पौराणिक कथा : सत्य और भक्ति की परीक्षा

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Published By Anjali Singh
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प्राचीन समय में एक गरीब ब्राह्मण भगवान श्रीकृष्ण का परम भक्त था। वह प्रतिदिन नदी से जल लाकर मंदिर में भगवान का अभिषेक करता और सच्चे मन से पूजा करता था। उसके पास धन-संपत्ति नहीं थी, फिर भी वह कभी दुखी नहीं रहता था। गांव के लोग उसकी गरीबी का मजाक उड़ाते और कहते, “इतनी पूजा से क्या मिलेगा?”

एक दिन गांव में भयंकर अकाल पड़ा। खेत सूख गए, पशु मरने लगे और लोगों के घरों में अन्न समाप्त हो गया। सभी लोग परेशान होकर इधर-उधर सहायता खोजने लगे। उस ब्राह्मण के पास भी भोजन नहीं बचा था, लेकिन उसने अपनी पूजा और भगवान पर विश्वास नहीं छोड़ा। उस रात उसे स्वप्न में श्रीकृष्ण ने दर्शन दिए और कहा, “कल प्रातः नदी किनारे जाना, तुम्हारी सहायता होगी।” 

अगले दिन ब्राह्मण वहां पहुंचा तो उसे रेत में दबा एक घड़ा मिला, जो सोने के सिक्कों से भरा था। उसने उस धन को केवल अपने लिए नहीं रखा, बल्कि पूरे गांव में अन्न और पानी की व्यवस्था करवाई। गांव वाले उसकी दया और भक्ति देखकर चकित रह गए। तब ब्राह्मण ने कहा, “सच्ची भक्ति वही है, जो केवल अपने सुख के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के कल्याण के लिए हो।”