मुरादाबाद: नटखट आकृति के खिलौने देखकर खिलखिलाएंगे नन्हे-मुन्ने
मुरादाबाद, अमृत विचार। पीतल की चमक के साथ खिलौनों की नटखट आकृति जब बच्चों के सामने आएगी तो उनके चेहरे खिलाखिला उठेंगे। वहीं लकड़ी के आकर्षक बनावट के खिलौने बच्चों को लुभाएंगे। मेड इन इंडिया का जब यह आइडिया हस्तशिल्पकारों तक पहुंचा तो उनके चेहरे पर भी एक रौनक सी नजर आने लगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र …
मुरादाबाद, अमृत विचार। पीतल की चमक के साथ खिलौनों की नटखट आकृति जब बच्चों के सामने आएगी तो उनके चेहरे खिलाखिला उठेंगे। वहीं लकड़ी के आकर्षक बनावट के खिलौने बच्चों को लुभाएंगे। मेड इन इंडिया का जब यह आइडिया हस्तशिल्पकारों तक पहुंचा तो उनके चेहरे पर भी एक रौनक सी नजर आने लगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात सुनकर पीतल नगरी के कलाकार उत्साहित ही नहीं हुए, बल्कि जोश से और भर गए। रविवार को हर बार की तरह नरेंद्र मोदी मन की बात कर रहे थे और इस बार निर्यातकों से लेकर हस्तशिल्पकारों की दिलचस्पी भी इसे सुनने में देखी गई। उत्साह तब नजर आया जब पीएम मोदी ने कारोबार से जुड़ी बात की।
उन्होंने बच्चों के मानसिक विकास के लिए उन्हें नटखट और आकर्षित खिलौनों के साथ खेलने पर जोर दिया। खिलौने विदेशी न होकर देसी होंगे तो इसका प्रभार कारोबार को बेहतर करने में भी दिखेगा। आइडिया अच्छा था तो कारोबारियों को तो खुशी होनी ही थी। वरिष्ठ निर्यातक अवधेश अग्रवाल ने बताया कि पीएम मोदी ने मन की बात कहकर कारोबार के लिए बेहतर सोच दी है। हम देश ही नहीं विदेश में भी भारतीय संस्कृति को उकेरकर पहुंचा सकते हैं। बच्चों को खिलौनों के माध्यम से और निखार ला सकते हैं। निर्यातक नवेद उर रहमान ने बताया कि अच्छी सोच है और इसपर अमल होना चाहिए।
चुलबुले बच्चों को पढ़ाएंगे क्रांतिकारियों का पाठ
पांच सितंबर को शिक्षक दिवस है और इस दिन से बच्चों में क्रांतिकारियों के बलिदान की गाथा सुनाने के लिए शिक्षकों ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। यह आइडिया भी शिक्षकों को पीएम मोदी की मन की बात से मिला है। दरअसल, देश को आजाद कराने के लिए क्रांतिकारियों ने जो लड़ाई लड़ी, बलिदान दिया, उससे अभी भी युवा पूरी तरह से परिचित नहीं है। खासकर बच्चों को तो बहुत कम ही पता है। चंद्र शेखर आजाद, भगत सिंह, महात्मा गांधी ऐसे कुछ नाम हैं, जिनकी हल्की फुल्की जानकारी बच्चों को जरूर होती है। अब उन्हें और क्रांतिकारियों के बारे में ठीक से पता चल सके, इसको लेकर पीएम मोदी ने मनकी बात में पांच सितंबर से शिक्षकों से अभियान चलाने को कहा है। उनका कहना है कि 2022 में जब स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा और तब तक शिक्षकों को इसपर अच्छा काम करना चाहिए।
कोरोना काल में योद्धा बनकर उभरा किसान
पीएम मोदी की मन की बात सुनकर किसानों में उत्साह बढ़ गया है। किसान इस कोरोना काल में एक योद्धा बनकर उभरा है। पीएम मोदी का कहना है कि अन्नदाता को नमन करना चाहिए। उनकी बदौलत धान में दस फीसदी, दाल में पांच फीसदी, मोटे अनाज तीन फीसदी, तेल में तेरह और कपास में तीन फीसदी आच्छादन वृद्धि हुई है। यह साबित करता है कि किसानों ने इस संकट की घड़ी में देश की राहत के लिए बड़ा योगदान दिया है।
