Gandhi Jayanti 2023: अब्दुल की मौत से दुखी गांधी जी ने रद किया था जुलूस, साधारण कार्यकर्ता के घर शोक जताने पहुंचे थे
अब्दुल की मौत से दुखी गांधी जी ने रद किया था जुलूस।
अब्दुल की मौत से दुखी गांधी जी ने जुलूस रद किया था। कानपुर में स्वागत के दौरान घोड़ा बिदकने से मौत हुई थी। साधारण कार्यकर्ता के घर शोक जताने महात्मा गांधी पहुंचे थे।
कानपुर, [शैलेश अवस्थी]। कोई 103 साल पहले महात्मा गांधी शहर में स्वदेशी भंडार का उद्घाटन करने आए थे और तभी कार्यकर्ता अब्दुल हफीज़ की हादसे में मृत्यु की खबर से इस कदर दुखी हुए कि कई कार्यक्रम रद्द कर उनके घर पहुंच गए और परिवार को ढाढस बंधाया था। वहां से गांधी जी उनके परिजनों से प्रभावित होकर लौटे और अपनी आत्मकथा में भी इसका जिक्र किया।
यह वाकया 21 जनवरी 1920 का है, जिसका ज़िक्र गांधी जी ने अपनी आत्मकथा में भी किया है। वह प्रयागराज से ट्रेन के जरिए कानपुर आए थे। उसके कुछ घंटे पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अली भाई कानपुर आए थे और उनके स्वागत में बड़ा जुलूस निकाला गया था। भीड़ बहुत थी, नारे लग रहे थे। बहुत शोर हो रहा था।
तभी गाड़ी का घोड़ा बिदक गया और घोड़े की लात अब्दुल हाफिज़ के सीने पर लगी और उसी ठौर मौत हो गई। खुशी का जुलूस मातम में बदल गया। एक खाट पर अब्दुल का शव रखा गया। अली भाई ने कन्धा दिया और उनके घर तक गए। इसी बीच स्टेशन पर महात्मा गांधी पहुंचे। उनके स्वागत में भी भारी भीड़ एकत्र थी।
सभी जुलूस के साथ गांधी जी को स्वदेशी भंडार तक लाना चाहते थे। तभी गांधी जी ने अब्दुल की मौत का समाचार सुना तो जुलूस, अपना स्वागत समारोह और सभी कार्यक्रम रद कर दिए। हसरत मोहानी के बहुत आग्रह पर सादगी से स्वदेशी भंडार का उद्घाटन करने के बाद अब्दुल हाफिज़ के घर पहुंच गए। एक साधारण कार्यकर्ता के घर गांधी जी भी पहुंच सकते हैं, यह किसी ने नहीं सोचा था।
ये लिखा गांधी जी ने
गांधी जी आत्मकथा में लिखते हैं, दृश्य ह्रदय द्रावक था, उसकी देह और सुंदर चेहरा देख मुझे अत्यंत दुख हुआ, मैंने धैर्य धारण किया। वहां रोना-धोना नहीं था। घोर चिरनिद्रा में सोए अब्दुल भाई के आसपास सभी शांत होकर बातचीत कर रहे थे। इससे मैं प्रभावित हुआ। आमतौर पर ऐसे समय कितना रोनाधोना होता है। यदि हम मृत्यु का भय छोड़ दें तो अनेक अच्छे कार्य कर सकते हैं। आत्मा अमर है, देह क्षणभंगुर है, कोई ऐसा कार्य नहीं, जिसका परिणाम न होता हो, बचपन से हम यह सीखते आए हैं। तो फिर मृत्यु का भय क्यूं होना चाहिए। अब्दुल का इकलौता पुत्र मेरे सामने खड़ा शांत होकर बात कर रहा था, इस धैर्य से मैं प्रभावित हुआ। भगवान अब्दुल हाफिज़ की आत्मा को शांति प्रदान करे।
आज के नेता अनुसरण करेंगे क्या?
एक साधारण कार्यकर्ता अब्दुल के घर पहुंच कर गांधी जी ने बड़ी सीख दी कि हर कोई इंसान है, पद, दौलत और शोहरत स्थाई नहीं है। सबका सम्मान होना चाहिए। सबके सुख-दुख में खड़े होना चाहिए। इसीलिए तो गांधी जी महात्मा थे। आज के नेता गांधी जी का अनुसरण करेंगे क्या?
