साहित्य अकादमी ने एक सौ पुस्तकों का कराया कॉपीराइट सर्वसुलभ कराया

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Edited By Amrit Vichar
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नई दिल्ली। भारतीय साहित्य का विदेशी भाषा में अनुवाद कराने के लिए साहित्य अकादमी ने एक सौ पुस्तकों का कापीराइट सर्वसुलभ कराया है। साहित्य अकादमी ने बुधवार को यहां बताया कि जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में एक सौ भारतीय भाषाओं की पुस्तकों के कापीराइट सुलभ करायें गये हैं। इनसे भारतीय भाषाओं की पुस्तकों का विदेशी भाषा में अनुवादित संस्करण प्रकाशित करने में सरलता होगी। 

साहित्य अकादमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने बताया कि साहित्य अकादमी ने जिन विभिन्न भारतीय भाषाओं के लेखकों की कुछ पुस्तकों के कॉपीराइट उपलब्ध कराएं गए हैं उनमें प्रमुख रवींद्रनाथ टैगोर, एस.एल. भैरप्पा, मनोज दास, राजेंद्र सिंह बेदी,निर्मल वर्मा, भीष्म साहनी, ताराशंकर वंधोपाध्याय, जयकांतन, कपिला वात्सयायन और गुरुदयाल सिंह आदि हैं। बच्चों की कुछ पुस्तकों के भी कॉपीराइट उपलब्ध कराए गए हैं। 

फ्रैंकफर्ट शहर में आयोजित हो रहे दुनिया के सबसे बड़े पुस्तक मेले में साहित्य अकादमी भी भाग ले रही है। बाईस अक्टूबर तक आयोजित इस पुस्तक मेले में दुनिया भर के 7000 से अधिक प्रकाशक भाग ले रहे हैं। भारतीय मंडप में भारत के 30 सरकारी और निजी प्रकाशकों के स्टाल लगे हैं। यह पुस्तक मेला पुस्तक बेचने से ज्यादा पुस्तकों के प्रकाशन को बढ़ावा देने, नए रुझानों, नवीनता और उसके विस्तार के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने के लिए जाना जाता है। 

साहित्य अकादमी ने अपने स्टाल पर अपनी प्रकाशित 100 से अधिक पुस्तकों के कॉपीराइट उपलब्ध कराएं हैं जिससे उनके अनुवाद अनेक विदेशी भाषाओं में शीघ्र और बिना किसी अड़चन के प्रकाशित हो सकें। वर्ष 1949 से आयोजित हो रहे इस पुस्तक मेले में साहित्य अकादमी कई बार भाग ले चुकी है। 

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