केजीएमयू : डॉ. हैदर अब्बास की सलाह, कहा - इमरजेंसी मेडिसिन का वर्किंग स्टाइल अलग, इलाज के...
लखनऊ, अमृत विचार। इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीज की हालत गंभीर होती है। ऐसे में वहां मौजूद डॉक्टर के सामने दो प्राथमिकता होती है, पहली प्राथमिकता मरीज की जान बचाना और दूसरी प्राथमिकता इलाज में किसी प्रकार की गलती ना होना शामिल होती है। यह दोनों प्राथमिकताएं तभी पूरी होगी जब इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में तैनात डॉक्टर स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल (SOP) का पालन करेंगे। यह जानकारी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के HOD प्रोफेसर (Dr) हैदर अब्बास ने शनिवार को दी है। वह international Georgian alumni meet : 2023 के अवसर पर अवसर पर आयोजित CME को संबोधित कर रहे थे।
प्रोफेसर हैदर अब्बास के मुताबिक इमरजेंसी मेडिसिन विभाग 24×7 काम करता है। यहां पर इलाज के लिए आने वाले मरीज गंभीर स्थिति में होते है। इसलिए इस विभाग में काम करने का वर्किंग कंडीशन भी अन्य विभागों की अपेक्षा अलग होता है। इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में अलग-अलग तरह के गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। उनके सटीक जांच और इलाज के लिए स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल का पालन करना जरूरी होता है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी स्थित इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल का पालन होता है, लेकिन बहुत से ऐसे हॉस्पिटल हैं जहां पर तय मानकों का इस्तेमाल इलाज के दौरान नहीं किया जाता। जिससे मरीज के इलाज में गलती होने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए जरूरी है कि सभी अस्पतालों में विशेष कर इमरजेंसी में आए मरीज का गुणवत्तापूर्ण इलाज के लिए जरूरी दिशा निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। तभी मरीज की जिंदगी बचाई जा सकेगी तथा उसके जीवन की गुणवत्ता भी बरकरार रहेगी।
इस अवसर पर लंदन स्थित चेल्सी और वेस्टमिस्टर अस्पताल के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के इंचार्ज डॉक्टर शशांक पाटिल बतौर मुख्य अतिथि ऑनलाइन शामिल हुए। उन्होंने इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के महत्व के बारे में डॉक्टरों तथा रेजिडेंट को बताया। वही इस अवसर पर सोसायटी आफ इमरजेंसी मेडिसिन, इंडिया के अध्यक्ष डॉ सुजीत सिंह, सचिव डॉक्टर शैफाली शर्मा समेत कई डाक्टर तथा रेजिडेंट मौजूद रहे।
यह भी पढ़ें: पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए खुशखबरी : 60000 से अधिक पदों पर निकली भर्ती, ऐसे करें आवेदन
