भारत- रूस संबंध

Amrit Vichar Network
Published By Moazzam Beg
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भारत और रूस के संबंध काफी पुराने हैं। यूक्रेन में युद्ध की पृष्ठभूमि में रूस और भारत के बीच आर्थिक संबंध पिछले दो वर्षों में चार गुना से अधिक बढ़ गए। रूस भारत के लिए ऊर्जा का सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा है। भारत-रूस शिखर सम्मेलन के सिलसिले में रूस के दौरे पर गए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भू-राजनीतिक और रणनीतिक आधार भारत-रूस संबंधों को सकारात्मक पथ पर बनाए रखेगा। जयशंकर 28 दिसंबर तक रूस की यात्रा पर रहेंगे। 

ध्यान रहे ये लगातार दूसरा वर्ष है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत और रूस के बीच होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। अमेरिका के प्रतिबंधों को झेल रहे रूस का दौरा न करके प्रधानमंत्री पश्चिम को संकेत दे रहे हैं, जबकि जयशंकर का दौरा रूस के लिए संकेत है कि भारत ने अपने पुराने रणनीतिक सहयोगी को छोड़ा नहीं है। पिछले साल फ़रवरी में यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था जिसके बाद में प्रधानमंत्री मोदी रूस के दौरे पर नहीं गए। 

चीन और भारत के बीच प्रतिद्वंद्विता बढ़ रही है। दोनों देश रूस के करीबी साझेदार हैं लेकिन रूस मध्यस्थता करने की स्थिति में नहीं है। फिर भी समय के साथ परखी गई भारत-रूस साझेदारी स्थिर और लचीली बनी हुई है तथा विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की भावना से रेखांकित है। पिछले 70 वर्षों में अमेरिका-रूस, रूस-चीन और यूरोप-रूस संबंधों में अच्छे और बुरे दौर आए, लेकिन रूस के साथ भारत के संबंध स्थिर रहे हैं। यूक्रेन और मॉस्को के बीच संघर्ष का भारत तथा रूस के बीच संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ा तथा ये मजबूत बने हुए हैं। 

भारत ने अभी तक यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की निंदा नहीं की है और वह कहता रहा है कि संकट को कूटनीति एवं बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। दोनों देशों में यह समझ रही कि एशियाई शक्तियों के रूप में उनके पास साथ रहने की इच्छा रखने का एक संरचनात्मक आधार है। सितंबर में न्यूयार्क में विदेश संबंध परिषद में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था कि भारत यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानी बरतता है कि रूस के साथ संबंध अच्छी स्थिति में रहें। 

गौरतलब है कि वार्षिक शिखर सम्मेलन भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी में सर्वोच्च संस्थागत वार्ता तंत्र है। उम्मीद है कि शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं, विशेषकर व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे। क्योंकि दोनों देश एक दूसरे के महत्व को स्वीकार करते हैं।

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