इसरो-एरीज का 'मिशन नेत्र', आसान होगी धरती के पास की निगहबानी 

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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जो काम 4 मीटर की दूरबीन से न हो सकेगा, अब वह कार्य मात्र 60 सेंटीमीटर की टेलीस्कोप कर दिखाएगी। नैनीताल स्थित आर्य भट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) की 60 सेंटीमीटर की वाइड फील्ड टेलीस्कोप हाईटेक बनने जा रही है, जो अगले वर्ष जनवरी में धरती की नजदीकी वस्तुओं की निगरानी शुरू कर देगी। 

वर्तमान में एरीज के पास चार मीटर तक की विश्वस्तरीय अत्याधुनिक दूरबीनें उपलब्ध हैं, जो ब्रह्मांड के हजारों प्रकाश वर्ष दूरस्थ क्षेत्रों को देखने की क्षमता रखती हैं। मगर धरती के नजदीकी क्षेत्रों के अध्ययन के लिए अलग से दूरबीन जरूरत थी। इस कमी को पूरा करने के लिए एरीज 60 सेंटीमीटर की दूरबीन स्थापित करने जा रहा है, जिसे पूर्व में स्थापित 50 सेंटीमीटर की दूरबीन का अपग्रेडेशन के जरिए पूरा किया जा रहा है। एरीज के डॉ. टी.एस. कुमार बताते हैं कि इस दूरबीन को हाईटेक बनने के बाद देश के पास एक और महत्वपूर्ण सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। इस ऑप्टिकल दूरबीन का डाया 60 सेंटीमीटर का इजाद किया जा रहा है।

पहले यह 50 सेंटीमीटर व्यास की थी और साधारण रूप से ट्रेनिंग के लिए बनाई गई थी मगर अब इससे बहुमुखी ऑब्जर्वेशन किए जा सकेंगे। इसमें सी मॉस डिटेक्टर लगाया जा रहा है। यह सेंसेटिव उपकरण होगा, जो सैकड़ों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूमते सेटेलाइट और क्षुद्र ग्रहों की गति का आकलन कर सकेगी। इसके ऑप्टिक्स भी सेंसेटिव होंगे। यह मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ मिलकर किया जा रहा है। इसका बजट इसरो ही वहन कर रहा है। इस मिशन को 'नेत्र' नाम दिया गया है। 'नेत्र मिशन' का कार्य शुरू किया जा चुका है जिसे दिसंबर तक पूर्ण कर लिया जाएगा और अगले वर्ष जनवरी से कार्य करना शुरू कर देगी।

हाईटेक दूरबीन के बहुमुखी ऑब्जर्वेशन 

उल्लेखनीय है कि, वाइड फील्ड टेलीस्कोप आकाश के बड़े भाग को देख सकेगी। इसका काम पृथ्वी के ऑर्बिट में घूमते सेटेलाइट हों या फिर अंतरिक्ष का कचरा, उनके साथ ही धरती की तरफ आने वाले पिंडों पर नजर रखना होगा। इसके अलावा, अंतरिक्ष में भेजे जाने अंतरिक्ष यानों के मार्ग में आने वाली बाधाओं, जैसे अंतरिक्ष कचरा और क्षुद्रग्रह से आगाह करना होगा। यदि इस तरह की कोई आशंका हुई तो सेटेलाइट लॉन्च कार्यक्रम कुछ समय के लिए रोक दिया जाएगा। इसके अलावा, पृथ्वी के ऑर्बिट में घूम रहे सेटेलाइट की सुरक्षा को लेकर अंतरिक्ष के कचरे की निगरानी करना भी होगा। साथ ही, ब्रह्मांड में नजर आने वाली किसी भी रहस्यमय, संदिग्ध वस्तु पर भी नजर रख सकेगी। यह दूरबीन भले ही छोटी होगी लेकिन तमाम अत्याधुनिक सुविधाओं से संपन्न अंतरिक्ष की निगरानी करने का बड़ा कार्य करने में सक्षम होगी। 

प्रस्तुति: बबलू चंद्रा, नैनीताल