बरेली: मेहनत के सौ पर भारी दलाली के 20 रुपये का लालच

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बरेली, अमृत विचार। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को दी जाने वाली निशुल्क यूनिफार्म वितरण को लेकर जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। तीन सौ रुपये प्रति सेट तैयार होने वाली यूनिफार्म के वितरण में करीब सौ रुपये की दलाली की जा रही है। इस खेल में लिप्त होने वाली महिला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को …

बरेली, अमृत विचार। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को दी जाने वाली निशुल्क यूनिफार्म वितरण को लेकर जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। तीन सौ रुपये प्रति सेट तैयार होने वाली यूनिफार्म के वितरण में करीब सौ रुपये की दलाली की जा रही है। इस खेल में लिप्त होने वाली महिला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को करीब 25 रुपये प्रति सेट के हिसाब से दिए जा रहे हैं, जबकि खुद सिलाई करने पर उन्हें 90 से 100 रुपये मिलते हैं। लेकिन बिना काम के मिलने वाले इन 25 रुपयों के मोह से स्वयं सहायता समूहों की कई महिलाएं उबर नहीं पा रही हैं।

ग्रामीण इलाकों के परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को दी जाने वाली मुफ्त यूनिफार्म की सिलाई का काम राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत चुने 521 महिला स्वयं सहायता समूहों की 2821 महिलाओं को दिया गया है। इन महिलाओं को चार लाख 18 हजार 284 यूनिफार्म तैयार करना है। यूनिफार्म का एक सेट सिलकर तैयार करने पर इन महिलाओं को 90 से 100 रुपये मिलने हैं।

प्रशासन ने बाजार में मिलने वाली घटिया क्वालिटी की यूनिफार्म के वितरण पर रोक लगाने के लिए इन महिला स्वयं सहायता समूहों से ही यूनिफार्म सिलवाने की बाध्यता कर दी। इस वजह से स्कूलों घटिया क्वालिटी की यूनिफार्म वितरित करने वाले ठेकेदारों ने कुछ महिला स्वयं सहायता समूहों से संपर्क करके उन्हें प्रति यूनिफार्म करीब 25 रुपये का लालच दिया।

उन्हें बस यह करना है कि अपने स्वयं सहायता समूह के नाम से यूनिफार्म सप्लाई करानी है। इस तरह की यूनिफार्म का विरोध शिक्षक न करें, इसके लिए उन पर दबाव बनवाया जा रहा है। इस बात को कई शिक्षक स्वीकार भी कर चुके हैं। शिक्षकों का कहना है कि अगर वे यूनिफार्म लेने से इनकार करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई करने का डर दिखाया जाता है।

इस पूरे खेल में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यूनिफार्म वितरण कराने के लिए जिम्मेदार बीएसए विनय कुमार सिंह और डीसी मनरेगा गंगाराम को इन प्रकरणों की जानकारी ही नहीं है। दोनों अधिकारियों का कहना है कि उनके पास अब तक इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है।

एक यूनिफार्म सिलाई के मिलते 90 से 100 रुपये
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत तैयार किए गए महिला स्वयं सहायता समूहों को बेसिक स्कूलों के छात्र-छात्राओं की यूनिफार्म तैयार करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया। यही नहीं, इन स्वयं सहायता समूहों में कार्यरत महिलाओं को सिलाई करने पर प्रति यूनिफार्म करीब 90 से सौ रुपये तक दिए जाने का जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक में तय किया गया।

स्कूलों में डील करने में राजनेताओं का भी बड़ा हाथ, डील करने पहुंचते है स्कूल
यूनिफार्म प्रकरण में रविवार को जब पूरे घोटाले को खोलता हुआ एक ऑडियो सामने आया तो शिक्षकों से लेकर अधिकारियों तक सन्नाटा पसर गया। वायरल ऑडियों की खबर छपने के बाद सभी एक दूसरे को शक की निगाहों से देखने लगे। मगर इसी बीच इस पूरे प्रकरण को खोलते हुए एक और मामला सामने आया। बताया जा रहा है कि इस यूनिफार्म प्रकरण में सिर्फ ठेकेदार ही नहीं बल्कि कुछ राजनेता भी शामिल है। यह राजनेता बड़ी-बड़ी लग्जरी गाड़ियों से घूमकर स्कूलों से ठेका उठाते हैं।

एक शिक्षक नेता के मुताबिक एक बड़ी पार्टी के नेता यूनिफार्म का ठेका उठाने के लिए बड़ी-बड़ी लग्जरी गाड़ियों से स्कूलों में घूमते हैं। क्यारा ब्लॉक के अधिकांश स्कूलों में उन्होंने अपनी तगड़ी पकड़ बना रखी है। यह राजनेता स्कूलों में पहुंचकर हेडमास्टर से ठेका देने की बात कहते है। अगर कोई शिक्षक आनाकानी करता है तो वह उच्चाधिाकारियों से फर्जी शिकायत कर परेशान करने में जुट जाते है। जब तक उन्हें ठेका मिल नहीं जाता, तब तक वह स्कूल का पीछा नहीं छोड़ते है। ऐसा नहीं है कि यह बात उच्चाधिाकारियों के संज्ञान में नहीं है। मगर यह पूरा खेल सभी की मनमर्जी और सांठगांठ के साथ चलता है।

जांच पर भी उठ रहे सवाल
राजनेताओं के मामले की बात जब शिक्षक नेताओं के सामने आई तो उनका साफ तौर पर कहना कि यदि यह बात उच्चाधिाकारियों से संज्ञान में भी आ जाती है तब भी इस पर जांच बैठाने के लिए कोई अधिकारी आगे नहीं आएगा। कई शिक्षक नेता इसके विरोध में शामिल हो चुके है।

फिलहाल मेरें संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है। यदि इस बात के साक्ष्य मिले तो सीडीओ साहब से बात कर कार्रवाई की जाएगी। -विनय कुमार, बीएसए

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