रूस से बढ़ती पाकिस्तान की नजदीकी और भारत

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Published By Deepak Mishra
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भारत के स्वाभाविक मित्र रूस से पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी भारत के लिए बहुत अच्छे संकेत नहीं हैं। इन सबके बीच ही पाकिस्तान ने ब्रिक्स का भी पूर्ण सदस्य बनने के लिए लॉबिंग शुरू की है। 

Digvijay
दिग्विजय सिंह, कानपुर

 

भारत के स्वाभाविक मित्र रूस से पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी भारत के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। इन सबके बीच ही पाकिस्तान ने ब्रिक्स का भी पूर्ण सदस्य बनने के लिए लाबिंग शुरू की है। तुर्किए भी चाहता है कि उसे सदस्य बनाया जाए। पाकिस्तान को चीन का समर्थन है। 2024 में रूस भी समर्थन कर चुका है। पुन: रूस समर्थन न कर देगा, इसके लिए भारत की निगाह रूस पर है।

देखना है कि रूस, भारत की भावनाओं की कद्र करता है या पाकिस्तान का समर्थन, हालांकि ब्रिक्स समूह में पाकिस्तान तभी शामिल हो सकेगा, जब भारत मंजूरी देगा। ऐसे में फिलहाल पाकिस्तान हो या तुर्किए, इनका सपना तो नहीं पूरा होने जा रहा है। पाकिस्तान इस मामले में भारत के समक्ष बातचीत का प्रस्ताव रखने जा रहा है, ताकि उसकी यह मुराद पूरी हो जाए, जबकि तुर्किए ने चुप्पी साध रखी है। वह समय का इंतजार कर रहा है।  

दुनिया की सबसे प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का प्रमुख समूह ब्रिक्स वैश्विक जीडीपी में लगभग 37 फीसद का योगदान देता है और 40 फीसद से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका ने ब्रिक्स का गठन किया था।

अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हैं, जबकि बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान भागीदार देश के रूप में शामिल हैं। पाकिस्तान चाहता है कि इस समूह का वह भी पूर्ण सदस्य बन जाए। चीन उसकी सदस्यता का वर्षों से समर्थन कर रहा है। 

इस वक्त ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है। पाकिस्तान ने पूर्ण सदस्य बनने के लिए स्थायी सदस्य देशों के बीच लॉबिंग शुरू की है। इसमें उसे कुछ हद तक सफलता मिलती नजर आ रही है, लेकिन उसकी राह में सबसे बड़ी बाधा भारत है, क्योंकि बिना सर्वसहमति के किसी भी देश को सदस्य नहीं बनाया जा सकता है। ऐसे में पाकिस्तान इस मुद्दे पर भारत से बात करने के लिए आतुर दिख रहा है। इसके संकेत पाकिस्तानी राजदूत फैसल नियाज तिरमिजी ने दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पाकिस्तान, भारत के साथ बातचीत करने को तैयार है। 

पाकिस्तान को लगता है कि ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन में उसे सदस्यता मिल सकती है, इसीलिए वह भारत को मनाना चाहता है। पाकिस्तान शंघाई सहयोग संगठन का भी सदस्य है, इसलिए वह अपना दावा मजबूती से पेश कर रहा है, लेकिन ब्रिक्स में उसका शामिल होना भारत के लिए किसी भी स्थिति में अच्छा नहीं है, क्योंकि शंघाई सहयोग संगठन की तरह ही वह ब्रिक्स में भी जम्मू- कश्मीर का मुद्दा उठा सकता है। इस मंच पर भी उसे चीन, कश्मीर के मुद्दे पर समर्थन दे सकता है। साथ ही ब्रिक्स बैंक से पाकिस्तान को बड़े पैमाने पर आर्थिक मदद भी मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। 

पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थक देश है। वह भारत में लगातार आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता रहा है। पहलगाम में आतंकी हमले के कारण ही भारत को ऑपरेशन सिंदूर लांच करने के साथ ही सिंधु नदी जल समझौते को रद करना पड़ा था। ब्रिक्स में शामिल होने के बाद तो पाकिस्तान यहां सिंधु जल समझौते की बहाली की भी मांग करेगा। ऐसे में इस विशाल समूह से उसका बाहर रहना ही उचित होगा। 

चीन के अतिरिक्त कोई देश उसका समर्थन न करे भारत को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए। रही बात रूस की तो पिछले कुछ महीनों से वह पाकिस्तान के साथ तेजी से गलबहियां कर रहा है, जो भारत के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। 2024 में रूस ने पाकिस्तान की सदस्यता का समर्थन किया था, हालांकि अब इस बार वह समर्थन करेगा या नहीं यह देखना होगा। भारत पर जब भी संकट आया, रूस ने ही आगे बढ़कर हमारी मदद की, लेकिन बदलते भू राजनीतिक समीकरणों के बीच अब पाकिस्तान उसे साधने में लगा हुआ है और कुछ हद तक सफल हुआ है। उसकी सफलता के पीछे चीन भी है। 

चीन अब रूस की मजबूरी बन चुका है। यूक्रेन युद्ध में आर्थिक रूप से कमजोर हुआ रूस, अब कई मामलों में चीन के सहारे है। ऐसे में चीन उसे पाकिस्तान से दोस्ती बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहा है। पाकिस्तान ने ग्वादर बंदरगाह को रूस के इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर से जोड़ने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव पर रूस ने सहमति दे दी है। जब ग्वादर बंदरगाह और रूस का ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर आपस में जुड़ेंगे, तो इसका लाभ चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को भी मिलेगा। इसका जुड़ाव भी उससे हो जाएगा। ऐसा होना भारत के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा। 

रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक ने ग्वादर बंदरगाह को रूस के कॉरिडोर से जोड़ने के प्रस्ताव पर बनी सहमति की घोषणा की है। इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर 7,200 किलोमीटर का है जो रूस के मुख्य केंद्रों को ईरान के बंदरगाहों और हिंद महासागर से जोड़ता है। अब अगर इसमें पाकिस्तान भी शामिल होता है, तो यह भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी झटका होगा, क्योंकि पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए बड़ी चुनौती है।

रूस की पाकिस्तान के साथ दोस्ती भारत के लिए कई मामलों में चुनौती बन सकती है। ऐसे में अब भारत किसी न किसी तरह से रूस-पाकिस्तान की दोस्ती के बीच में दीवार भी बनना होगा। पाकिस्तान ने पहले ही सऊदी अरब से सुरक्षा समझौता करके भारत को झटका दिया था। रही बात ब्रिक्स की तो भारत, पाकिस्तान और उसके दोस्त तुर्किए को रोक तो लेगा, लेकिन रूस जैसे देश यदि उसे समर्थन देते हैं तो इसका असर भारत की छवि पर भी पड़ेगा।  

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