Kanpur News: GSVM Medical College में आएंगे कई राज्यों से आर्थोपेडिक सर्जन, कोविड के बाद बढ़ी मरीजों की संख्या
कानपुर के जीएसवीएम में आएंगे कई राज्यों से आर्थोपेडिक सर्जन।
कानपुर के जीएसवीएम में कई राज्यों से आर्थोपेडिक सर्जन आएंगे। कुल्हा प्रत्यारोपण और हड्डी की बीमारियों पर चर्चा करेंगे। 20 अगस्त को अर्थोप्लास्टि कोर्स की जानकारी दी जाएगी।
कानपुर, अमृत विचार। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में दिल्ली, चेन्नई व यूपी के कई जिलों से रविवार को आर्थोपेडिक सर्जन आएंगे। कॉलेज के छात्र-छात्राओं को कुल्हा व घुटना प्रत्यारोपण की नई विधि बताएंगे। साथ ही हड्डी की बीमारियों की महत्वपूर्ण जानकारी देंगे। क्योंकि कोविड के बाद लोग हड्डी संबंधित बीमारी की चपेट में आ रहे है।
हैलट अस्पताल की आर्थो ओपीडी में इन दिनों प्रतिदिन आठ से 10 मरीज ऐसे आ रहे है, जिनको चलने-फिरने और उठने व बैठने में दिक्कत हो रही है। इनमें बुजुर्ग के साथ ही 20 से 40 वर्ष के युवा भी शामिल हैं। आर्थो सर्जन को बुजुर्गों के साथ ही युवाओं के भी कुल्हे का प्रत्यारोपण करना पड़ रहा है।
इस संबंध में शुक्रवार को कानपुर आर्थोपेडिक एसोसिएशन ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला के कार्यालय में प्रेसवार्ता आयोजित की। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आर्थों विभाग के डॉ. संजय कुमार ने बताया कि युवाओं में कुल्हा प्रत्यारोपण एक गंभीर विषय है। ओपीडी में प्रतिदिन आठ से 10 मरीज कुल्हा प्रत्यारोपण के लिए आते है, जिसमें युवा भी शामिल रहते है।
भविष्य में अगर यह समस्या युवाओं में अधिक बढ़ती है तो उसके लिए मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राएं प्रशिक्षित होंगे। इसलिए 20 अगस्त (रविवार) को नौ वां यूपीओए आर्थोप्लास्टी कोर्स का आयोजन मेडिकल कॉलेज के एलटी-वन हाल में आयोजन किया जा रहा है। एसोसिएशन के सचिव डॉ. चंदन कुमार ने बताया कि कॉलेज में यह कार्यशाला यूपी आर्थोपेडिक एसोसिएशन व मेडिकल कॉलेज प्राचार्य प्रो. संजय काला की अनुमति और एनाटमी विभाग के सहयोग से आयोजित की जा रही है।
इसमें दिल्ली एम्स के डॉ. राजेश मल्होत्रा व चेन्नई से डॉ.अनिल ओमान के साथ ही प्रयागराज, वाराणसी, बांदा, झांसी, लखनऊ समेत आदि जिलो से 150 से 200 आर्थोपेडिक सर्जन शामिल होंगे। सर्जन कुल्हा व घुटना प्रत्यारोपण की नई विधि बताने के साथ ही हड्डी की बीमारियों से निपटने के नए पैतरे जूनियर डॉक्टरों को बताएंगे। इस दौरान उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरी, एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सूरज महरोत्रा व आदि डॉक्टर रहे।
प्रत्यारोपण के दौरान मांसपेशिया कम होंगी खराब
उपाध्यक्ष डॉ. रवि गर्ग ने बताया कि कार्यशाला में मृत देह पर छात्र-छात्राओं को कुल्हा प्रत्यारोपण की विधि सिखाई जाएगी। साथ ही इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाएगा कि प्रत्यारोपण के दौरान मांसपेशियां कम क्षतिग्रस्त हो। मरीज को जल्द आराम मिले और दोबारा चलने-फिरने में दिक्कत न हो सके। साथ ही इस आधुनिक युग में ऑपरेशन के नए तरीकों से अवगत कराने के साथ प्रशिक्षित किया जाएगा।
कोविड के बाद बढ़ रहे मरीज
वरिष्ठ आर्थो सर्जन डॉ. संजय कुमार ने बताया कि ओपीडी में कोविड से पहले प्रतिदिन चार से पांच बुजुर्ग ही कुल्हा व घुटना प्रत्यारोपण के लिए आते थे, लेकिन कोविड के बाद मरीजों की संख्या बढ़ी है। कोविड के बाद युवा भी इस समस्या से ग्रस्त हो रहे है, जिसकी मुख्य वजह शराब व स्टेराइड का अधिक उपयोग करना है। क्योंकि कोविड से ग्रस्त मरीजों को दवा के रूप में स्टेराइड का उपयोग करना, कैल्शियम की कमी की वजह से अब हड्डी कमजोर होने लगी है।
