सामयिकी : यूपी चुनाव की तैयारियों के बीच विपक्ष में खींचतान

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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YASHODA SHRIWASTWA
यशोदा श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार  

 

यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव को आठ-नौ महीने ही शेष हैं। राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी चुनावी बिसात बिछानी भी शुरू कर दी हैं। जाहिर है योगी आदित्यनाथ हर हाल में तीसरी बार सत्ता में लौटने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे, जबकि विपक्ष यानी इंडिया गठबंधन, उन्हें सत्ता से बेदखल करने की पूरी कोशिश करेगा। हाल में ही संपन्न पांच प्रदेशों के चुनावों में तीन प्रदेशों में सरकार बना लेने से भाजपा के हौसले बुलंद हैं। 2022 के चुनाव में भाजपा ने अपनी 60 सीटें गंवा दी थीं। 

ओवैसी की पार्टी का यूपी में चुनाव लड़ने का एलान कहीं न कहीं भाजपा के लिए संजीवनी का काम कर सकता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आगामी विधानसभा चुनाव में विपक्ष यानी इंडिया गठबंधन भाजपा से मुकाबले के लिए कितना तैयार है? 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने भाजपा को कड़ी टक्कर देते हुए शानदार सफलता पाई थी। 2027 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष को 2024 के लोकसभा चुनाव जैसा परिणाम ला पाना भी एक चुनौती है।

इसके पहले यूपी में हुए सात विधानसभा सीटों के उपचुनाव में भाजपा कुंदरकी जैसे मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर भी अपना परचम फहराने में कामयाब हुई, मिल्कीपुर विधानसभा चुनाव जीत कर अयोध्या लोकसभा चुनाव में हार का बदला लेने में भी सफल हुई थी। खैर, उपचुनावों का इतिहास देखें तो पता चलता है कि इसके सत्ता पक्ष के ही हिस्से में आने की संभावना ज्यादा रहती है। मजे की बात यह है जिन प्रदेशों में गैर भाजपा सरकारें हैं, वहां उसे एक ही टर्म में सत्ता विरोधी लहर का शिकार हो जाना पड़ता है, जबकि रहस्यमयी ढंग से भाजपा सरकारों के साथ ऐसा नहीं होता। ताज़ा उदाहरण असम का लिया जा सकता है, जहां दो बार से सत्ता में रही भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर नहीं देखी गई और भाजपा तीसरी बार सरकार में आ गई। 

विपक्ष खासकर इंडिया गठबंधन के घटक दलों में जैसी उठापटक दिख रही है, उसे देख यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चा स्वाभाविक है, चूंकि सत्तारूढ़ एनडीए के मुखालफत इंडिया अलायंस प्रमुख विपक्षी गठबंधन है, जिसका नेतृत्व बड़ा दल होने के नाते कांग्रेस के हाथ में है। इस गठबंधन की त्रासदी यह है कि एक ओर इसे कांग्रेस के भीतर से चुनौती मिल रही है, तो दूसरी ओर गठबंधन में शामिल घटक दलों के नेताओं से भी। दोनों ओर से शब्दों के व्यंग्य बाण जारी हैं। तमिलनाडु में डीएमके ने गठबंधन से अपने सांसदों के अलग होने की घोषणा कर ही दी है।

आम आदमी पार्टी पहले ही गठबंधन से अलग हो गई है, बंगाल की ममता बनर्जी की टीएमसी भी गठबंधन से लगभग दूर ही हैं। कांग्रेस ने तमिलनाडु में नई नवेली पार्टी टीवीके को अपना नया साथी तलाश लिया है, लेकिन इससे फिलहाल अभी कांग्रेस को कोई बड़ा फायदा होता नहीं दिख रहा है। हां, ऐसा करके कांग्रेस ने तमिलनाडु में भाजपा के सहयोगी दल को सत्ता में आने से रोक जरूर दिया, लेकिन इसके बदले लोकसभा में उसे बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी। 

इंडिया गठबंधन के मौजूदा हाल को देखें तो साफ दिखता है कि महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिव सेना (ठाकरे) का कांग्रेस से मनमुटाव चल रहा है। झारखंड में हेमंत सोरेन भी कांग्रेस को बहुत भाव नहीं दे रहे हैं। बिहार में आरजेडी और कांग्रेस के बीच बहुत कुछ ठीक नहीं चल रहा। गठबंधन को लेकर बची-खुची संभावना यूपी में ही है। (ये लेखक के निजी विचार हैं) 

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