथमिक सदस्यता ले ली। सपा, कांग्रेस हा चाहे भाजपा। दूसरे दलों से बगावत कर आए लोगों को पार्टी में शामिल तो कर लिया गया, लेकिन दो दिनों में जिस तरह से उठल पुथल हुई। उससे शामिल हुए बागियों पर पार्टी विश्वास नहीं जता पा रही हैं। 

उन्हें भीतरघात का डर सताने लगा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टियां बागियों को चुनाव प्रचार से दूर रखने और उन पर नजर रखने की रणनीति बनाई है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी के पदाधिकारियों को आशंका है कि दूसरे दलों से आए बागी षड़यंत्र कर पार्टी के प्रत्याशी को कमजोर कर सकते हैं। नगर पालिका लखीमपुर में पर्चा खारिज होने के बाद कांग्रेस अब चुनाव मैदान से बाहर हो गई है। 

कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रहलाद पटेल का कहना है कि पार्टी ने लता बाजपेई को बी फार्म भी दिया था, लेकिन बी फार्म पर्चे के साथ न लगाना और कांग्रेस की जगह निर्दलीय लिखना प्रत्याशी के मंसूबे पर सवाल खड़ा करता है। भाजपा में शामिल होने पर उन्होंने कहा कि हो सकता है कि सत्ता के दबाव में आकर उनका हद्य परिवतन हो हो गया और भाजपा में शामिल हो गए।

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